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क्या लिखूं Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 2

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Class 9 Hindi Ganga Chapter 2 के NCERT Solutions विद्यार्थियों को पाठ के प्रश्नों और उनके उत्तरों को सरल एवं आसान भाषा में समझने में मदद करते हैं। इस अध्याय में दिए गए प्रश्नों के उत्तर NCERT पाठ के आधार पर तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी पाठ को अच्छी तरह समझने के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी भी कर सकें। यहाँ आपको Chapter 2 के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल, स्पष्ट और exam-ready उत्तर मिलेंगे।

क्या लिखूं Class 9 NCERT Solutions  Hindi Ganga Chapter 2

क्या लिखूं Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 2

मेरे उत्तर – मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूंटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूंटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूंटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दिखाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना

उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दिखाना

2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मॉन्टेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव

उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव

4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दिखाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में

उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए

5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।

उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

मेरी समझ – मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—

1. निबंध लेखन के विषय में ए.जे. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

उत्तर: ए.जे. गार्डिनर मानते हैं कि निबंध लिखना एक विशेष मानसिक अवस्था है, जिसमें भाव अपने‑आप उमड़ते हैं और लेखन सहज हो जाता है। लेकिन पदुमलाल बख्शी कहते हैं कि उनके लिए निबंध लिखना मेहनत और सोच का काम है। उन्हें विषय पर विचार करना और परिश्रम करना पड़ता है।

2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या‑क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर: तरुणों को लगता है कि वर्तमान में अवसर कम हैं, इसलिए वे भविष्य को उज्ज्वल मानते हैं। वृद्धों को लगता है कि वर्तमान में पुराने मूल्य और परंपराएँ खो गई हैं, इसलिए वे अतीत को सुखद मानते हैं।

3. नम्रता और अहमता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या‑क्या कठिनाइयाँ आईं?

उत्तर: नमिता चाहती थी कि लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय पर निबंध लिखें, जबकि अमिता चाहती थी कि वे ‘समाज-सुधार’ विषय पर निबंध लिखें। लेखक के लिए कठिनाई यह थी कि ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय छोटा और सीमित था, जबकि ‘समाज-सुधार’ बहुत व्यापक विषय था। दोनों विषयों पर एक आदर्श और प्रभावशाली निबंध लिखना आसान नहीं था।

4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन‑सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?

उत्तर: आचार्यों ने कहा कि निबंध छोटा होना चाहिए, उसमें सामग्री और शैली दोनों का संतुलन होना चाहिए। भाषा प्रवाहपूर्ण और वाक्य छोटे‑छोटे होने चाहिए। मेरी तैयारी: पहले विषय पर विचार करता हूँ, फिर रूपरेखा बनाता हूँ, और अंत में सरल भाषा में अपने विचार लिखता हूँ।

5. मॉन्टेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिख दिया।” निबंध लेखन के लिए देखना, सुनना और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

उत्तर: देखना, सुनना और अनुभव करना निबंध को जीवन से जोड़ता है। इससे लेखन कृत्रिम नहीं लगता, बल्कि सच्चा और जीवंत बनता है। लेखक के भाव सीधे पाठक तक पहुँचते हैं और निबंध प्रभावशाली हो जाता है।

निबंध लेखन की कला

‘निबंध’ का शब्दार्थ है— ‘बाँधना’ (नि+बंध), अर्थात भली‑भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करता है।

शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए।

अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दिखाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है।

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उत्तर: निबंध का अर्थ है – किसी विषय को बाँधकर क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करना। इसमें लेखक अपने अनुभव, विचार और भावनाओं को तार्किक और साहित्यिक ढंग से व्यक्त करता है।

निबंध लेखन की प्रक्रिया (आरेख के आधार पर)

  • प्रेरणा – सबसे पहले लेखक को लिखने की प्रेरणा मिलती है। यह प्रेरणा जीवन के अनुभवों, समाज या किसी घटना से आती है।
  • विषय चयन – प्रेरणा के बाद लेखक विषय चुनता है। विषय ऐसा होना चाहिए जो पाठकों को आकर्षित करे और लेखक को लिखने की उमंग दे।
  • सामग्री संग्रह – विषय से जुड़ी जानकारी, उदाहरण और तर्क इकट्ठा किए जाते हैं।
  • रूपरेखा निर्माण – सामग्री को क्रमबद्ध करने के लिए रूपरेखा बनाई जाती है ताकि विचार बिखरे न लगें।
  • शैली निर्धारण – भाषा और अभिव्यक्ति का ढंग तय किया जाता है। शैली सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली होनी चाहिए।
  • लेखन और समापन – अंत में लेखक अपने विचारों को लिखता है और निबंध को सार्थक निष्कर्ष के साथ समाप्त करता है।

भाव-विस्तार

“तरुण क्रांतिक के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक।”

यदि उपयुक्त वाक्य का भाव-विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि— युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वे किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर तुरंत निर्णय लेना चाहते हैं। जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।

पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव‑विस्तार कीजिए—

1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चरित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”

उत्तर: इसका भाव यह है कि जो युवा अभी जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों से परिचित नहीं हैं, उन्हें संसार बहुत सुंदर और आकर्षक लगता है। वे केवल सुखद पक्ष देखते हैं और कठिनाइयों का अनुभव नहीं कर पाते।

2. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”

उत्तर: इसका भाव यह है कि हर युग में समाज में दोष और कमियाँ रही हैं। इन्हें दूर करने के लिए सुधार आवश्यक होते हैं। सुधार कभी समाप्त नहीं होते, क्योंकि नई समस्याएँ बार‑बार उत्पन्न होती रहती हैं।

3. “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”

उत्तर: इसका भाव यह है कि वर्तमान में युवा भविष्य को उज्ज्वल मानते हैं, लेकिन जब वे वृद्ध हो जाते हैं तो अपने अतीत को गौरवपूर्ण मानकर याद करते हैं।

4. “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”

उत्तर: इसका भाव यह है कि संक्षिप्त और सारगर्भित निबंध अधिक प्रभावी होता है। लंबा निबंध अक्सर उबाऊ हो जाता है और उसमें आकर्षण कम हो जाता है।

मेरा अनुभव

इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?

उत्तर: इस निबंध में लेखक को दो विषयों – “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज‑सुधार” – पर लिखना था। इसी तरह हमें भी अलग‑अलग विषयों पर निबंध लिखने पड़ते हैं।

मेरे अनुभव में—

  • सरल विषय: जैसे पर्यावरण संरक्षण, विद्यालय जीवन, या मित्रता पर लिखना आसान लगा। इन विषयों पर मेरे पास अपने अनुभव और उदाहरण होते हैं, इसलिए लिखना सहज होता है।
  • कठिन विषय: जैसे समाज‑सुधार, इतिहास से जुड़ी घटनाएँ या दार्शनिक विचार पर लिखना कठिन लगा। इन विषयों के लिए गहरी जानकारी और तर्क चाहिए, जो तुरंत सोचना मुश्किल होता है।

विषय से संवाद

1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या‑क्या कार्य किए।

उत्तर:

  • बुद्धदेव – करुणा, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया तथा लोगों को सत्य और सदाचार का मार्ग दिखाया।
  • महावीर स्वामी – अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम का संदेश दिया।
  • नागार्जुन – अपने दार्शनिक एवं तर्कपूर्ण विचारों से भारतीय चिंतन को प्रभावित किया।
  • शंकराचार्य – अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और भारतीय दर्शन को नई दिशा दी।
  • कबीर – जाति-पाँति, अंधविश्वास और बाहरी आडंबरों का विरोध किया तथा प्रेम और समानता का संदेश दिया।
  • गुरु नानक – समानता, सेवा, सत्य और भाईचारे का संदेश दिया।

2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस‑पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री‑शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर:

  • सावित्रीबाई फुले – स्त्री‑शिक्षा की अग्रदूत, लड़कियों के लिए विद्यालय खोले।
  • अन्ना हजारे – गाँवों में पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए काम किया।
  • सुधा मूर्ति – शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में गरीबों की मदद करती हैं।
  • NGO संस्थाएँ – दिव्यांगजन और असमानता से जूझ रहे लोगों के लिए सहायता और प्रशिक्षण देती हैं।

3. आपको ‘समाज‑सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या‑क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।

उत्तर: अगर मुझे समाज‑सुधार का अवसर मिले तो मैं—

  • शिक्षा का प्रसार – हर बच्चे को शिक्षा दिलाऊँगा।
  • पर्यावरण संरक्षण – पेड़ लगाऊँगा और जल बचाऊँगा।
  • समानता – जाति‑भेद और भेदभाव को खत्म करने का प्रयास करूँगा।
  • स्वच्छता – गाँव और शहर को साफ रखने की आदत डालूँगा।

4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।

उत्तर: भारतीय ज्ञान साहित्य हमें सिखाता है कि जीवन में केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि नैतिकता और आध्यात्मिकता भी ज़रूरी है।

  • नैतिकता से समाज में विश्वास और शांति रहती है।
  • आध्यात्मिकता से मन को शांति मिलती है।
  • व्यावहारिक जीवन से हम रोज़मर्रा की समस्याओं का समाधान कर पाते हैं।

सृजन

1. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।

आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी— ‘आम के आम गुठलियों के दाम’। अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।

उत्तर: ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ का अर्थ है – एक ही काम से कई लाभ मिलना। इसी तरह जब हम जैविक खाद बनाते हैं तो हमें कई फायदे होते हैं।

  • खेत की मिट्टी उपजाऊ बनती है।
  • फसल अच्छी होती है।
  • रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है।
  • पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

2. “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।”

आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए। आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: पाठ में बताया गया है कि ढोल की आवाज़ पास में रहने वालों को शोर जैसी लगती है, लेकिन दूर बैठे लोगों को वही आवाज़ मधुर लगती है।

मेरे साथ भी ऐसा हुआ।
एक बार मैं संगीत कार्यक्रम में गया।

  • जब मैं मंच के पास था, तब ढोल और नगाड़ों की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि कानों में दर्द होने लगा।
  • लेकिन जब मैं थोड़ी दूरी पर चला गया, तो वही आवाज़ उत्साह और आनंद देने लगी।

इससे समझ आता है कि पास का अनुभव और दूर का अनुभव अलग‑अलग हो सकता है।

व्याकरण की बात – समास

“मुझे उन दोनों को निबंध‑रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा।”

उपयुक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों ‘निबंध’ और ‘रचना’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है— निबंध की रचना।

उत्तर:

  • सामासिक पद: निबंध‑रचना
  • समास विग्रह: निबंध की रचना
  • समास का नाम: तत्पुरुष समास

समास

समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है।
जैसे – गंगा + जल = गंगाजल, देश + भक्त = देशभक्त। इस प्रकार समास वह शब्द रचना है, जिसमें दो (या दो से अधिक) अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं।

समास रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं।
जैसे – गंगाजल में ‘गंगा’ पूर्वपद और ‘जल’ उत्तरपद है। इसी तरह देशभक्त शब्द में ‘देश’ पूर्वपद और ‘भक्त’ उत्तरपद है। समास रचना से बने शब्द को समस्त पद कहते हैं; जैसे – गंगाजल, देशभक्त।

जब समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग‑अलग किए जाएँ, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। जैसे – ‘गंगाजल’ का विग्रह होगा: गंगा + जल (गंगा का जल)।

समास के छह प्रमुख भेद –

1.तत्पुरुष समासइस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद गौण होता है। तत्पुरुष समास की रचना में समस्त पदों के बीच आने वाले परसर्गों (का, से, पर आदि) का लोप हो जाता है।
उदाहरण – रसोईघर = रसोई + घर (रसोई के लिए घर)
2.कर्मधारय समासकर्मधारय समास में पूर्वपद विशेषण तथा उत्तरपद विशेष्य होता है। अथवा पूर्वपद और उत्तरपद में उपमेय‑उपमान का संबंध होता है। उदाहरण: श्वेतकमल = श्वेत + कमल → श्वेत रंग का कमल।
3.द्विगु समासजिन समासों का पूर्वपद संख्यावाची शब्द होता है, वहाँ द्विगु समास होता है।
अर्थ की दृष्टि से यह समास प्रायः समूहवाची होता है। उदाहरण: त्रिरंगा = तीन रंगों का संग्रह।
4.बहुव्रीहि समासबहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होते हैं तथा ये दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद के विषय में संकेत करते हैं। अन्य पद ही ‘प्रधान’ होता है।
उदाहरण: पीतांबर = पीत + अंबर → पीला अंबर (वस्त्र) जिसका अर्थ है कृष्ण/विष्णु।
5.द्वंद्व समासइस समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं तथा दोनों पदों को जोड़ने वाले समुच्चयबोधक अव्यय का लोप हो जाता है।
अव्यय वे शब्द होते हैं जिनमें लिंग, वचन, पुरुष आदि की दृष्टि से कोई रूप परिवर्तन नहीं होता।
उदाहरण: भाई‑बहन = भाई और बहन।
6.अव्ययीभाव समासइस समास में पूर्वपद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय (क्रिया‑विशेषण) का कार्य करता है। उदाहरण: यथाशक्ति = यथा + शक्ति → शक्ति के अनुसार।
कुछ पुनरुक्त शब्दों में भी अव्ययीभाव समास होता है। उदाहरण: धीरे‑धीरे, जल्दी‑जल्दी, दिन‑दिन।

2. निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नाम
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष समास

उत्तर:

सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नाम
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष समास
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष समास
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष समास
जीवन-संग्रामजीवन का संग्रामतत्पुरुष समास
अतीत-गौरवअतीत का गौरवतत्पुरुष समास
निबंध-लेखननिबंध का लेखनतत्पुरुष समास
सुख-दुःखसुख और दुःखद्वंद्व समास
तरुण-वृद्धतरुण और वृद्धद्वंद्व समास

उपसर्ग और प्रत्यय

  • “सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।”
  • “समाज‑सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।”

दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘बोध’ के पहले ‘दुर्’ उपसर्ग और ‘आदि’ के पहले ‘अन्’ उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। उपसर्ग भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता है। ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।

अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए—

  • “आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं।”
  • “लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है।”

रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘सुधार’ के बाद ‘क’ प्रत्यय और ‘कठिन’ शब्द के बाद ‘आई’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। प्रत्यय भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप में नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।

3. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन‑पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर:

उपसर्ग वाले शब्द।

  • उपसर्ग वाले शब्द
  • दुर्बोध → दुर् + बोध
  • अनादि → अन् + आदि
  • असंतोष → अ + संतोष
  • अस्पष्ट → अ + स्पष्ट
  • प्रसिद्ध → प्र + सिद्ध
  • सुहावना → सु + हावना
  • अनुभव → अनु + भव
  • परिवर्तन → परि + वर्तन

प्रत्यय वाले शब्द।

  • सुधारक → सुधार + क
  • कठिनाई → कठिन + आई
  • मधुरता → मधुर + ता
  • स्पष्टता → स्पष्ट + ता
  • सुंदरता → सुंदर + ता

4. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए—

  • निबंध लिखना बड़ी _ (कठिन …) की बात है।
  • वर्तमान से दोनों को _ (… संतोष) होता है।
  • वाक्यों में कुछ _ (… स्पष्ट …) भी चाहिए, क्योंकि यह _ (… स्पष्ट …) या _ (… बोध …) गंभीरता ला देती है।
  1. उत्तर:
  • निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।
  • वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।
  • वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।

5. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

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उत्तर:

  • मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
  • कठिन → कठिनाई, कठिनतम, अकठिन
  • सुधार → सुधारक, सुधारना, असुधार्य
  • बोध → दुर्बोध, बोधगम्य, बोधक

भाव और शब्द अनेक

1. इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते‑जुलते हैं। उदाहरण के लिए: विचार – मनन – चिंतन या सुहावने – मधुर – मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  • विचार – मनन – चिंतन → लेखक ने निबंध लिखने के लिए गहन विचार, मनन और चिंतन किया।
  • सुहावने – मधुर – मनमोहक → दूर से ढोल की आवाज़ सुहावनी, मधुर और मनमोहक लगती है।

इन शब्दों के अर्थ मिलते‑जुलते हैं और वाक्य में प्रयोग करने से उनका भाव स्पष्ट होता है।

2.“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठा ढोल बजा।।”

उत्तर:

  • अनमेल हास्य‑व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है।
  • इसमें असंगत वाक्यों और विपरीत परिस्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है।
  • अमीर खुसरो आम लोगों को हँसाने और बहलाने के लिए ऐसे प्रयोग करते थे।

आप उनके अन्य अनमेल, मुकरियाँ और पहेलियाँ का संग्रह भी कर सकते हैं।

3. पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेल आई है। अनमेल एक प्रकार की हास्य‑व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत परिस्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेल, मुकरियाँ व पहेलियाँ का संग्रह कीजिए।

कक्षा में ‘युवा और वृद्ध — दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद‑विवाद का आयोजन कीजिए। वाद‑विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।

उत्तर (संकेत): वाद‑विवाद के आयोजन के लिए नियम इस प्रकार बनाए जा सकते हैं—

  • विषय स्पष्ट रूप से घोषित किया जाए।
  • प्रत्येक प्रतिभागी को बोलने के लिए निश्चित समय दिया जाए।
  • पक्ष और विपक्ष दोनों को बराबर अवसर मिले।
  • भाषा सरल और स्पष्ट हो।
  • अंत में निर्णायक मंडल द्वारा परिणाम घोषित किया जाए।

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