क्या लिखूं Class 9 Summary में हिंदी गंगा पुस्तक के अध्याय 2 “क्या लिखूं” का सरल और संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत किया गया है। इस पाठ में लेखक ने अपने विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए समाज, प्रकृति और मानव जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर लिखने की दुविधा को व्यक्त किया है। यह सारांश विद्यार्थियों को पाठ की मुख्य बातों, भावों और संदेश को आसानी से समझने तथा परीक्षा की तैयारी करने में सहायता करेगा.

क्या लिखूं Class 9 Summary | Hindi Ganga Chapter 2
कहानी का सारांश
लेखक कहता है कि निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति चाहिए, जिसमें विचार स्वतः उमड़ते हैं। लेकिन उसे कभी ऐसी स्थिति का अनुभव नहीं हुआ। उसे हमेशा सोचकर, मेहनत करके ही लिखना पड़ता है। आज उसे दो निबंध लिखने हैं – एक “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और दूसरा “समाज सुधार” पर।
लेखक सोचता है कि निबंध छोटा होना चाहिए, पर उसमें सामग्री और शैली दोनों जरूरी हैं। सामग्री जुटाना कठिन है क्योंकि उसके पास समय और साधन नहीं हैं। वह कहता है कि अंग्रेजी लेखक अपने अनुभव और भावनाओं को सीधे लिख देते हैं, वही तरीका सबसे अच्छा है।
फिर लेखक “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर लिखता है कि पास में ढोल की आवाज़ कर्कश लगती है, लेकिन दूर से वही मधुर लगती है। इसी तरह जीवन में दूर की चीज़ें आकर्षक लगती हैं, चाहे वे वास्तव में कठिन क्यों न हों।
“समाज सुधार” पर लेखक बताता है कि हर युग में सुधार की आवश्यकता रही है। नए दोष आते हैं और नए सुधार होते हैं। यही जीवन की प्रगति है।
कहानी का मुख्य विषय
- लेखन की कठिनाई – लेखक दिखाता है कि निबंध लिखना आसान नहीं है, इसके लिए मेहनत और सोच जरूरी है।
- दूर की वस्तु आकर्षक – दूर से चीज़ें अच्छी लगती हैं, पर पास आने पर उनकी सच्चाई सामने आती है।
- समाज सुधार – हर युग में समाज में सुधार की आवश्यकता होती है और यही जीवन को प्रगतिशील बनाता है।
लेखक का परिचय
इस निबंध के लेखक अज्ञेय हैं। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और कवि थे। उन्होंने गद्य और पद्य दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रचनाएँ गहरी सोच, प्रयोगशीलता और जीवन की सच्चाई को व्यक्त करती हैं।
कहानी के प्रमुख पात्र
यह निबंध पात्रों पर आधारित नहीं है, बल्कि लेखक स्वयं ही मुख्य पात्र हैं। लेखक अपनी सोच, उलझन और अनुभव को व्यक्त करते हैं।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा
- निबंध लिखना आसान नहीं है, इसके लिए मेहनत और सोच जरूरी है।
- दूर की चीज़ें हमेशा आकर्षक लगती हैं, लेकिन पास आने पर उनकी सच्चाई सामने आती है।
- समाज में सुधार कभी खत्म नहीं होता, हर समय नई समस्याएँ आती हैं और उनके समाधान खोजे जाते हैं।
कठिन शब्द एवं उनके अर्थ
| कठिन शब्द | उनके अर्थ |
|---|---|
| उमंग | उत्साह |
| आवेग | जोश, प्रेरणा |
| रूपरेखा | योजना, ढाँचा |
| प्रवाह | लगातार बहना |
| प्रगति | आगे बढ़ना |
कठिन शब्दों का उच्चारण
| कठिन शब्दों | उच्चारण |
|---|---|
| उमंग | U-mang |
| आवेग | Aa-veg |
| रूपरेखा | Roop-rekha |
| प्रवाह | Pra-vaah |
| प्रगति | Pra-ga-ti |
वाक्यांश एवं मुहावरे
| वाक्यांश एवं मुहावरे | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| दूर के ढोल सुहावने | दूर की चीज़ें आकर्षक लगती हैं। | गाँव के लोग सोचते हैं कि शहर का जीवन बहुत अच्छा है, लेकिन यह केवल दूर के ढोल सुहावने हैं। |
| अपमान का घूँट पीना | चुपचाप अपमान सहना। | शिक्षक की डाँट सुनकर छात्र ने अपमान का घूँट पी लिया और मेहनत करने लगा। |
| दाँतों पसीना आना | बहुत कठिनाई होना। | कठिन गणित का सवाल हल करते समय छात्रों को दाँतों पसीना आ गया। |
| रूपरेखा बनाना | योजना तैयार करना। | निबंध लिखने से पहले लेखक ने उसकी रूपरेखा बनाई। |
| प्रवाह होना | लगातार बहना, सहजता से चलना। | अच्छे निबंध में भाषा का प्रवाह होना चाहिए। |
| नौ-दो-ग्यारह होना | तुरंत भाग जाना। | पुलिस देखते ही चोर नौ-दो-ग्यारह हो गया। |
शब्द भंडार
- निबंध
- रूपरेखा
- प्रवाह
- उमंग
- आवेग
- समाज सुधार
- प्रगति
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