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Sanskrit Class 9 Chapter 4 Summary Sharada न खलु वयस्तेजसो हेतुः का चतुर्थ अध्याय है। इस पाठ में व्यक्ति की वास्तविक योग्यता, प्रतिभा और सामर्थ्य का महत्त्व बताया गया है। पाठ का मुख्य संदेश है कि किसी व्यक्ति की क्षमता केवल उसकी आयु पर निर्भर नहीं होती। कम आयु का व्यक्ति भी अपनी प्रतिभा, ज्ञान, साहस और कार्यकुशलता से महान कार्य कर सकता है।

Sanskrit Class 9 Chapter 4 Summary Sharada न खलु वयस्तेजसो हेतुः
इस पाठ में भारत के वीर बालक खुदीराम बोस का जीवनवृत्त प्रस्तुत है। उन्होंने कम आयु में ही देशभक्ति और बलिदान का अद्भुत उदाहरण दिया। बंगाल विभाजन (1905) के समय अंग्रेज़ों के अत्याचार देखकर उनके मन में क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित हुई। वे क्रांतिकारी दल में सम्मिलित होकर अंग्रेज़ अधिकारियों को दंडित करने का संकल्प लेते हैं।
28 अप्रैल 1908 को खुदीराम और प्रफुल्ल चाकी ने अंग्रेज़ अधिकारी किंग्सफोर्ड की हत्या का प्रयास किया। यद्यपि योजना में त्रुटि हुई और अन्य लोग मारे गए, फिर भी यह घटना क्रांतिकारी आंदोलन की दिशा बदलने वाली सिद्ध हुई।
खुदीराम को पकड़कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। वहाँ उन्होंने निर्भीकता से केवल यही उत्तर दिया —
“वन्दे मातरम्।”
11 अगस्त 1908 को मात्र 19 वर्ष की आयु में वे हुतात्मा बने। उनके चेहरे पर भय नहीं, बल्कि प्रसन्नता और तेज था। इसीलिए कहा गया —
“न खलु वयस्तेजसो हेतुः।”
तेजस्विता का कारण आयु नहीं होती।
उनका जीवन संदेश था —
“यावत् भारतम् आङ्गलशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् त्यागधारा न धरिष्यामि।”
जब तक भारत अंग्रेज़ों के शासन से मुक्त नहीं होगा, तब तक मैं त्याग की धारा को रोकूँगा नहीं।
महत्वपूर्ण श्लोक और वाक्य
| संस्कृत में | हिंदी में |
|---|---|
| न खलु वयस्तेजसो हेतुः। | तेजस्विता (साहस और वीरता) का कारण आयु नहीं होती। यानी वीरता और पराक्रम उम्र पर निर्भर नहीं है। |
| वन्दे मातरम्। | हे माँ! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ। — यह भारत माता की स्तुति और जयघोष है। |
| यावत् भारतम् आङ्गलशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् त्यागधारा न धरिष्यामि। | जब तक भारत अंग्रेज़ों के शासन से मुक्त नहीं होगा, तब तक मैं त्याग की धारा को रोकूँगा नहीं। यानी स्वतंत्रता प्राप्ति तक निरंतर बलिदान करता रहूँगा। |
पाठ से मिलने वाली शिक्षा
- देशभक्ति सबसे बड़ा धर्म है।
- त्याग और बलिदान से ही स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
- आयु नहीं, साहस ही वीरता का मापदंड है।
- अन्याय का विरोध करना ही सच्चा कर्तव्य है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को हुआ।
- बंगाल विभाजन (1905) से उनमें क्रांति की भावना जागी।
- 28 अप्रैल 1908 को किंग्सफोर्ड की हत्या का प्रयास किया।
- न्यायालय में निर्भीक उत्तर — “वन्दे मातरम्।”
- 11 अगस्त 1908 को मात्र 19 वर्ष की आयु में हुतात्मा बने।
- उनका जीवन संदेश — “न खलु वयस्तेजसो हेतुः।”
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