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Sanskrit Class 9 Chapter 3 Summary Sharada आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः संस्कृत पुस्तक शारदा का तृतीय अध्याय है। इस पाठ में सभी प्राणियों के प्रति समानता, करुणा, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण का महत्त्व बताया गया है। पाठ का मुख्य संदेश है कि जो व्यक्ति दूसरों के सुख-दुःख को अपने समान समझता है और सभी प्राणियों के प्रति सद्भाव रखता है, वही वास्तविक अर्थ में विद्वान और विवेकी कहलाता है।

Sanskrit Class 9 Chapter 3 Summary Sharada आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः।
पाठ का सरल हिंदी में सारांश

इस पाठ का मुख्य विचार है कि सच्चा पण्डित वही है जो सभी प्राणियों में अपने समान आत्मा को देखता है।
संस्कृत सूत्र
आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः।
भारत देश में अनेक महात्मा और संत हुए हैं जिन्होंने करुणा, क्षमा, अहिंसा, दया और भाईचारे का संदेश दिया। महाराष्ट्र के संत कवि नामदेव महाराज ने अपने जीवन से करुणा और भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया।
कथा में बताया गया है कि नामदेव ने ईश्वर को केवल मंदिर में ही नहीं, बल्कि सभी जीवों में देखा। जब एक श्वान (कुत्ता) ने nivedyam (नैवेद्य) उठा लिया, तब नामदेव ने उसे दंडित नहीं किया, बल्कि करुणा से घृत (घी) का पात्र लेकर कहा —
हे देव! शुष्कां रोटिकां मा खादतु, घृतम् अपि स्वीकरोतु।
हे भगवान! सूखी रोटी मत खाइए, बल्कि घृत (घी) भी स्वीकार कीजिए। इससे यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर हर जीव में विद्यमान है और हमें सभी के प्रति करुणा रखनी चाहिए।
पाठ से मिलने वाली शिक्षा
- ईश्वर सर्वत्र है — केवल मंदिर में नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव में।
- करुणा और दया ही सच्ची भक्ति है।
- अहिंसा और क्षमा का पालन करना चाहिए।
- सभी जीवों को समान देखना ही पण्डित का लक्षण है।
पाठ की विशेषताएँ
- कथा शैली में प्रस्तुत, जिससे बच्चों को शिक्षा मिलती है।
- नामदेव महाराज का जीवन करुणा और भक्ति का आदर्श है।
- इसमें ईश्वर सर्वत्र है का सिद्धांत स्पष्ट किया गया है।
- बच्चों को जीवों के प्रति दया और करुणा का संदेश दिया गया है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
| संस्कृत में | हिंदी में |
|---|---|
| आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः। | आत्मवत सभी जीवों को समान देखने वाला ही पण्डित है। |
| नामदेवः ईश्वरं सर्वेषु जीवेषु ददर्श। | नामदेव ने ईश्वर को सभी जीवों में देखा। |
| नामदेवः शुनकं न ताडितवान्, करुणया तं पोषितवान्। | नामदेव ने श्वान को दंडित नहीं किया, बल्कि करुणा से घृत दिया। |
| ईश्वरः न केवलं मन्दिरे, अपि तु सर्वभूतेषु। | ईश्वर केवल मंदिर में नहीं, बल्कि सभी जीवों में है। |
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