कंजूस और सोना Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 2 में पाठ से जुड़े सभी प्रश्नों के सरल और आसान उत्तर दिए गए हैं। यह पाठ लालच, धन के सही उपयोग और संतोष के महत्त्व को समझाता है। इस अध्याय के प्रश्न-उत्तर विद्यार्थियों को पाठ को बेहतर ढंग से समझने और परीक्षा की तैयारी करने में सहायता करेंगे।

कंजूस और सोना Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 2
बातचीत के लिए
Q1. कंजूस को सबसे अधिक परवाह सोने की थी। आप सबसे अधिक किसकी परवाह करते हैं और क्यों?
उत्तर: मैं सबसे अधिक अपने परिवार और पढ़ाई की परवाह करता हूँ, क्योंकि परिवार मेरा सहारा है और पढ़ाई से मेरा भविष्य बनता है।
Q2. आप कंजूस की जगह होते तो सोने का क्या करते?
उत्तर: अगर मैं कंजूस की जगह होता तो सोने का उपयोग समाज और परिवार की भलाई में करता। उससे ज़रूरतमंदों की मदद करता और जीवन को सुखी बनाता।
Q3. क्या धन को जमा करना सही है? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
उत्तर: धन को केवल जमा करना सही नहीं है। धन का मूल्य तभी है जब उसका उपयोग अच्छे कामों में किया जाए। जमा करके रखने से कोई लाभ नहीं होता।
Q4. यदि आपको 100 रुपये मिलें, तो उनका ‘सदुपयोग’ करने के लिए आप क्या-क्या करेंगे?
उत्तर: अगर मुझे 100 रुपये मिलें तो मैं किताबें खरीदूँगा, ज़रूरत की चीज़ें लूँगा और कुछ रुपये बचाकर रखूँगा। इस तरह उनका सही उपयोग होगा।
Q5. कंजूस सोना खरीदकर प्रसन्न था। क्या धन से ‘प्रसन्नता’ खरीदी जा सकती है? आप ऐसा क्यों मानते हैं?
उत्तर: धन से असली प्रसन्नता नहीं खरीदी जा सकती। खुशी परिवार, प्यार और अच्छे कामों से मिलती है। धन केवल साधन है, सुख का असली स्रोत नहीं।
मेरी समझ से
नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए।
Q1. कंजूस ने सोने से कुछ क्यों नहीं खरीदा?
(क) उसे खरीदारी करना अच्छा नहीं लगता था।
(ख) वह सोने को खो देना नहीं चाहता था।
(ग) बाजार में उसकी मनपसंद चीजें नहीं थीं।
(घ) उसे प्रतिदिन सोना देखने की आदत थी।
उत्तर: (ख) वह सोने को खो देना नहीं चाहता था।
Q2. कहानी के अनुसार धन का महत्त्व कब होता है?
(क) जब उसे जमीन में गाड़ दिया जाए।
(ख) जब वह बहुत पुराना हो जाए।
(ग) जब उसका सदुपयोग किया जाए।
(घ) जब वह सोने में बदल दिया जाए।
उत्तर: (ग) जब उसका सदुपयोग किया जाए।
Q3. कहानी के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(क) धन को किसी उपाय से सुरक्षित रखना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
(ख) धन का मूल्य उसके उपयोग में है, केवल उसके पास होने में नहीं।
(ग) अपना सारा धन समाज की भलाई के लिए दान कर देना चाहिए।
(घ) सोने से बेहतर भूमि है क्योंकि उसका उपयोग किया जा सकता है।
उत्तर: (ख) धन का मूल्य उसके उपयोग में है, केवल उसके पास होने में नहीं।
Q4. “उस गोले की उसे जितनी परवाह थी, उतनी न बीवी की थी, न बच्चे की, न खुद अपनी जान की।” इस वाक्य से कंजूस के व्यक्तित्व के बारे में क्या पता चलता है?
(क) वह अपने परिवार से दूर रहता था।
(ख) उसे सबसे अधिक लगाव सोने से था।
(ग) उसकी पत्नी और बच्चे भी उतने ही कंजूस थे।
(घ) उसके लिए सोने से भी अधिक कीमती उसका परिवार था।
उत्तर: (ख) उसे सबसे अधिक लगाव सोने से था।
Q5. “यदि आदमी धन का सदुपयोग न करे, तो उस धन की कोई कीमत नहीं।” इस कहानी के अनुसार धन का ‘सदुपयोग’ करने का सही अर्थ क्या है?
(क) धन को सुरक्षित और गोपनीय स्थान पर रखना।
(ख) धन से वे काम लेना जो जीवन को सार्थक बनाएँ।
(ग) धन को प्रतिदिन देखकर मानसिक शांति प्राप्त करना।
(घ) धन को केवल आपातकाल के लिए बचाकर रखना।
उत्तर: (ख) धन से वे काम लेना जो जीवन को सार्थक बनाएँ।
| संकेत – आपके अनुसार जो सबसे उपयुक्त उत्तर है, उसे चुनिए। फिर अपने साथियों के साथ उसे साझा कीजिए। ध्यान दीजिए कि क्या उन्होंने भी वही उत्तर चुना है। एक-दूसरे से अपने उत्तर चुनने के कारणों की चर्चा कीजिए। |
सोचिए और लिखिए
Q1. कंजूस के पास सोने का गोला कैसे आया?
उत्तर: कंजूस ने अपनी सारी जमीन बेच दी और उससे मिले सोने को गलाकर बड़ा गोला बनाया। फिर उसने उस गोले को जमीन में गाड़ दिया।
Q2. कंजूस ने सोने का कोई उपयोग क्यों नहीं किया?
उत्तर: कंजूस को सोने से केवल देखने का शौक था। वह रोज़ जाकर उसे देखता था, लेकिन कभी उसका उपयोग नहीं किया।
Q3. पड़ोसी ने कंजूस को पत्थर का टुकड़ा रखने की सलाह क्यों दी?
उत्तर: पड़ोसी ने कहा कि सोने से कोई काम नहीं लिया गया, इसलिए उसकी जगह पत्थर रख दो और सोचो कि वही सोना है।
Q4. क्या कंजूस को अपने परिवार से प्यार था? कहानी से यह कैसे पता चलता है?
उत्तर: कंजूस को परिवार से प्यार नहीं था। कहानी में लिखा है कि उसे सोने की उतनी परवाह थी जितनी न बीवी की, न बच्चों की, न अपनी जान की।
भाषा की ओर
आपके शब्द
Q1. नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों को आपकी भाषा में क्या कहते हैं? लिखिए—
| पाठ से शब्द | आपकी भाषा में शब्द | इसके लिए कोई अन्य शब्द |
|---|---|---|
| (क) | किसी ने उसमें हाथ नहीं लगाया। | |
| (ख) | एक रात किसी ने वह सोना निकाल लिया। | |
| (ग) | पत्थर का एक टुकड़ा रख दो। | |
| (घ) | जमीन में गाड़ दिया। | |
| (ङ) | वह सोना गड़ा था। |
| संकेत– दिए गए वाक्य पढ़िए। वाक्य में रेखांकित शब्द का अर्थ समझिए। उसे आपकी भाषा में क्या कहते हैं, लिखिए। यदि आपके किसी सहपाठी की कोई अन्य भाषा है, तो उसकी भाषा में इस शब्द को क्या कहते हैं, लिखिए। यदि आपकी भाषा में इसके लिए कोई अन्य शब्द है, तो उसे भी लिखा जा सकता है। |
उत्तर:
| पाठ से शब्द | आपकी भाषा में शब्द | इसके लिए कोई अन्य शब्द |
|---|---|---|
| (क) | किसी ने उसमें हाथ नहीं लगाया। | किसी ने उसे छुआ नहीं। |
| (ख) | एक रात किसी ने वह सोना निकाल लिया। | बाहर निकालना या प्राप्त करना। |
| (ग) | पत्थर का एक टुकड़ा रख दो। | हिस्सा या खंड। |
| (घ) | जमीन में गाड़ दिया। | जमीन में दबा दिया। |
| (ङ) | वह सोना गड़ा था। | जमीन में दबा हुआ था। |
समान अर्थ वाले शब्द
Q2. नीचे दिए गए शब्दों के लिए कहानी में किन शब्दों का प्रयोग किया गया है? कहानी से ढूँढ़कर लिखिए—
| शब्द | पाठ में से शब्द |
|---|---|
| क्रोध | गुस्सा |
| चिंता | |
| प्रतिदिन | |
| धरती | |
| दुख | |
| सुरक्षा |
उत्तर:
| शब्द | पाठ में से शब्द |
|---|---|
| क्रोध | गुस्सा |
| चिंता | परवाह |
| प्रतिदिन | रोज़ / हर सुबह |
| धरती | जमीन / भूखंड |
| दुख | ग़म |
| परवाह | चिंता |
मिलते-जुलते अर्थ
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए—
- उस धन की कोई कीमत नहीं।
- तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं थी।
- वह माल तुम्हारे पास है।
इन तीनों रेखांकित शब्दों का प्रयोग ‘रुपये-पैसे’ या ‘दौलत’ के लिए किया गया है।
उत्तर:
- धन → यहाँ इसका अर्थ है धन या दौलत।
- पूँजी → इसका भी अर्थ है रुपया‑पैसा या संपत्ति।
- माल → इसका प्रयोग भी धन या दौलत के लिए किया गया है।
यानी तीनों शब्द — धन, पूँजी और माल — कहानी में एक ही भाव व्यक्त करते हैं: धन / दौलत।
Q3. अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के लिए कोई अन्य शब्द लिखिए—
- एक आदमी था।
- दुनिया की किसी दूसरी चीज से सोने की उसे अधिक चाह थी।
- उस गोले की उसे जितनी परवाह थी, उतनी न बीवी की थी, न बच्चे की, न खुद अपनी जान की।
उत्तर:
- एक इंसान था।
- दुनिया की किसी दूसरी वस्तु से सोने की उसे अधिक चाह थी।
- उस गोले की उसे जितनी परवाह थी, उतनी न पत्नी की थी, न संतान की, न खुद अपनी प्राण की।
एक और अनेक
Q4. नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों का वचन बदलकर वाक्य फिर से लिखिए—
- उदाहरण– वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
- वह देर तक नजरें गड़ाए उसे देखा करता था।
(क) अब तक वह गोला तुम्हारे काम नहीं आया।
(ख) कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे की निगाह गई।
(ग) वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
(घ) उसके पड़ोसी ने उससे पूछा।
(ङ) धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई।
उत्तर:
(क) अब तक वे गोले तुम्हारे काम नहीं आए।
(ख) कंजूसों की इन आदतों पर किसी दूसरे की निगाहें गईं।
(ग) वे देर तक नजर गड़ाए उन्हें देखा करते थे।
(घ) उसके पड़ोसीजन ने उससे पूछा।
(ङ) धीरे‑धीरे वे ढूँढ़ निकाली गईं।
भविष्य की अभिव्यक्ति
नीचे दिए गए वाक्यों पर ध्यान दीजिए—
- “वह उस गोले को देखने के लिए जाता था।” (भूतकाल)
- “वह उस गोले को देखने के लिए जाएगा।” (भविष्यत् काल)
Q5. अब नीचे दिए गए वाक्यों को भविष्यत् काल में बदलकर लिखिए—
(क) वह गोला तुम्हारे काम नहीं आया।
उत्तर: वह गोला तुम्हारे काम नहीं आएगा।
(ख) वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
उत्तर: वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करेगा।
(ग) तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं थी।
उत्तर: तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं होगी।
(घ) धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई।
उत्तर: धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली जाएगी।
(ङ) किसी ने वह सोना निकाल लिया।
उत्तर: किसी ने वह सोना निकाल लेगा।
फिर से लिखें
नीचे दिए गए वाक्यों पर ध्यान दीजिए—
- “असल में तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं थी।”
- “असल में तुम्हारे पास कोई धन नहीं था।”
आप समझते ही होंगे कि ‘पूँजी’ एक स्त्रीलिंग शब्द है। ‘धन’ एक पुल्लिंग शब्द है।
Q6. नीचे कोष्ठक में दिए गए शब्दों का प्रयोग करके वाक्यों को बदलकर लिखिए—
उदाहरण– एक आदमी था। (औरत) एक औरत थी।
(क) तुम्हारे पास पूँजी थी। (रुपया-पैसा)
उत्तर: तुम्हारे पास रुपया‑पैसा होगा।
(ख) उस धन की कोई कीमत नहीं। (मूल्य)
उत्तर: उस धन का कोई मूल्य नहीं होगा।
(ग) कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे की निगाह गई। (ध्यान)
उत्तर: कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे का ध्यान जाएगा।
(घ) जिस जगह वह सोना गड़ा था, धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई। (स्थान पर)
उत्तर: जिस स्थान पर वह सोना गड़ा होगा, धीरे‑धीरे वह ढूँढ़ निकाला जाएगा।
(ङ) एक रात किसी ने वह सोना निकाल लिया। (धातु)
उत्तर: एक रात किसी ने वह धातु निकाल लेगा।
मेरे वाक्य
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए—
- “यदि आदमी धन का सदुपयोग न करे, तो उस धन की कोई कीमत नहीं।”
Q7. अब ‘यदि’ और ‘तो’ वाले कुछ अन्य वाक्य लिखिए—
(क) यदि ……………………………………… तो ……………….
(ख) यदि ……………………………………… तो ……………….
(ग) यदि ……………………………………… तो ……………….
(घ) यदि ……………………………………… तो ……………….
(ङ) यदि ……………………………………… तो ……………….
उत्तर:
- यदि तुम मेहनत करोगे, तो सफलता मिलेगी।
- यदि बारिश होगी, तो खेतों में फसल अच्छी होगी।
- यदि पढ़ाई करोगे, तो परीक्षा में अच्छे अंक आएँगे।
- यदि स्वास्थ्य का ध्यान रखोगे, तो बीमारी दूर रहेगी।
- यदि समय पर काम करोगे, तो सब खुश होंगे।
कहानी से मुहावरे
- “वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।”
- ‘नजर गड़ाना’ का अर्थ है— ध्यान से देखना, टकटकी लगाकर देखना।
(क) कहानी में निम्नलिखित मुहावरों वाले वाक्यों को रेखांकित कीजिए और इनके प्रयोग समझिए।
- हाथ लगाना – छूना, स्पर्श करना
- मन मारना – उदास होना, इच्छा को दबाना
- जामे से बाहर होना – आपे से बाहर होना, अत्यंत क्रोध करना
- ताजा करना – स्मरण करना, याद करना, फिर चित्त में लाना
- हाथ से निकल जाना – अपने अधिकार में न रहना, वश में न रह जाना
- खयाल करना – सोचना, याद करना
- आँख सेंकना – दर्शन का सुख उठाना, सुंदर रूप देखना
- निगाह पड़ना – दिखाई पड़ना, दिखाई देना
उत्तर:
- हाथ लगाना → “किसी ने उस सोने को हाथ नहीं लगाया।”
- मन मारना → “कंजूस मन मारकर बैठ गया।”
- जामे से बाहर होना → “सोना गायब देखकर वह जामे से बाहर हो गया।”
- ताज़ा करना → “उसने पुरानी यादें ताज़ा कीं।”
- हाथ से निकल जाना → “सोना उसके हाथ से निकल गया।”
- ख़याल करना → “उसने अपने धन का ख़याल किया।”
- आँख सेंकना → “वह रोज़ जाकर सोने को देख आँख सेंकता था।”
- निगाह पड़ना → “उसकी आदत पर किसी दूसरे की निगाह पड़ी।”
(ख) इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए अपने वाक्य बनाइए।
उत्तर:
- हाथ लगाना → बच्चे ने फूल को हाथ लगाया।
- मन मारना → वह अपनी इच्छा पूरी न कर सका और मन मारकर बैठ गया।
- जामे से बाहर होना → गाली सुनकर वह जामे से बाहर हो गया।
- ताज़ा करना → पुराने गीत सुनकर बचपन की यादें ताज़ा हो गईं।
- हाथ से निकल जाना → परीक्षा का समय हाथ से निकल गया।
- ख़याल करना → उसने अपने भविष्य का ख़याल किया।
- आँख सेंकना → लोग मंदिर में देवी‑देवताओं का रूप देखकर आँख सेंकते हैं।
- निगाह पड़ना → मेरी निगाह किताब पर पड़ी।
(ग) इन मुहावरों के भाव से मिलते-जुलते अपनी भाषा के मुहावरों को लिखिए।
उत्तर:
- हाथ लगाना → छू लेना
- मन मारना → दिल दबाना
- जामे से बाहर होना → आपा खोना
- ताज़ा करना → याद दिलाना
- हाथ से निकल जाना → अवसर खो देना
- ख़याल करना → ध्यान देना
- आँख सेंकना → निहारना
- निगाह पड़ना → ध्यान जाना
पाठ से आगे
अनुमान और कल्पना
Q1. कहानी में कंजूस और पड़ोसी का कोई नाम नहीं है। यदि आप उन्हें कोई नाम देना चाहें, तो क्या नाम देंगे और क्यों?
उत्तर:
- कंजूस का नाम “लालचीराम” रखा जा सकता है क्योंकि वह लालच में डूबा था।
- पड़ोसी का नाम “समझदार सिंह” रखा जा सकता है क्योंकि उसने सही सलाह दी।
Q2. पड़ोसी ने कंजूस को सलाह दी लेकिन क्या कंजूस ने वह सलाह मानी होगी? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर: नहीं, कंजूस ने सलाह नहीं मानी होगी। क्योंकि कहानी में दिखाया गया है कि उसे सोने से ही लगाव था, वह किसी की बात मानने वाला नहीं था।
Q3. यदि आप कंजूस के पड़ोसी होते, तो उसे क्या सलाह देते?
उत्तर: मैं कंजूस को सलाह देता कि धन का उपयोग परिवार और समाज की भलाई में करो। केवल गाड़कर रखने से उसका कोई लाभ नहीं है।
Q4. क्या आपने कभी कोई ऐसी वस्तु देखी है जिसे किसी ने केवल दिखावे के लिए रखा है, उपयोग के लिए नहीं? उस वस्तु के बारे में बताइए।
उत्तर: हाँ, मैंने देखा है कि कई लोग महँगे शो‑पीस या सजावटी सामान रखते हैं। वे उसे कभी उपयोग नहीं करते, केवल मेहमानों को दिखाने के लिए रखते हैं।
सृजन
Q1. यदि सोना निकालने वाले को पकड़ लिया जाता और सोना वापस मिल जाता, तो कंजूस अब क्या करता? आगे की कहानी कल्पना से बढ़ाइए।
उत्तर: कंजूस पहले बहुत प्रसन्न होता। वह फिर से सोने को जमीन में गाड़ देता और रोज़ जाकर उसे देखता। लेकिन पड़ोसी की बात सुनकर शायद उसे यह एहसास होता कि सोने को केवल गाड़कर रखने से कोई लाभ नहीं है। तब वह सोच सकता था कि सोने से घर की ज़रूरतें पूरी करे या समाज की भलाई में खर्च करे।
Q2. मान लीजिए कि जिस व्यक्ति ने सोना निकाल लिया था, उसने कंजूस को एक पत्र लिखा है। उसने पत्र में बताया है कि उसने सोना क्यों निकाल लिया। अपनी कल्पना से वह पत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रिय कंजूस,
मैंने तुम्हारा सोना निकाल लिया।
तुम रोज़ उसे देखते थे, पर उसका कोई उपयोग नहीं करते थे।
मैंने सोचा कि इतना धन व्यर्थ पड़ा है।
इसलिए मैंने उसे निकालकर अपने परिवार की ज़रूरतों में लगाया।
तुम्हें दुख हुआ होगा, पर समझो कि धन तभी मूल्यवान है जब उससे जीवन सार्थक बने।
तुम्हारा पड़ोसी
परियोजना
1. पोस्टर – सोना या पत्थर?
समूह में मिलकर एक ‘पोस्टर’ बनाएँ। आधा पोस्टर सोने के गोले से भरा हो, आधा पत्थर से। बीच में यह प्रश्न लिखें— ‘क्या अंतर है?’ फिर सब अपने-अपने विचार 1-1 पंक्ति में पोस्टर पर लिखें/लिखकर चिपका दें। यह पोस्टर कक्षा की दीवार पर लगाया जा सकता है।
उत्तर:
पोस्टर – सोना या पत्थर
- आधा पोस्टर सोने के गोले से भरा होगा।
- आधा पोस्टर पत्थरों से।
- बीच में प्रश्न लिखा होगा – “क्या अंतर है?”
- हर छात्र अपनी 1 पंक्ति लिखेगा, जैसे – “सोना उपयोग में आए तो मूल्यवान है, पत्थर केवल बोझ है।”
2. साक्षात्कार – ‘आज का कंजूस’
एक सदस्य ‘आज के जमाने का कंजूस’ बनेगा जिसके पास लाखों रुपये हैं मगर वह उन्हें खर्च नहीं करता। बाकी सदस्य उसका साक्षात्कार लेंगे और प्रश्न पूछेंगे, जैसे– “आप पैसा क्यों नहीं खर्च करते?” उसके रोचक उत्तर सुनकर उसे समझाएँगे कि पैसा बिना उपयोग के व्यर्थ है।
उत्तर:
साक्षात्कार – आज का कंजूस
- एक छात्र “आज का कंजूस” बनेगा।
- बाकी छात्र उससे प्रश्न पूछेंगे – “आप पैसा क्यों नहीं खर्च करते?”
- कंजूस मज़ेदार उत्तर देगा – “पैसा सुरक्षित है, खर्च करने से कम हो जाएगा।”
- अंत में सब समझाएँगे कि पैसा बिना उपयोग के व्यर्थ है।
3. ‘पत्र बनाम सोना’
दो समूह बनाएँ, एक समूह कंजूस के पक्ष में तर्क देगा, जैसे– “कंजूस सही था, क्योंकि सोना कभी भी काम आ सकता था, वह सुरक्षित था।” दूसरा समूह कंजूस के विरोध में तर्क देगा जैसे– “पड़ोसी सही था, क्योंकि बिना उपयोग का धन बेकार है।” अन्य समूह इसे सुनकर अपना निर्णय देंगे।
उत्तर:
पत्र बनाम सोना
- दो समूह बनाएँ।
- पहला समूह कंजूस के पक्ष में तर्क देगा – “सोना सुरक्षित था, कभी काम आ सकता था।”
- दूसरा समूह विरोध में तर्क देगा – “बिना उपयोग का धन बेकार है।”
- तीसरा समूह सुनकर निर्णय देगा कि कौन‑सा पक्ष सही है।
4. नाट्य प्रस्तुति
समूह के 4–5 सदस्य मिलकर इस कहानी पर 2 मिनट का एक लघु नाटक बनाएँ। एक कंजूस बनेगा, एक सोना निकालने वाला, एक पड़ोसी और दो-तीन लोग गोला बनाने और गाड़ने के दृश्य में सहायता करेंगे।
उत्तर:
नाट्य प्रस्तुति
- 4–5 छात्र मिलकर 2 मिनट का छोटा नाटक बनाएँ।
- पात्र होंगे – कंजूस, पड़ोसी, सोना निकालने वाला, और दो‑तीन सहायक।
- दृश्य होंगे – जमीन बेचना, सोना गाड़ना, रोज़ जाकर देखना, सोना चोरी होना, पड़ोसी की सलाह।
पहेली
नीचे दी गई पहेली में पाठ से जुड़े शब्द ढूँढ़कर लिखिए—
1. कहानी का मुख्य पात्र जिसके पास बहुत जमीन थी। (3 अक्षर)
उत्तर: कंजूस
2. सोने को गलाकर कंजूस ने जो आकार दिया था। (2 अक्षर)
उत्तर:गोला
3. वह व्यक्ति जिसने कंजूस को सलाह दी। (3 अक्षर)
उत्तर: पड़ोसी
4. वह बहुमूल्य धातु जिसे कंजूस ने जमीन में गाड़ा था। (2 अक्षर)
उत्तर: सोना
5. कंजूस की संपत्ति जिसे उसने बेच दिया था। (3 अक्षर)
उत्तर: जमीन
खोजबीन
पुस्तकालय से सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अन्य रचनाएँ पुस्तकालय और अन्य स्रोतों से खोजकर पढ़िए।
नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं तथा कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविताओं का आनंद ले सकते हैं—
उत्तर: निराला की प्रमुख रचनाएँ
- अनामिका – छायावादी कविता संग्रह
- परिमल – प्रकृति और जीवन पर आधारित कविताएँ
- गीतिका – लघु कविताओं का संग्रह
- कुकुरमुत्ता – व्यंग्य और यथार्थवादी दृष्टि
- नए पत्ते – जीवन और समाज पर गहरी संवेदनाएँ
- उपन्यास: अप्सरा, अलका
- कहानियाँ: चतुरी चमार, सुकुल की बीवी
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