आखिरी चट्टान तक Class 9 Summary में कक्षा 9 हिंदी गंगा पुस्तक के अध्याय 5 का सरल और विस्तृत सार प्रस्तुत किया गया है। यह यात्रा-वृत्तांत प्रसिद्ध लेखक मोहन राकेश द्वारा लिखा गया है, जिसमें कन्याकुमारी के प्राकृतिक सौंदर्य, तीन समुद्रों के संगम, सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य और वहाँ के सामाजिक जीवन का सजीव चित्रण किया गया है।

आखिरी चट्टान तक Class 9 Summary | Hindi Ganga Chapter 5
कहानी का सारांश (Summary)
मोहन राकेश का “आख़िरी चट्टान तक” एक यात्रा‑वृत्तांत है जिसमें उन्होंने अपनी कन्याकुमारी यात्रा का वर्णन किया है। कन्याकुमारी वह स्थान है जहाँ अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर मिलते हैं। लेखक ने वहाँ के सूर्योदय और सूर्यास्त का बहुत सुंदर चित्रण किया है।
समुद्र की लहरें, चट्टानें, सुनहरी रेत और नारियल के पेड़ सब मिलकर प्रकृति की भव्यता दिखाते हैं। लेखक ने विवेकानंद चट्टान का भी उल्लेख किया है, जहाँ स्वामी विवेकानंद ने ध्यान किया था। यात्रा के दौरान उन्हें कभी शांति और आनंद, तो कभी डर और रोमांच का अनुभव हुआ।
उन्होंने स्थानीय लोगों के जीवन और उनकी कठिनाइयों का भी चित्रण किया है। भाषा इतनी चित्रात्मक है कि पाठक को लगता है जैसे वह स्वयं लेखक के साथ यात्रा कर रहा हो।
कहानी का विषय (Theme)
इस रचना का मुख्य विषय है प्रकृति और मानव‑मन का संबंध। प्रकृति की विशालता और शक्ति लेखक को छोटा महसूस कराती है, पर साथ ही उसे प्रेरणा भी देती है।
यह यात्रा केवल बाहरी दृश्य नहीं दिखाती, बल्कि आत्मिक खोज और भावनाओं को भी व्यक्त करती है। इसमें सौंदर्य, रोमांच और आत्म‑अनुभूति सब एक साथ मिलते हैं।
संदेश यह है कि यात्रा केवल स्थान देखने के लिए नहीं होती, बल्कि मन की गहराई को समझने और शांति पाने का साधन भी होती है।
लेखक का परिचय
मोहन राकेश का जन्म 1925 में अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। वे हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक थे। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी और यात्रा‑वृत्तांत जैसी कई विधाओं में लेखन किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे‑अधूरे, अंधेरे बंद कमरे, आख़िरी चट्टान तक आदि। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला। 1972 में उनका निधन हो गया।
कहानी के प्रमुख पात्र
यह यात्रा‑वृत्तांत है, इसलिए इसमें कोई काल्पनिक पात्र नहीं हैं। मुख्य पात्र स्वयं लेखक (मोहन राकेश) हैं, जो कन्याकुमारी की यात्रा का अनुभव साझा करते हैं। साथ ही, उन्होंने स्थानीय लोगों और पर्यटकों का भी उल्लेख किया है।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा
इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि प्रकृति से जुड़ना आत्मिक शांति और प्रेरणा देता है। यात्रा केवल स्थान देखने के लिए नहीं होती, बल्कि यह मनुष्य को जीवन का गहरा अर्थ समझने और आत्म‑अनुभूति पाने का अवसर देती है।
कठिन शब्द एवं उनके अर्थ
| कठिन शब्द | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| भव्यता | महानता, विशालता | समुद्र की लहरों और सूर्योदय की भव्यता देखकर लेखक मंत्रमुग्ध हो गया। |
| विस्मय | आश्चर्य | तीनों समुद्रों के संगम को देखकर लेखक विस्मय से भर उठा। |
| रोमांच | उत्साह और साहस का अनुभव | ऊँची चट्टानों पर चढ़ते समय लेखक को रोमांच का अनुभव हुआ। |
| सिहरन | डर या ठंड से शरीर का काँपना | बढ़ते पानी को देखकर लेखक के शरीर में सिहरन दौड़ गई। |
| चित्रात्मक | चित्र जैसा स्पष्ट | लेखक ने सूर्यास्त का इतना चित्रात्मक वर्णन किया कि पाठक को दृश्य आँखों के सामने दिखाई देने लगा। |
कठिन शब्दों का उच्चारण
| कठिन शब्दों | उच्चारण |
|---|---|
| भव्यता | bhav‑ya‑ta |
| विस्मय | vis‑may |
| रोमांच | ro‑maanch |
| सिहरन | si‑ha‑ran |
| चित्रात्मक | chi‑traa‑tmik |
वाक्यांश एवं मुहावरे
| वाक्यांश एवं मुहावरे | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| आत्मिक खोज | आत्मा की शांति और सत्य की तलाश | लेखक ने कन्याकुमारी की यात्रा को आत्मिक खोज का साधन माना। |
| शक्ति का विस्तार | प्रकृति की विशालता और ताक़त का अनुभव | समुद्र की लहरों को देखकर लेखक ने शक्ति का विस्तार महसूस किया। |
| सौंदर्य का अनुभव | प्रकृति की सुंदरता को महसूस करना | सूर्योदय और सूर्यास्त ने लेखक को सौंदर्य का अनुभव कराया। |
| समाधिस्थ‑सी लग रही थी | गहरी शांति और स्थिरता का भाव | विवेकानंद चट्टान समुद्र की लहरों के बीच समाधिस्थ‑सी लग रही थी। |
| सिहर उठना | डर या ठंड से काँप जाना | बढ़ते पानी को देखकर लेखक सिहर उठा। |
| लहरों की मार सहना | कठिनाइयों का सामना करना | चट्टान लगातार लहरों की मार सह रही थी। |
| सोना ढल आया | सूर्यास्त का सुंदर दृश्य | सूर्यास्त के समय समुद्र पर सोना ढल आया। |
| लहू बहता नजर आना | सूर्यास्त के समय लालिमा का फैलना | डूबते सूरज की किरणों से समुद्र पर लहू बहता नजर आया। |
शब्द भंडार
समुद्र, चट्टान, सूर्योदय, सूर्यास्त, क्षितिज, लहरें, रेत, नारियल, विस्मय, रोमांच, शांति, प्रेरणा, आत्मिक खोज।
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