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कबीर की वाणी Class 9 Summary Hindi Chapter 8 Reva

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कबीर की वाणी Class 9 Summary Hindi Chapter 8 Reva का सरल और आसान भाषा में सारांश प्रस्तुत करता है। इस पाठ में कबीर के दोहों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों, सच्चाई, आत्मचिंतन, गुरु के महत्व और आडंबर से दूर रहने का संदेश दिया गया है। कबीर अपनी वाणी के माध्यम से मनुष्य को अपने भीतर झाँकने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह सारांश विद्यार्थियों को पाठ के मुख्य विचार और संदेश को आसानी से समझने में मदद करेगा।

कबीर की वाणी Class 9 Summary Hindi Chapter 8 Reva

कबीर की वाणी Class 9 Summary Hindi Chapter 8 Reva

दोहे का सारांश

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद वदयो बताय॥”

कबीर कहते हैं कि जब गुरु और भगवान दोनों सामने खड़े हों, तो पहले किसके चरण छुएँ? वे कहते हैं कि पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें भगवान का मार्ग दिखाते हैं।

“ऐसी बानी बोवलए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु ँ सीतल होय॥”

ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन का अहंकार मिटे। जो दूसरों को शांति दे और खुद भी शांत बने।

“अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥”

बुरी बातें न बोलनी चाहिए, न सुननी चाहिए और न फैलानी चाहिए।

“बड़ा हुआ तो कया हुआ, जैसे पेड खजूर।
पंथी को ्ाया नहीं, फल लागै अति दूर॥”

केवल बड़ा होना अच्छा नहीं है। जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा तो होता है, पर उसका फल दूर होता है और यात्रियों को छाया नहीं देता। बड़ा वही है जो दूसरों को लाभ पहुँचाए।

“कल करै सो आज कर, आज करै सो अबब।
पल मैं परलै होयगी, बहुरर करैगा कबब॥”

जो काम कल पर टाल रहे हो, उसे आज करो। और जो आज करना है, उसे अभी करो। क्योंकि मृत्यु अचानक आ सकती है, फिर काम करने का समय नहीं मिलेगा।

“दुख में सुवमरन सब करै, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुवमरन करै, तो दुख काहे होय॥”

लोग दुख में भगवान को याद करते हैं, पर सुख में भूल जाते हैं। अगर सुख में भी भगवान को याद किया जाए, तो दुख कभी नहीं आएगा।

दोहे का विषय (Theme)

कबीर की रचनाओं का मुख्य विषय है – सच्चा गुरु, अच्छी वाणी, समय का महत्व और हर परिस्थिति में भगवान का स्मरण। यह हमें सिखाता है कि जीवन में सत्य, भक्ति और अच्छे कर्म ही सबसे बड़े मूल्य हैं।

लेखक का परिचय

कबीर की वाणी का मुख्य विषय है कि जीवन में गुरु, सत्य, भक्ति और अच्छे कर्म का महत्व सबसे बड़ा है। गुरु हमें भगवान तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए गुरु का स्थान सर्वोच्च है। कबीर यह भी बताते हैं कि हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो दूसरों को शांति दे और स्वयं भी शांत बनाए। समय का सही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि मृत्यु अचानक आ सकती है। केवल दुख में ही नहीं, बल्कि सुख में भी भगवान का स्मरण करना चाहिए। बड़ा वही है जो दूसरों को लाभ पहुँचाए, केवल ऊँचा होना पर्याप्त नहीं है। इस प्रकार कबीर की वाणी हमें सच्चा जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

प्रमुख पात्र

कबीर का जन्म सन् 1398 में काशी (वाराणसी) में हुआ माना जाता है। वे संत कवि थे और गुरु रामानंद के शिष्य थे। कबीर करघे पर कपड़ा बुनते थे और साथ ही मन में कविता भी रचते थे। उनकी रचनाएँ इतनी लोकप्रिय हुईं कि लोग आज भी उन्हें भजन की तरह गाते और सुनते हैं। कबीर की भाषा को ‘पंचमेल’ या ‘सधुक्कड़ी’ कहा जाता है, जिसमें सरलता और गहराई दोनों हैं। उनकी कविताएँ हमें जीवन की सच्चाई समझने और अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं। कबीर ने समाज में सत्य, भक्ति और अच्छे आचरण का संदेश दिया और आज भी उनकी वाणी लोगों को मार्गदर्शन देती है।

दोहे से मिलने वाली शिक्षा

कबीर की वाणी से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं:

  • गुरु का महत्व – गुरु ही हमें भगवान तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए गुरु का स्थान सर्वोच्च है।
  • अच्छी वाणी – हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो दूसरों को शांति दे और स्वयं भी शांत बनाए।
  • समय का मूल्य – काम को कभी टालना नहीं चाहिए, आज का काम आज ही करना चाहिए।
  • सुख‑दुख में भगवान का स्मरण – केवल दुख में ही नहीं, बल्कि सुख में भी भगवान को याद करना चाहिए।
  • सच्ची महानता – बड़ा वही है जो दूसरों को लाभ पहुँचाए, केवल ऊँचा होना पर्याप्त नहीं है।

कठिन शब्द एवं अर्थ

कठिन शब्दअर्थवाक्य
बलिहारी बलिदान देनामैं अपने गुरु पर बलिहारी जाता हूँ, क्योंकि उन्होंने मुझे सच्चा मार्ग दिखाया।
सीतलठंडक, शांतिसच्ची वाणी सुनकर मन सीतल हो जाता है।
पंथीयात्रीखजूर का पेड़ ऊँचा है, पर पंथी को छाया नहीं देता।
सुवमरनभगवान का स्मरणसुख और दुख दोनों में सुवमरन करना चाहिए।
पलक्षणपल भर में मृत्यु आ सकती है, इसलिए काम टालना नहीं चाहिए।
आपहुंस्वयंजो दूसरों को शांति देता है, वह आपहुं शांत हो जाता है।

कठिन शब्दों का उच्चारण

  • बलिहारी → ba‑la‑ha‑ri
  • सीतल → see‑tal
  • पंथी → pan‑thi
  • सुवमरन → su‑ma‑ran
  • पल → pal
  • आपहुं → aap‑hun
  • अवत → a‑vat
  • खजूर → kha‑jur

वाक्यांश एवं मुहावरे

वाक्यांश एवं मुहावरेअर्थवाक्य
गुरु गोविंद दोऊ खड़ेगुरु और भगवान दोनों का महत्व बतानागुरु गोविंद दोऊ खड़े, पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए क्योंकि वही भगवान तक पहुँचाते हैं।
अवत का भला न बोलनाबुरी बातें न बोलनाअवत का भला न बोलना चाहिए, क्योंकि बुरी बातें समाज को बिगाड़ती हैं।
बड़ा हुआ तो कया हुआकेवल ऊँचा होना पर्याप्त नहींबड़ा हुआ तो कया हुआ, जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा है पर यात्रियों को छाया नहीं देता।
कालह करै सो आज करकाम को टालना नहीं चाहिएकालह करै सो आज कर, क्योंकि मृत्यु अचानक आ सकती है।
दुख में सुवमरन सब करैकठिन समय में भगवान को याद करनादुख में सुवमरन सब करै, पर सुख में भी भगवान को याद करना चाहिए।

शब्द भंडार

  • गुरु – शिक्षक, मार्गदर्शक
  • गोविंद – भगवान
  • भक्ति – श्रद्धा, पूजा
  • सत्य – सच
  • सुवमरन – भगवान का नाम लेना

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