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Sanskrit Class 9 Chapter 9 Summary Sharada कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः

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Sanskrit Class 9 Chapter 9 Summary, “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” कक्षा 9 संस्कृत का एक महत्वपूर्ण पाठ है। इस पाठ में उपकार के बदले उपकार करना और दूसरों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने की शिक्षा दी गई है। पाठ विद्यार्थियों को समझाता है कि मनुष्य को दूसरों द्वारा किए गए अच्छे कार्यों को याद रखना चाहिए और अवसर मिलने पर उसका उचित प्रत्युपकार करना चाहिए। यही सद्भावना, कृतज्ञता और परस्पर सहयोग से जुड़ा सनातन धर्म माना गया है।

Sanskrit Class 9 Chapter 9 Summary Sharada कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः

Sanskrit Class 9 Chapter 9 Summary Sharada कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः

यह पाठ महाभारत की कथा एकचक्र से लिया गया है। इसमें बताया गया है कि पाण्डव एक ब्राह्मण के घर निवास कर रहे थे। नगर में बक नामक राक्षस प्रतिदिन एक मनुष्य को भोजन सहित माँगता था। उस दिन ब्राह्मण परिवार की बारी आई। ब्राह्मण दुखी होकर अपने पुत्र को भेजने की सोचता है। कुंती ने यह सुना और भीमसेन को भेजने का निश्चय किया। भीमसेन ने कहा —

भैक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृत्यं रम्यम् ।
कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः ॥

अर्थात् उपकार का प्रतिकार करना ही सनातन धर्म है। भीमसेन ने ब्राह्मण परिवार की रक्षा के लिए स्वयं बकासुर के पास जाने का संकल्प लिया। उसने कहा कि वह अपने बल से राक्षस को पराजित करेगा।

इमौ च मे पतीरौ बाहू सहायौ सहोदरौ मम ।
बकं चरधरं श्चय्याचम च सिंहः क्षुद्रमृगं यथा ॥

मेरे दोनों भुजाएँ सिंह के समान हैं, मैं बकासुर को क्षुद्र मृग की तरह मार दूँगा। भीमसेन ने बकासुर से युद्ध किया।

रक्षाः साधुलोकानां ररिठिः बाहुशालिनाम् ।
च नषूदको चहचिम्बसय मृत्युः शाचसम् भरादृशाम् ॥

क्षत्रिय का धर्म है कि वह साधुजनों की रक्षा करे और दुष्टों का नाश करे। युद्ध में भीमसेन ने बकासुर को पराजित कर नगरवासियों को भय से मुक्त किया।

पाठ से मिलने वाली शिक्षा

  • उपकार का प्रतिकार करना ही सनातन धर्म है।
  • बल और साहस से दुष्टों का नाश करना चाहिए।
  • क्षत्रिय धर्म है कि वह साधुजनों की रक्षा करे।
  • संकट में कर्तव्य पालन ही सच्चा धर्म है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • मुख्य संदेश → “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः”।
  • पात्र → कुंती, भीमसेन, ब्राह्मण परिवार, बकासुर।
  • महत्वपूर्ण श्लोक →
    • भैक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृत्यं रम्यम् । कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः ॥
    • इमौ च मे पतीरौ बाहू सहायौ सहोदरौ मम । बकं चरधरं श्चय्याचम च सिंहः क्षुद्रमृगं यथा ॥
    • रक्षाः साधुलोकानां ररिठिः बाहुशालिनाम् । च नषूदको चहचिम्बसय मृत्युः शाचसम् भरादृशाम् ॥
  • निष्कर्ष → धर्म का पालन करना, उपकार का प्रतिकार करना और दुष्टों का नाश करना ही सनातन धर्म है।

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