न्याय की कुर्सी Class 9 Summary Hindi Chapter 5 Reva का सरल और आसान भाषा में सारांश है। इस पाठ में न्याय, निष्पक्षता और सही निर्णय के महत्व को समझाया गया है। यह पाठ विद्यार्थियों को सिखाता है कि न्याय करते समय किसी भी प्रकार के पक्षपात से बचना चाहिए और सत्य एवं उचित निर्णय को प्राथमिकता देनी चाहिए। यहाँ पाठ का सारांश सरल भाषा में दिया गया है, जिससे विद्यार्थी इसे आसानी से समझ और परीक्षा की तैयारी कर सकें।

न्याय की कुर्सी Class 9 Summary Hindi Chapter 5 Reva
कहानी का सारांश
यह कहानी उज्जैन की प्राचीन नगरी के बाहर के मैदान से शुरू होती है। वहाँ लड़के खेलते समय एक बड़े पत्थर पर बैठकर राजा और दरबारी का खेल खेलने लगे। धीरे‑धीरे लोगों को लगा कि उस लड़के में न्याय की विशेष बुद्धि है। लोग अपनी शिकायतें लेकर उसके पास आने लगे और उसके फैसले से सब संतुष्ट होते थे।
राजा को जब यह बात पता चली तो वह गुस्से में वहाँ पहुँचा। उसने देखा कि लड़का सचमुच बुद्धिमान है। लेकिन बाद में पता चला कि यह पत्थर वास्तव में राजा विक्रमादित्य का पुराना सिंहासन है। जब राजा उस पर बैठने लगा तो सिंहासन पर बनी मूर्तियाँ बोलने लगीं। उन्होंने राजा से पूछा कि क्या उसने कभी चोरी, झूठ या किसी को चोट नहीं पहुँचाई। राजा ने स्वीकार किया कि उसने गलतियाँ की हैं। हर बार मूर्ति उड़ जाती और अंत में चौथी मूर्ति सिंहासन समेत आकाश में उड़ गई।
कहानी यह दिखाती है कि न्याय की कुर्सी पर बैठने के लिए केवल शक्ति या धन नहीं, बल्कि सच्चाई, ईमानदारी और निष्कलुष मन चाहिए।
कहानी का विषय (Theme)
कहानी का मुख्य विषय है – न्याय और सच्चाई की महत्ता। यह बताती है कि असली न्याय वही कर सकता है जिसके मन में कोई छल, झूठ या बुराई न हो। केवल पद या शक्ति से कोई न्यायाधीश नहीं बन सकता।
लेखक परिचय
इस कहानी की लेखिका लीलावती भगवती हैं। उन्होंने बच्चों के लिए कई रोचक और शिक्षाप्रद कहानियाँ लिखी हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, नैतिक शिक्षा और कल्पनाशीलता का सुंदर मेल मिलता है।
प्रमुख पात्र
- पत्थर पर बैठा लड़का – जो खेल‑खेल में न्याय करता है।
- राजा – जो सिंहासन पर बैठना चाहता है लेकिन अपनी गलतियों के कारण अयोग्य साबित होता है।
- चार मूर्तियाँ – जो राजा से प्रश्न करती हैं और उसके दोष उजागर करती हैं।
- लोग/किसान – जो लड़के के पास न्याय के लिए आते हैं।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा
कहानी से शिक्षा मिलती है कि न्याय करने के लिए ईमानदारी, सच्चाई और निष्कलुष मन जरूरी है। जिसने झूठ बोला हो, चोरी की हो या दूसरों को चोट पहुँचाई हो, वह न्याय की कुर्सी पर बैठने योग्य नहीं होता।
कठिन शब्द एवं अर्थ
| कठिन शब्द | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| फरियाद | शिकायत | लोग अपनी फरियाद लेकर लड़के के पास आते थे। |
| गवाही | साक्ष्य, प्रमाण | लड़का गवाहों की गवाही सुनकर फैसला करता था। |
| न्याय‑बुद्धि | न्याय करने की समझ | लड़के की न्याय‑बुद्धि की सब प्रशंसा करते थे। |
| चमत्कार | अद्भुत घटना | राजा को लगा कि सिंहासन में कोई चमत्कार है। |
| कलुष | बुराई, दोष | मूर्ति ने कहा कि लड़कों के मन में कोई कलुष नहीं था। |
कठिन शब्दों का उच्चारण
- फरियाद → fa-ri-yaad
- गवाही → ga-va-hi
- न्याय‑बुद्धि → nyaay-bud-dhi
- चमत्कार → cha-mat-kaar
- कलुष → ka-lush
वाक्यांश एवं मुहावरे
| वाक्यांश एवं मुहावरे | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| फरियाद करना | शिकायत करना | किसान जमीन के झगड़े की फरियाद लेकर लड़के के पास गए। |
| गवाही देना | साक्ष्य प्रस्तुत करना | गवाहों ने गवाही देकर सच बताया। |
| लोहा मानना | श्रेष्ठता स्वीकार करना | राजा ने लड़के की बुद्धि के आगे लोहा माना। |
| ठोकर खाना | गिरना या गलती करना | लड़का पत्थर पर चढ़ते समय ठोकर खा गया। |
शब्द भंडार
न्याय, फरियाद, गवाही, सिंहासन, मूर्ति, चमत्कार, कलुष, राजा, दरबार, बुद्धि, ईमानदारी, सच्चाई, दोष, उपवास, प्रार्थना।
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