Class 1 Class 2 Class 3 Class 4 Class 5 Class 6 Class 7 Class 8

न्याय की कुर्सी Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 5

← Back to Hindi Class 9 रेवा

न्याय की कुर्सी Class 9 Question Answer | Hindi Reva Chapter 5 में पाठ से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल और आसान उत्तर दिए गए हैं। इस अध्याय में राजा विक्रमादित्य के न्याय, उनकी बुद्धिमत्ता और न्यायप्रियता को रोचक कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रश्न-उत्तर विद्यार्थियों को पाठ को समझने और परीक्षा की तैयारी करने में मदद करेंगे।

न्याय की कुर्सी Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 5

न्याय की कुर्सी Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 5

बातचीत के लिए,

1. कहानी में बच्चे न्याय करने का खेल खेल रहे थे। आप कौन-कौन से खेल खेलते हैं और किनके साथ खेलते हैं?

उत्तर: मैं अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट, कबड्डी और लुका‑छिपी जैसे खेल खेलता हूँ। कभी‑कभी परिवार के साथ कैरम और लूडो भी खेलता हूँ।

2. आपके खेलों में भी किसी न्याय या निर्णय करने वाले की आवश्यकता होती होगी। क्या आपने भी किसी खेल में यह भूवमका वनभाई है? अपने अनुभव को साझा कीवजए।

उत्तर: हाँ, क्रिकेट खेलते समय मैंने कई बार अंपायर की भूमिका निभाई है। मैंने सही‑गलत का निर्णय किया, जैसे बल्लेबाज आउट है या नहीं। इससे सबको खेल में मज़ा आया और झगड़े नहीं हुए।

3. जब कोई आपसे सलाह माँगता है या झगड़ा सुलझाने को कहता है, तो आप कैसे निर्णय लेते हैं कि सही क्या है और गलत क्या है?

उत्तर: मैं दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुनता हूँ। फिर सोचता हूँ कि किसकी बात तर्कसंगत है और किसमें सचाई है। उसके बाद निष्पक्ष होकर फैसला करता हूँ।

4. क्या आपके विद्यालय, पररिार या मोहल्ले में कोई ऐसा व्यक्ति है वजसे लोग उसकी समझदारी और न्यायप्रियता के वलए बहुत मानते हैं? वे वकस तरह दूसरों की सहायता करते हैं?

उत्तर: हमारे मोहल्ले में एक बुज़ुर्ग व्यक्ति हैं जिन्हें सब सम्मान देते हैं। लोग अपने झगड़े उनके पास ले जाते हैं और वे शांत मन से दोनों पक्षों को समझाकर सही निर्णय करते हैं। वे सबको मिलजुलकर रहने की सलाह देते हैं।

5. अगर आपको कहानी वाला यह सिंहासन मिल जाए, तो आप उसका उपयोग कैसे करेंगे?

उत्तर: अगर मुझे वह सिंहासन मिले तो मैं उस पर बैठकर लोगों की समस्याएँ सुनूँगा और न्यायपूर्ण निर्णय दूँगा। मैं कोशिश करूँगा कि किसी के साथ अन्याय न हो और सबको संतोष मिले।

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने ‍तारा (*) बनाइए।

1. राजा सिंहासन पर कयों नहीं बैठ पाया?
(क) सिंहासन की मूर्तियाँ आसमान में उड़ गई थीं।
(ख) सिंहासन की मूवत्ययों ने उसे योग्य नहीं माना था।
(ग) राजा स्वयं को उस पर बैठने योग्य नहीं मानता था।
(घ) राजा ने मूवत्ययों की शर्तें पूरी करने से मना कर दिया।

उत्तर: (ख) सिंहासन की मूर्तियों ने उसे योग्य नहीं माना था

2. लड़के के न्याय करने के तरीके से क्या निष्कर्ष वनकाला जा सकता है?
(क) वह अपराधी को कठोर दंड देता था।
(ख) वह किसी का पक्ष नहीं लेता था।
(ग) वह न्याय करने को खेल समझता था।
(घ) वह राजा के आदेशों का पालन करता था।

उत्तर: (ख) वह किसी का पक्ष नहीं लेता था

3. “बात इधर-उधर फैलने लगी”— यहाँ ‘बात’ का क्या अथ्य है?
(क) लडकों के अनोखे खेल की चर्चा
(ख) लड़के के बीमार पड़ने की चर्चा
(ग) लड़के की न्याय-बुवद्ध की चर्चा
(घ) ‍िीले पर मिले पतथर की चर्चा

उत्तर: (ग) लड़के की न्याय‑बुद्धि की चर्चा

4. “राजा सिंहासन की ओर दृढ़ कदमों से बढ़ा।” कहानी के अंत में राजा चौथी मूवत्य की बात अनसुनी करके सिंहासन पर बैठने के वलए आगे कयों बढ़ा?
(क) वह स्वयं को सिंहासन पर बैठने योग्य मानता था।
(ख) वह सिंहासन के जादू को परखना चाहता था।
(ग) वह मूवत्ययों के बार-बार ‍जोकने से ऊब गया था।
(घ) उसे मूवत्ययों की बातों पर भरोसा नहीं रह गया था।

उत्तर: (क) वह स्वयं को सिंहासन पर बैठने योग्य मानता था

5. कहानी के अनुसार न्याय के वलए सबसे महत्त्वपूर्ण क्या है?
(क) टीले पर बचचों का खेल
(ख) विक्रमादित्य का सिंहासन
(ग) सच्चाई और पवित्र मन
(घ) योग्य शक्ति शाली राजा

उत्तर: (ग) सच्चाई और पवित्र मन

संकेत – आपके अनुसार जो सबसे उपयुक्त उत्तर है, उसे चुलनए। फिर अपने साथियों के साथ उसे साझा कीजिए। ध्यान दीलजए लक क्या उन्होंने भी वही उत्तर चुना है। एक-दूसरे से अपने उत्तर चुनने के कारणों की चर्चा कीजिए।

सोचढ़ए, और लिखिए,

1. कहानी में बचचों का प्रिय खेल क्या था? यह खेल लोगों के बीच प्रसिद्ध कयों हो गया?

उत्तर: बच्चों का प्रिय खेल था – न्याय करने का खेल। वे शिकायतें सुनते, गवाह बुलाते और फैसला सुनाते। यह खेल प्रसिद्ध इसलिए हुआ क्योंकि लड़के का निर्णय सबको सही और संतोषजनक लगता था।

2. लड़के और राजा में से कौन अच्छा न्याय करता था? आपको ऐसा कयों लगता है?

उत्तर: लड़का अच्छा न्याय करता था क्योंकि वह निष्पक्ष था और सचाई के आधार पर फैसला करता था। राजा अपनी गलतियों और स्वार्थ के कारण योग्य नहीं था।

3. चौथी मूवत्य सिंहासन के साथ आकाश में कयों उड़ गई?

उत्तर: चौथी मूर्ति ने देखा कि राजा के मन में कलुष है और वह योग्य नहीं है। इसलिए उसने सिंहासन समेत आकाश में उड़कर उसे राजा की पहुँच से दूर कर दिया।

4. इस कहानी में दो राजाओं के संबंध में बताया गया है। इन दोनों राजाओं में कौन-कौन से अंतर थे?

उत्तर: पहला राजा था विक्रमादित्य, जो न्यायप्रिय और विवेकशील था। दूसरा राजा वर्तमान का था, जिसने चोरी, झूठ और दूसरों को चोट पहुँचाई थी। विक्रमादित्य योग्य थे, जबकि दूसरा राजा अयोग्य साबित हुआ।

5. राजा को जब लड़के के न्याय के बारे में पता चला तो उसे क्रोध कयों आया?

उत्तर: राजा को क्रोध आया क्योंकि लोग दरबार में जाने के बजाय लड़के के पास न्याय के लिए जाते थे। उसे लगा कि लड़का उससे बेहतर न्याय करता है और उसकी प्रतिष्ठा कम हो रही है।

6. मूवत्ययों ने राजा को बार-बार सिंहासन पर बैठने से कयों रोका?

उत्तर: मूर्तियों ने राजा को रोका क्योंकि उसने चोरी की थी, झूठ बोला था और दूसरों को चोट पहुँचाई थी। न्याय की कुर्सी पर बैठने के लिए सच्चाई और पवित्र मन जरूरी था, जो राजा के पास नहीं था।

भाषा की ओर

आपके शब्द

1. नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों को आपकी भाषा में क्या कह‍ते हैं? लिखिए —

पाठ से शब्दआपकी भाषा में शब्दइसके लिए कोई अन्य शब्द
मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।
उसको बहुत क्रोध आया।
तुमने कभी झूठ नहीं बोला?
आश्चर्य ही उस लड़के में कोई दैवी शक्ति है।
अपने मित्रों को बुलाकर वह शिला दिखाई।

उत्तर:

पाठ से शब्दआपकी भाषा में शब्दइसके लिए कोई अन्य शब्द
मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।मैं शासक हूँ और तुम सब मेरे सेवकसम्राट, अधिपति
उसको बहुत क्रोध आया।उसे बहुत गुस्सा आयारोष, आक्रोश
तुमने कभी झूठ नहीं बोला?क्या तुमने कभी असत्य नहीं कहा?मिथ्या, असत्य
आश्चर्य ही उस लड़के में कोई दैवी शक्ति है।आश्चर्य ही उस लड़के में कोई दैवी सामर्थ्य हैबल, सामर्थ्य, ताक़त
अपने मित्रों को बुलाकर वह शिला दिखाई।अपने दोस्तों को बुलाकर उसने पत्थर दिखायापत्थर, चट्टान

काल

“पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है।”
“मैं इसकी जाँच करूँगा।”
“यहाँ-वहाँ टीवे वे।”

ये तीनों वाक्य अलग-अलग कालों को व्यक्त कर रहे हैं— वर्तमान काल, भूतकाल और भविष्यत काल।

2. नीचे दिए गए वाक्यों के काल पहचानिए। उनका काल बदलकर लिखिए—

लडकों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था। (भूतकाल)
लडकों का एक झुंड वहाँ खेल रहा है। (वर्तमान काल)
लडकों का एक झुंड वहाँ खेलेगा। (भविष्यत् काल)

(क) वे रोज ही यह खेल खेलने लगे। (…………………)
…………………………………. (…………………)
…………………………………. (…………………)

उत्तर:

(क) वे रोज ही यह खेल खेलने लगे।

  • भूतकाल: वे रोज ही यह खेल खेलने लगे।
  • वर्तमान काल: वे रोज ही यह खेल खेलते हैं।
  • भविष्यत् काल: वे रोज ही यह खेल खेलेंगे।

(ख) मैं खुद जाकर देखूँगा। (…………………)
…………………………………. (…………………)
…………………………………. (…………………)

उत्तर

(ख) मैं खुद जाकर देखूँगा।

  • भूतकाल: मैं खुद जाकर देखा।
  • वर्तमान काल: मैं खुद जाकर देखता हूँ।
  • भविष्यत् काल: मैं खुद जाकर देखूँगा।

फिर से दिए वाक्य

3. (क) नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों का लिंग बदलकर वाक्य पुनः लिखिए। वाक्य में अन्य आिश्यक परिवर्तन भी कीदीजिए।

लडकों को यह खेल पसंद आया।
लड़कियों को यह खेल पसंद आया।

एक लडका कूदता-भागता एक टीले पर चढ़ गया।
उत्तर: एक लड़की कूदती‑भागती एक टीले पर चढ़ गई।

राजा पीछे हट गया।
उत्तर: रानी पीछे हट गई।

राजा सिंहासन की ओर दृढ़ कदमों से बढ़ा।
उत्तर: रानी सिंहासन की ओर दृढ़ कदमों से बढ़ी।


(ख) कहानी के निम्नलिखित भाग को इस प्रकार लिखिए, जिसमें सभी पात्र स्त्रीलिंग में हों—


एक दिन लड़कियों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था। एक लड़की कूदती-भागती एक टीले पर चढ़ गई। वह ठोकर खाकर गिर पड़ी। उसको एक बड़े चिकने पत्थर के अलावा और कुछ नहीं दिखा। वह उठकर गई और अपनी सहेलियों को बुलाकर वह शिला दिखाई।

उत्तर: कहानी का भाग स्त्रीलिंग में

एक दिन लड़कियों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था। एक लड़की कूदती‑भागती एक टीले पर चढ़ गई। वह ठोकर खाकर गिर पड़ी। उसको एक बड़े चिकने पत्थर के अलावा और कुछ नहीं दिखा। वह उठकर गई और अपनी सहेलियों को बुलाकर वह शिला दिखाई।

विराम चिह्न

“यह तो और भी आश्चर्य की बात है! हो न हो, पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है। मैं इसकी जाँच करूँगा।”

अब आपको इन वाक्यों का अर्थ और भाव ठीक-ठीक समझ में आ रहा होगा। इसका कारण है कुछ विशेष चिह्न, जैसे— “ ”, ।, !

इस प्रकार के चिह्नों को ‘विराम चिह्न’ कहते हैं। विराम चिह्नों से पता चलता है कि लिखे हुए वाक्यों में कहाँ ठहराव है और उनका उपयुक्त भाव क्या है।

4. नीचे दिए गए वाक्यों में उचित स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए—

(क) चौथी मूर्ति ने कहा, “ठहरो! जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे। उनके मन में कलुष नहीं था। अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो, तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो।”

उत्तर: चौथी मूर्ति ने कहा, “ठहरो! जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले‑भाले थे। उनके मन में कलुष नहीं था। अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो, तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो।”

(ख) राजा बड़ी देर तक सोचता रहा। फिर उसने मन ही मन कहा, “अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है, तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ? मैं राजा हूँ। मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा? मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ।”

उत्तर: राजा बड़ी देर तक सोचता रहा। फिर उसने मन ही मन कहा, “अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है, तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ? मैं राजा हूँ। मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा? मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ।”

5. कल्पना कीजिए कि कहानी का लड़का आपसे बातचीत कर रहा है। उसकी और अपनी बातचीत को नीचे दिए गए विराम-चिह्नों का उपयोग करते हुए लिखिए—

,!?

“आपका नाम क्या है?”
“मेरा नाम ………………………………………….. ।”
…………………………………………………………………..
…………………………………………………………………..

उत्तर:

  • “आपका नाम क्या है?”
  • “मेरा नाम अर्जुन है।”
  • “आपको यह खेल क्यों पसंद है?”
  • “क्योंकि इसमें सबकी बातें सुनकर सही निर्णय करना पड़ता है।”
  • “क्या आप हमेशा न्याय कर पाते हैं?”
  • “हाँ, मैं कोशिश करता हूँ कि किसी के साथ अन्याय न हो।”

विशेषता बताने वाले शब्द

“उसको एक बड़े चिकने पत्थर के अलावा और कुछ नहीं दिखा।”

इस वाक्य में ‘बड़े’ और ‘चिकने’ शब्द ‘पत्थर’ शब्द की विशेषता बता रहे हैं। आप जानते ही होंगे कि संज्ञा शब्दों की विशेषता बताने वाले ऐसे शब्दों को ‘विशेषण’ कहते हैं।

6. (क) नीचे दिए गए वाक्यों में नए-नए विशेषण जोड़कर वाक्यों को बढ़ाइए—

a. उसको ……………. एक बड़े चिकने पत्थर के अलावा और कुछ नहीं दिखा।

उत्तर: उसको एक बड़े, चिकने, चमकदार, कठोर पत्थर के अलावा और कुछ नहीं दिखा।

b. उसी समय चौथी ……………………………….. मूर्ति पंख फैलाकर आकाश में उड़ गई।

उत्तर: उसी समय चौथी सुंदर, अद्भुत, चमकती हुई, दिव्य मूर्ति पंख फैलाकर आकाश में उड़ गई।

c. भोले-भाले ……………………………….. लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे।

उत्तर: भोले‑भाले निष्कलुष, मासूम, सरल, सच्चे लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे।

d. ……………………………….. राजा सकपकाया।

उत्तर: अहंकारी, लालची, घबराया हुआ, अयोग्य राजा सकपकाया।

संकेत: आप जितने अधिक विशेषण जोड़ सकते हैं, उतने जोड़ने का प्रयास कीजिए।

(ख) कहानी में आए व्यक्तियों/वस्तुओं के लिए उपयुक्त विशेषण शब्द लिखिए—

……………………………….. सिंहासन
……………………………….. राजा
……………………………….. मूर्तियाँ
……………………………….. लड़का
……………………………….. मंत्री

उत्तर:

  • सिंहासन → प्राचीन, सुंदर, अलौकिक, अद्भुत
  • राजा → शक्तिशाली, अहंकारी, घबराया हुआ, अयोग्य
  • मूर्तियाँ → दिव्य, बोलती हुई, चमकदार, अद्भुत
  • लड़का → मासूम, न्यायप्रिय, बुद्धिमान, सरल
  • मंत्री → समझदार, अनुभवी, सलाहकार, वफादार
संकेत: आप जितने अधिक विशेषण जोड़ सकते हैं, उतने जोड़ने का प्रयास कीजिए।

कहानी से मुहावरे

7. कहानी में आए निम्नलिखित मुहावरों को पहचानिए। उनके अर्थ समझिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

क्र.सं.कहानी से वाक्यमुहावराअर्थ
1.अचानक वह ठोकर खाकर गिर पड़ा।ठोकर खानाचलने में किसी वस्तु की रुकावट के कारण पैर का चोट खाना और लड़खड़ाना, अड़चन आना, गलती होना, असफल होना
2.बात इधर-उधर फैलने लगी।बात फैलनाचर्चा फैलना, बात लोगों के मुँह से चारों ओर सुनाई पड़ना
3.जमीन को लेकर झगड़ा उठ खड़ा हुआ।झगड़ा खड़ा होनाझगड़ा होना
4.यह बात राजा के कानों तक पहुँची।कानों तक पहुँचनासुनाई देना, जानकारी में आना
5.इसकी न्याय-बुद्धि के आगे बड़े-बड़ों को लोहा मानना पड़ेगा।लोहा माननासामर्थ्य स्वीकार करना
6.चारों ओर खबर फैल गई।खबर फैलनाखबर उड़ना
7.राजा ने लज्जा से सिर झुका लिया।सिर झुकानासिर नवाना, नमस्कार करना, लज्जा से गर्दन नीची करना, सादर स्वीकार करना, शर्मिंदा होना, हार मानना, अपनी गलती स्वीकार करना
8.कोई नजर नहीं आया।नजर आनादिखाई देना, दिखना, दिखाई पड़ना, दृष्टिगोचर होना

उत्तर:

क्र.सं.मुहावराअर्थअपने वाक्य में प्रयोग
1.ठोकर खानागलती होना, असफल होनामेहनत न करने पर इंसान ठोकर खाता है।
2.बात फैलनाचर्चा फैलनापरीक्षा में उसके अच्छे अंक आने की बात पूरे स्कूल में फैल गई।
3.झगड़ा खड़ा होनाविवाद होनाविवाद होना | ज़मीन को लेकर पड़ोसियों में झगड़ा खड़ा हो गया।
4.कानों तक पहुँचनासुनाई देना, जानकारी मिलनाउसकी शिकायत प्रिंसिपल के कानों तक पहुँच गई।
5.लोहा माननासामर्थ्य स्वीकार करनासबने उसकी मेहनत और ईमानदारी का लोहा माना।
6.खबर फैलनाखबर उड़नात्योहार की खबर पूरे गाँव में फैल गई।
7.सिर झुकानाशर्मिंदा होना, स्वीकार करनाअपनी गलती मानकर उसने सबके सामने सिर झुका लिया।
8.नजर आनादिखाई देनादूर से मंदिर की ऊँची मीनार नज़र आ रही थी।

पाठ से आगे

अनुमान और कल्पना

1. यदि आज के समय में ऐसा कोई सिंहासन मिल जाए तो क्या लोग उसे न्याय करने के लिए उपयोग करेंगे? क्यों या क्यों नहीं?

उत्तर: आज के समय में लोग शायद उस सिंहासन को न्याय के लिए न उपयोग करें, क्योंकि अब न्यायालय और कानून हैं। लेकिन लोग उसे चमत्कार और इतिहास की चीज़ मानकर देखने ज़रूर आएँगे।

2. कल्पना कीजिए कि मूर्तियाँ राजा से प्रश्न पूछने के बजाय उसे सुझाव देतीं। वे उसे कौन-कौन से सुझाव देतीं?

उत्तर: मूर्तियाँ राजा को सुझाव देतीं कि वह ईमानदारी से शासन करे, झूठ न बोले, गरीबों की मदद करे और सबके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करे।

3. यदि आप राजा होते तो मूर्तियों के प्रश्नों का क्या उत्तर देते?

उत्तर: अगर मैं राजा होता तो स्वीकार करता कि मुझसे गलतियाँ हुई हैं। मैं मूर्तियों से वादा करता कि आगे से सच बोलूँगा, चोरी नहीं करूँगा और सबके साथ न्याय करूँगा।

4. कहानी के अंत में राजा सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़ा। क्या राजा ने सही निर्णय लिया? वह और क्या-क्या कर सकता था? (संकेत— सिंहासन को वापस न्याय की कुर्सी कर देना, भूमि में गाड़ देना, उसे खाली छोड़ देना, स्वयं को उस पर बैठने के योग्य बनाना आदि।)

उत्तर: राजा ने सही निर्णय नहीं लिया क्योंकि वह योग्य नहीं था। उसे चाहिए था कि वह खुद को सुधारता, पवित्र मन बनाता, या सिंहासन को न्याय की कुर्सी मानकर खाली छोड़ देता ताकि योग्य व्यक्ति उस पर बैठ सके।

5. कल्पना कीजिए कि नीचे दिए गए व्यक्तियों को राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिला है। सिंहासन की मूर्तियाँ इनसे कौन-कौन से प्रश्न पूछेंगी? उन प्रश्नों को लिखिए—

  • आपसे
  • आपके माता-पिता या अन्य किसी परिजन से
  • आपके शिक्षक/शिक्षिका से

उत्तर:

  • आपसे: “क्या तुमने कभी अपने दोस्तों से झूठ बोला है?”
  • आपके माता-पिता या परिजन से: “क्या आपने हमेशा अपने बच्चों को सच और न्याय सिखाया है?”
  • आपके शिक्षक/शिक्षिका से: “क्या आपने सभी विद्यार्थियों को बराबर समझकर पढ़ाया है?”

सृजन

1. मान लीजिए कि इस कहानी के अंत में राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता है। अब कहानी को आगे बढ़ाइए। कहानी में राजा ने मूर्तियों के सवालों के जवाब सच्चाई से दिए थे। अगर वह झूठ बोलता तो कहानी कैसे बदल जाती? अपने मन से इस बदली हुई कहानी को बढ़ाइए।

उत्तर: अगर राजा ने मूर्तियों के सवालों के जवाब सच्चाई से दिए होते, तो मूर्तियाँ उसे योग्य मान लेतीं। राजा सिंहासन पर बैठकर लोगों की फरियाद सुनता और न्याय करता। धीरे‑धीरे उसकी छवि एक न्यायप्रिय शासक की बन जाती। लोग उसे सम्मान देने लगते और उसका राज्य सुख‑शांति से भर जाता।

2. मान लीजिए कि इस कहानी के अंत में राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता है। अब कहानी को आगे बढ़ाइए। कहानी में राजा ने मूर्तियों के सवालों के जवाब सच्चाई से दिए थे। अगर वह झूठ बोलता तो कहानी कैसे बदल जाती? अपने मन से इस बदली हुई कहानी को बढ़ाइए।

उत्तर: अगर राजा ने मूर्तियों के सवालों के जवाब झूठ में दिए होते, तो शुरुआत में वह सिंहासन पर बैठ जाता। पर कुछ ही समय बाद उसके अन्याय और झूठ सामने आ जाते। लोग उससे असंतुष्ट हो जाते और उसका राज्य अशांत हो जाता। सिंहासन की दिव्य शक्ति भी धीरे‑धीरे समाप्त हो जाती। अंत में राजा की प्रतिष्ठा गिर जाती और लोग उसे अयोग्य मानने लगते।

परियोजना

(क) शांति-योजना

मान लीजिए कि आपको अपने स्कूल में किसी समस्या का हल निकालना है (उदाहरण के लिए— अनुशासन से जुड़ी कोई बात या दो दोस्तों के बीच झगड़े/विवाद सुलझाना)। अपने समूह में मिलकर उस समस्या पर सोच-विचार कीजिए। उसका समाधान कैसे किया जा सकता है, इसकी एक योजना बनाइए। उस योजना को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर: अगर स्कूल में अनुशासन की समस्या हो या दो दोस्तों में झगड़ा हो जाए, तो सबसे पहले दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुननी चाहिए। फिर समूह में मिलकर सोचें कि गलती किसकी है और समाधान क्या हो सकता है।

  • दोस्तों को समझाना कि झगड़ा करने से समस्या नहीं सुलझती।
  • शिक्षक या मॉनिटर की मदद लेना।
  • नियम बनाना कि सबको एक‑दूसरे का सम्मान करना है।

(ख) सुनो ध्यान से

आपने कहानी में पढ़ा कि राजा को पहले पुतलियों की आवाज सुनाई दी, इसके बाद उसका ध्यान उन पर गया। क्या आप अपने आस-पास की आवाजों पर ध्यान देते हैं? अपने आस-पास की आवाजों को ध्यान से सुनिए और उन वस्तुओं/प्राणियों की सूची बनाइए जिनकी आवाज आपको सुनाई दी। अपने साथियों की सूची से अपनी सूची की तुलना कीजिए।

उत्तर: कहानी में राजा ने मूर्तियों की आवाज़ सुनी थी। उसी तरह हमें भी अपने आस‑पास की आवाज़ों पर ध्यान देना चाहिए।

  • पक्षियों की चहचहाहट
  • हवा की सरसराहट
  • बच्चों की हँसी
  • गाड़ियों का हॉर्न
  • मंदिर की घंटी
  • पानी की बूंदों की आवाज़

आज की पहेली

(क) आज हम आपके लिए लाए हैं भारत के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक पहेलियाँ। तो आइए, बूझते हैं ये रंग-बिरंगी पहेलियाँ—

  1. एक डिब्बी में बत्तीस बाबा।
    1. उत्तर: दाँत
  2. एक थाल औंधा पड़ा, नदी के तल पर रहे धरा।
    1. उत्तर: चाँद
  3. खाओ तो हड्डी नहीं, बोओ तो बीज नहीं।
    1. उत्तर: दूध
  4. एक घर में सात द्वार।
    1. उत्तर: सिर (दो आँखें, दो कान, दो नथुने, एक मुँह)
  5. बचपन में हरी रही, बड़ी हुई तो लाल।
    1. उत्तर: मिर्च
  6. जिसने मुझको काट लिया, उसका बिगड़ा हाल।
    1. उत्तर: साँप
  7. कौन-से फल में बीज नहीं?
    1. उत्तर: केला
  8. गोबर का उपला, नदी पर तैरे।
    1. उत्तर: कमल का पत्ता

(ख) अपने राज्य में प्रचलित पहेलियाँ लिखिए और अपने साथियों से बुझिए।

उत्तर:

  • एक थाली में पानी ही पानी, बिना पाँव के दौड़े प्राणी।
    • उत्तर: चाँद
  • बिना पंख उड़ता है, बिना पैरों चलता है।
    • उत्तर: हवा
  • न खाता है, न पीता है, पर सबको जीने देता है।
    • उत्तर: सूरज

खोजबीन

1. ‘न्याय की कुर्सी’ कहानी हमारे देश की सैकड़ों साल पुरानी एक पुस्तक पर आधारित है। उस पुस्तक का नाम ‘सिंहासन बत्तीसी’ है। इस पुस्तक में राजा भोज को राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिलता है, जो भूमि में गड़ा था। इसमें बत्तीस मूर्तियाँ जड़ी होती हैं। प्रत्येक मूर्ति राजा भोज को राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाती है। इस पुस्तक की प्रत्येक कहानी बहुत रोचक है। पुस्तकालय या किसी अन्य स्रोत से यह पुस्तक खोजकर पढ़िए और अपनी मनपसंद कहानी कक्षा में सुनाइए।

उत्तर: यह पुस्तक बहुत पुरानी और प्रसिद्ध है। इसमें बताया गया है कि राजा भोज को राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिलता है, जिसमें बत्तीस मूर्तियाँ जड़ी होती हैं। हर मूर्ति राजा भोज को एक कहानी सुनाती है। इन कहानियों में विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, बुद्धिमानी और साहस दिखाया गया है।

2. नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट वीडियो (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।

न्याय की कुर्सी
https://www.youtube.com/watch?v=SNa4FM6JqxQ

माँ कह एक कहानी
https://www.youtube.com/watch?v=nQUltEEDx4s

राजा बड़ा या विक्रमादित्य
https://www.youtube.com/watch?v=wHbS0ttloo4

शब्द-संपदा

शब्दअर्थआपकी भाषा में शब्द
फरियादशिकायत, निवेदन, विनती, प्रार्थना
शिलापत्थर, चट्टान, पाषाण, पत्थर का बड़ा चौड़ा टुकड़ा
लाव-लश्करसेना, सैनिकों का समूह, दल-बल
प्रजाजनता, राज्य के निवासी
प्रायश्चित्तपश्चात्ताप, अपनी गलती सुधारने का कार्य
कलुषपाप, गंदगी, मैल, दोष, कलंक
स्तंभितजो जड़ या अचल हो गया हो, अचंभित, हक्का-बक्का, निश्चल, निस्तब्ध, सुन्न, ठहरा हुआ
सकपकानाघबरा जाना, डर जाना, हिचकिचाना, चकपकाना, आश्चर्ययुक्त होना, आगा-पीछा करना, शरमाना
दैवीदेवताओं की दी हुई, अलौकिक
न्याय-बुद्धिन्याय करने की क्षमता, सही-गलत का विवेक
मजालसाहस, हिम्मत, सामर्थ्य, शक्ति, ताकत

उत्तर:

शब्दअर्थआपकी भाषा में शब्द
फरियादशिकायत, निवेदन, विनती, प्रार्थनाशिकायत
शिलापत्थर, चट्टान, पाषाण, पत्थर का बड़ा चौड़ा टुकड़ापत्थर
लाव-लश्करसेना, सैनिकों का समूह, दल-बलफौज
प्रजाजनता, राज्य के निवासीलोग
प्रायश्चित्तपश्चात्ताप, अपनी गलती सुधारने का कार्यपछतावा
कलुषपाप, गंदगी, मैल, दोष, कलंकदोष
स्तंभितजो जड़ या अचल हो गया हो, अचंभित, हक्का-बक्का, निश्चल, निस्तब्ध, सुन्न, ठहरा हुआहैरान
सकपकानाघबरा जाना, डर जाना, हिचकिचाना, चकपकाना, आश्चर्ययुक्त होना, आगा-पीछा करना, शरमानाघबराना
दैवीदेवताओं की दी हुई, अलौकिकचमत्कारी
न्याय-बुद्धिन्याय करने की क्षमता, सही-गलत का विवेकसमझदारी
मजालसाहस, हिम्मत, सामर्थ्य, शक्ति, ताकतताक़त

Disclaimer: The content that is present on our website is based on the NCERT Class 9 Hindi Ganga textbook and is provided for educational purposes only. All the content and images have been taken from Hindi Class 9 NCERT Textbook Reva R3 and CBSE Support material. Images and content shown above are the property of individual organizations and are used here for reference purposes only. To make it easy to understand, some of the content and images are generated by AI and cross-checked by the teachers.

← Back to Hindi Class 9 रेवा

Leave a Comment