हमारा आदित्य Class 9 Question Answer हिंदी रिवा के अध्याय 10 की तैयारी के लिए सरल और उपयोगी सामग्री है। इस अध्याय में सूर्य के महत्व, उसकी ऊर्जा और पृथ्वी पर जीवन के लिए उसके योगदान को समझाया गया है। यहाँ अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आसान भाषा में दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थी पाठ को अच्छी तरह समझ सकें और परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें।

हमारा आदित्य Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 10
बातचीत के लिए
1. अगर एक दिन के लिए धरती तक सूर्य का प्रकाश और ऊष्मा न पहुँचे, तो क्या होगा?
उत्तर: यदि सूर्य का प्रकाश और ऊष्मा एक दिन के लिए धरती तक न पहुँचे तो चारों ओर अंधेरा और ठंड फैल जाएगी। पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाएँगे, मनुष्य और जानवर असहज हो जाएँगे। जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश और ऊष्मा बहुत आवश्यक है।
2. पाठ में हमने पढ़ा कि सूर्य एक तारा है। आकाश में अनगिनत तारों के बीच यह तारा हमारी धरती के लिए विशेष क्यों है?
उत्तर: सूर्य हमारी धरती के सबसे पास का तारा है। यह हमें प्रकाश और ऊष्मा देता है, जिससे जीवन संभव है। अन्य तारे बहुत दूर हैं, इसलिए उनका प्रभाव धरती पर नहीं पड़ता। सूर्य ही हमारी जीवन ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
3. भारत में मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों और मेलों के बारे में बताइए जिनका संबंध सूर्य एवं चंद्रमा से है।
उत्तर: भारत में कई त्योहार सूर्य और चंद्रमा से जुड़े हैं।
- मकर संक्रांति – सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाता है।
- छठ पूजा – सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।
- करवा चौथ – चंद्रमा को देखकर व्रत खोला जाता है।
- होली – पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
मेरी समझ से
नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए।
1. आदित्य-एल 1 ने इनमें से कौन-सा कार्य किया है?
(क) सूर्य की सतह पर उतरा है।
(ख) पृथ्वी जैसे किसी अन्य ग्रह की खोज की है।
(ग) सूर्य के ग्यारह रंगों के आकर्षक चित्र भेजे हैं।
(घ) ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव का अध्ययन किया है।
उत्तर: (ग) सूर्य के ग्यारह रंगों के आकर्षक चित्र भेजे हैं।
2. हमारे देश के लिए 2 सितंबर 2023 का दिन विशेष क्यों है?
(क) इसरो की स्थापना की गई थी।
(ख) गगनयान का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
(ग) चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
(घ) आदित्य-एल 1 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
उत्तर: (घ) आदित्य-एल 1 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
3. दिनेश के पिताजी ने सूर्य की ओर देखने के लिए मना क्यों किया?
(क) इससे मन में घबराहट बढ़ सकती है।
(ख) इससे आँखों को नुकसान हो सकता है।
(ग) इससे एकाएक बहुत पसीना आ सकता है।
(घ) इससे चेहरे की चमक फीकी पड़ सकती है।
उत्तर: (ख) इससे आँखों को नुकसान हो सकता है।
4. 18वीं सदी में इटली के एक महान गणितज्ञ ‘लगरांज’ की एक बड़ी उपलब्धि क्या थी?
(क) पृथ्वी से सूर्य के बीच की सही दूरी बताई थी।
(ख) सूर्य के बारे में कई सटीक जानकारियाँ दी थीं।
(ग) हाइड्रोजन और हीलियम गैसों के बारे में बताया था।
(घ) सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा खोजी थी।
उत्तर: (घ) सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा खोजी थी।
5. सूर्य पर गैसों की टकराहट का क्या परिणाम होता है?
(क) समुद्र में ऊँची-ऊँची लहरें उठती हैं।
(ख) पूरा आकाश बादलों से भर जाता है।
(ग) धरती पर धूल भरी तेज आँधियाँ चलती हैं।
(घ) इस विशाल विस्फोट से बहुत सारी ऊर्जा निकलती है।
उत्तर: (घ) इस विशाल विस्फोट से बहुत सारी ऊर्जा निकलती है।
| संकेत – आपके अनुसार जो सबसे उपयुक्त उत्तर है, उसे चुनिए। फिर अपने साथियों के साथ उसे साझा कीजिए। ध्यान दीजिए कि क्या उन्होंने भी वही उत्तर चुना है। एक-दूसरे से अपने उत्तर चुनने के कारणों की चर्चा कीजिए। |
सोचिए और लिखिए
1. सूर्य को आग का गोला क्यों कहा जाता है?
उत्तर: सूर्य को आग का गोला इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है। इन गैसों की लगातार टकराहट और संलयन से बहुत अधिक ऊष्मा और प्रकाश निकलता है। यही कारण है कि सूर्य हमेशा जलता हुआ और चमकता हुआ दिखाई देता है।
2. “सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं।” इन विस्फोटों का क्या परिणाम होता है?
उत्तर: इन विस्फोटों से बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है। यह ऊर्जा अंतरिक्ष में फैलती है और कभी-कभी पृथ्वी पर भी असर डालती है। इससे तेज आँधियाँ और विकिरण उत्पन्न होते हैं, जो हमारे संचार और मौसम को प्रभावित कर सकते हैं।
3. आदित्य-एल 1 के द्वारा भेजे गए सूर्य के सुंदर, रंगीन चित्रों से वैज्ञानिकों को क्या लाभ हुआ है?
उत्तर: आदित्य-एल 1 ने सूर्य के ग्यारह रंगों के चित्र भेजे हैं। इन चित्रों से वैज्ञानिकों को सूर्य की संरचना, उसकी गर्मी, विस्फोट और ऊर्जा के प्रभाव को समझने में मदद मिली है। इससे पृथ्वी पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करना आसान हुआ है।
4. यदि आप बड़े होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बने तो कौन-कौन से कार्य करना चाहेंगे?
उत्तर: यदि मैं अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँ तो मैं नए अंतरिक्ष यान बनाना चाहूँगा, सूर्य और अन्य तारों का अध्ययन करना चाहूँगा, और अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने के लिए प्रयोग करना चाहूँगा। साथ ही, मैं पृथ्वी की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष से आने वाले खतरों का समाधान खोजने की कोशिश करूँगा।
मिलान करें
निम्नलिखित पंक्तियों को उनके भावों से जोड़िए—
| पंक्तियाँ | स्तंभ-2 |
|---|---|
| लगरांज | हाइड्रोजन और हीलियम नामक गैसों का एक विशाल गोला |
| आदित्य-एल 1 | भास्कर, दिनेश, सूरज, रवि आदि |
| सूर्य | सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन |
| आदित्य के अन्य नाम | इटली के एक महान गणितज्ञ |
उत्तर:
| पंक्तियाँ | स्तंभ-2 |
|---|---|
| लगरांज | इटली के एक महान गणितज्ञ |
| आदित्य-एल 1 | सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन |
| सूर्य | हाइड्रोजन और हीलियम नामक गैसों का एक विशाल गोला |
| आदित्य के अन्य नाम | भास्कर, दिनेश, सूरज, रवि आदि |
भाषा की ओर
उच्चारण की बात
| “मैं बड़ा होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगा और दूर-दूर के तारों के विषय में पढ़ूँगा और वहाँ अंतरिक्ष यान भेजूँगा।” पाठ के इस वाक्य में बड़ा और पढ़ूँगा शब्दों को रेखांकित किया गया है। इनका उच्चारण कीजिए। ‘ड़’ और ‘ढ़’ वर्ण ‘उत्क्षिप्त वर्ण’ कहलाते हैं। ‘उत्क्षिप्त’ का अर्थ होता है—फेंकना। उच्चारण करते समय ये वर्ण जीभ द्वारा बाहर की ओर फेंके जाते हैं। आगे के दाँतों के निकट मुँह के ऊपरी खुरदरे भाग से ‘ड’ तथा मुँह की छत यानी बिलकुल ऊपर की ओर जीभ का स्पर्श करवाकर ‘ढ़’ का उच्चारण किया जाता है। इन दोनों के उच्चारण में थोड़ा अंतर होता है। आइए, इस अंतर को खेल-खेल में गाकर समझें— |
‘ड़’ और ‘ढ़’ में अंतर
ड और ढ़ वर्णों में बच्चों, अंतर क्या है जानें हम।
ये दोनों हैं जुड़वाँ-से पर, कुछ अंतर पहचानें हम।।
किसी शब्द में सबसे पहले कभी नहीं आते हैं ये।
बाकी किसी जगह भी आकर झट घुल-मिल जाते हैं ये।।
दाँत से ऊपर मुँह का वह हिस्सा ड को इससे प्यार है जी।
मुँह की छत पर ढ़ का अपना पूरा ही अधिकार है जी।।
बादल गड़-गड़, बिजली कड़-कड़, गड़-गड़, कड़-कड़ शोर हुआ।
बोला ‘ड’ उस घड़ी जीभ ने बोलो मुँह किस जगह छुआ।।
चढ़ें चढ़ाई, करें पढ़ाई, कढ़ी बनेगी, चढ़ी कड़ाही।
ढ़ में जीभ खेलती देखो, मुँह की छत संग छुअम-छुआई।।
कड़वा काढ़ा, काढ़ा कड़वा, कड़वा काढ़ा, कौन पिए?
गाते-गाते देखो बच्चों, ड-ढ़ दोनों सीख लिए।।
1. नीचे दोनों वर्णों से बने कुछ शब्द दिए गए हैं। उन्हीं के आगे बने रिक्त स्थानों में अपने शब्द भरिए—
‘ड’ के प्रयोग वाले शब्द—
सड़क, कड़वा, मकड़ी, …………….., …………….., ……………..
उत्तर: ड’ के प्रयोग वाले शब्द
- सड़क
- कड़वा
- मकड़ी
- लड़का
- गाड़ी
- पड़ोस
‘ढ़’ के प्रयोग वाले शब्द—
पढ़ना, चढ़ाई, काढ़ा, …………….., …………….., ……………..
उत्तर: ‘ढ़’ के प्रयोग वाले शब्द
- पढ़ना
- चढ़ाई
- काढ़ा
- कढ़ाई
- झाड़ू
- लढ़ाई
विशेष : यदि इन वर्णों से बने शब्द आपकी मातृभाषा में भी हैं, तो उनके बारे में भी बताइए।
उत्तर: विशेष : मातृभाषा में प्रयोग
मेरी मातृभाषा मराठी में भी ‘ड’ वाले शब्द बहुत मिलते हैं, जैसे—
- रस्ता (सड़क)
- मकड (मकड़ी)
- लडका (लड़का)
‘ढ़’ वाले शब्द मराठी में कम हैं, लेकिन हिंदी से आए शब्दों में प्रयोग होते हैं, जैसे—
- पढ़ाई
- चढ़ाई
- कढ़ाई
निपात
| “मुझे तो अपने माता-पिता के बचपन के चित्र भी देखे हैं पर सूर्य का भी चित्र होता है, तो पता ही नहीं था।” वाक्य में प्रयुक्त इन रेखांकित शब्दों को देखिए। ये वाक्य के अर्थ को बल दे रहे हैं। इन छोटे-छोटे शब्दों को ‘निपात’ कहा जाता है। एक उदाहरण देखिए— मैं बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगी। (सामान्य वाक्य) मैं भी बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगी। (अर्थ—कुछ अन्य भी अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनेंगे) मैं बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक ही बनूँगी। (अर्थ—कुछ अन्य नहीं बनूँगी) |
आइए, नीचे दिए गए वाक्यों में ही, भी, तक, तो, मात्र आदि का प्रयोग करके अर्थ को मिले बल पर विचार करें—
(क) बहुत …………… अच्छा प्रश्न पूछा।
उत्तर: बहुत ही अच्छा प्रश्न पूछा।
“ही” से बल मिलता है कि प्रश्न बहुत ही अच्छा था।
(ख) मुझे …………… ये सब अद्भुत बातें जानकर बहुत आनंद आ रहा है।
उत्तर: मुझे भी ये सब अद्भुत बातें जानकर बहुत आनंद आ रहा है।
“भी” से यह स्पष्ट होता है कि अन्य लोगों की तरह मुझे भी आनंद हो रहा है।
(ग) आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते …………… रह जाएँगे।
उत्तर: देखते ही रह जाएँगे।
“ही” से बल मिलता है कि चित्र इतने सुंदर हैं कि नजर हटाना मुश्किल होगा।
(घ) हमें …………… यह पाठ पढ़ना …………… नहीं है बल्कि इसे अच्छी तरह समझना …………… है।
उत्तर: हमें तो यह पाठ पढ़ना मात्र नहीं है बल्कि इसे अच्छी तरह समझना ही है।
“तो, मात्र, ही” से बल मिलता है कि केवल पढ़ना नहीं, बल्कि समझना जरूरी है।
(ङ) पत्र लिखना तो दूर तुमने मुझे फोन …………… नहीं किया।
उत्तर: फोन भी नहीं किया।
“भी” से बल मिलता है कि छोटा काम (फोन करना) तक नहीं किया गया।
विराम चिह्न
| हमें जानें— भाषा की गाड़ी में अपना, ब्रेक सरीखा होता काम। छोटे-छोटे चिह्नों वाला, भाषा का मैं मित्र ‘विराम’।। |
3. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए—

(क) यह अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कब भेजा गया था……
उत्तर: यह अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कब भेजा गया था?
(ख) क्या तुम्हें बोलने में भी कठिनाई हो रही है……
उत्तर: क्या तुम्हें बोलने में भी कठिनाई हो रही है?
(ग) वाह…… हमें इस पाठ को पढ़ने में बहुत आनंद आया……
उत्तर: वाह! हमें इस पाठ को पढ़ने में बहुत आनंद आया।
(घ) धरा……वसुधा……पृथ्वी आदि धरती के ही अन्य नाम हैं……
उत्तर: धरा, वसुधा, पृथ्वी आदि धरती के ही अन्य नाम हैं।
शब्द पहचान
नीचे दिए गए पाठ के अंश से दो-दो संज्ञा (नाम वाले शब्द), सर्वनाम (संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द), विशेषण (संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द) और क्रिया (कार्य के होने या करने का बोध कराने वाले शब्द) शब्द छाँटकर लिखिए—
बहुत अच्छा प्रश्न पूछा। सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं। इनसे बहुत सारी ऊर्जा निकलती है। जैसे धरती पर आँधियाँ आती रहती हैं, वैसे ही सूर्य की ऊर्जा से भी आती रहती हैं। सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में आदित्य-एल 1 में लगे उपकरणों द्वारा हमें जानकारी मिलेगी।
| संज्ञा – | ………………………… | ………………………… |
| सर्वनाम – | ………………………… | ………………………… |
| विशेषण – | ………………………… | ………………………… |
| क्रिया – | ………………………… | ………………………… |
उत्तर:
| संज्ञा – | सूर्य | ऊर्जा |
| सर्वनाम – | हमें | ये |
| विशेषण – | अद्भुत | विशाल |
| क्रिया – | पूछा | निकलती |
पाठ से आगे
अनुमान और कल्पना
कल्पना कीजिए कि आप वैज्ञानिक बन गए हैं और आपको सूर्य के रहस्य जानने के लिए भेजा जा रहा है, तब आप—
(क) सूर्य की गर्मी से बचने के लिए किस तरह की व्यवस्था करेंगे?
उत्तर: मैं ऐसा अंतरिक्ष यान बनाऊँगा जिसमें विशेष सुरक्षा परत होगी। यह परत गर्मी और विकिरण को रोक सकेगी। यान में ठंडा रखने वाली मशीनें और मजबूत धातु का आवरण होगा ताकि वैज्ञानिक सुरक्षित रह सकें।
(ख) सूर्य से जुड़े कौन-से रहस्यों को खोजने का प्रयास करेंगे?
उत्तर: मैं सूर्य की गैसों की टकराहट, उसके विस्फोटों से निकलने वाली ऊर्जा और पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करूँगा। साथ ही, मैं यह जानने की कोशिश करूँगा कि सूर्य की रोशनी और गर्मी अंतरिक्ष में कैसे फैलती है।
(ग) क्या सूर्य से एक न एक दिन हाइड्रोजन और हीलियम गैसें समाप्त हो जाएँगी? ऐसी स्थिति में हमारी धरती का क्या होगा?
उत्तर: हाँ, वैज्ञानिकों के अनुसार बहुत लंबे समय बाद सूर्य की हाइड्रोजन और हीलियम गैसें खत्म हो जाएँगी। तब सूर्य की ऊर्जा कम हो जाएगी और धीरे-धीरे वह ठंडा पड़ जाएगा। ऐसी स्थिति में धरती पर जीवन संभव नहीं रहेगा क्योंकि हमें प्रकाश और ऊष्मा नहीं मिलेगी।
सृजन
यदि आपको विद्यालय में आदित्य-एल 1 के वैज्ञानिकों से मिलने का एक अवसर मिलता है तो आप उनसे कौन-से प्रश्न पूछना चाहेंगे?
उदाहरण— आपसे मिलकर मुझे और मेरे साथियों को बहुत अच्छा लग रहा है। क्या आप हमें बताएँगे कि वैज्ञानिक बनने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है?
- (क) …………………………………………………………………………………………
- (ख) …………………………………………………………………………………………
- (ग) …………………………………………………………………………………………
- (घ) …………………………………………………………………………………………
उत्तर:
- (क) आपने आदित्य-एल 1 को बनाने में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ झेलीं और उन्हें कैसे हल किया?
- (ख) सूर्य के ग्यारह रंगों के चित्रों से आपको कौन-सी नई जानकारी मिली?
- (ग) क्या सूर्य पर होने वाले विस्फोटों का असर सीधे हमारी पृथ्वी पर भी पड़ता है?
- (घ) वैज्ञानिक बनने के लिए विद्यार्थियों को किन-किन विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
आदित्य-एल 1 और सूर्य की भेंट
यहाँ पर आदित्य-एल 1 और सूर्य के बीच बातचीत हो रही है। आप इस बातचीत को अपनी कल्पना से आगे बढ़ाइए—
सूर्य : अरे, आप कौन हैं? आपको पहले कभी नहीं देखा!
आदित्य-एल 1 : मैं आदित्य-एल 1 हूँ। मैं आपको जानने और समझने आया हूँ।
सूर्य : ………………………………………………………………………………………………
आदित्य-एल 1 : ………………………………………………………………………………….
सूर्य : ……………………………………………………………………………………………….
आदित्य-एल 1 : …………………………………………………………………………………
उत्तर: आदित्य-एल 1 और सूर्य की भेंट
- सूर्य: अरे, आप कौन हैं? आपको पहले कभी नहीं देखा!
- आदित्य-एल 1: मैं आदित्य-एल 1 हूँ। मैं आपको जानने और समझने आया हूँ।
- सूर्य: अच्छा! लोग मुझे आग का गोला कहते हैं। क्या आप मेरी असली पहचान जान पाएँगे?
- आदित्य-एल 1: हाँ, मैं आपके तापमान, गैसों की टकराहट और आपके विस्फोटों का अध्ययन करूँगा।
- सूर्य: मेरे भीतर हाइड्रोजन और हीलियम गैसें लगातार ऊर्जा पैदा करती हैं। क्या आप इसे समझ पाएँगे?
- आदित्य-एल 1: बिल्कुल! मैं आपके ग्यारह रंगों के चित्र पृथ्वी तक भेजूँगा ताकि वैज्ञानिक आपके रहस्यों को जान सकें।
- सूर्य: बहुत अच्छा! लेकिन ध्यान रहे, मेरी गर्मी बहुत अधिक है।
- आदित्य-एल 1: चिंता मत कीजिए, मैं सुरक्षित दूरी पर रहकर ही आपका अध्ययन करूँगा।
परियोजना
यह पाठ संवाद शैली में लिखा है। आप अभिनय के साथ इसे कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। इस संवाद में आप अपनी कल्पना से बदलाव भी कर सकते हैं और कोई नया पात्र भी जोड़ सकते हैं। इसमें आप अपने शिक्षक की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
नाटक: हमारा आदित्य
पात्र:
- शिक्षक
- विद्यार्थी (राहुल, सुमन, दिनेश, भास्कर आदि)
- आदित्य-एल 1 (नया पात्र)
- सूर्य (कल्पना से जोड़ा गया पात्र)
दृश्य 1 – कक्षा में शिक्षक का आगमन
- विद्यार्थी: सुप्रभात शिक्षक जी!
- शिक्षक: सुप्रभात बच्चों! आज हम सूर्य और आदित्य-एल 1 के बारे में बात करेंगे।
दृश्य 2 – विद्यार्थियों की जिज्ञासा
- राहुल: मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर चलता है।
- सुमन: नहीं, यह तो आग का गोला है।
- शिक्षक: सही कहा, सूर्य एक तारा है और इसमें हाइड्रोजन व हीलियम गैसें हैं।
दृश्य 3 – आदित्य-एल 1 का प्रवेश
- आदित्य-एल 1: नमस्ते बच्चों! मैं सूर्य के रहस्यों को जानने आया हूँ।
- विद्यार्थी (कौतूहल से): वाह! आप हमें सूर्य के चित्र दिखाएँगे?
- आदित्य-एल 1: हाँ, मैंने सूर्य के ग्यारह रंगों के अद्भुत चित्र भेजे हैं।
दृश्य 4 – सूर्य और आदित्य-एल 1 की भेंट
- सूर्य: अरे, तुम कौन हो?
- आदित्य-एल 1: मैं आदित्य-एल 1 हूँ। मैं तुम्हारी गर्मी और ऊर्जा का अध्ययन कर रहा हूँ।
- सूर्य: ध्यान रखना, मेरी गर्मी बहुत अधिक है।
- आदित्य-एल 1: चिंता मत करो, मैं सुरक्षित दूरी से ही तुम्हें देख रहा हूँ।
दृश्य 5 – समापन
- शिक्षक: बच्चों, देखो! विज्ञान हमें सूर्य के रहस्यों को समझने में मदद करता है।
- विद्यार्थी: हम भी बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे और नए यान बनाएँगे।
- सभी मिलकर: जय विज्ञान!
खोजबीन
हमारी पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा आदि की आयु के बारे में वैज्ञानिकों का क्या मानना है? क्या इनकी भी आयु निश्चित है या ये कभी नष्ट नहीं होंगे? पुस्तकालय अथवा अन्य स्रोतों से इनका पता लगाइए। आप इसमें अपने विज्ञान, भूगोल शिक्षक या अभिभावक की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: पृथ्वी की आयु
- वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी लगभग 4.54 अरब वर्ष पुरानी है।
- यह आयु रेडियोमेट्रिक डेटिंग (यूरेनियम-सीसा जैसे तत्वों के क्षय का अध्ययन) से पता चली है।
- पृथ्वी लगातार बदलती रहती है – ज्वालामुखी, भूकंप और प्लेटों की हलचल से इसकी सतह नई बनती रहती है।
सूर्य की आयु
- सूर्य की आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष है।
- वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सूर्य की कुल आयु लगभग 10 अरब वर्ष होगी।
- अभी सूर्य अपने जीवन के मध्य चरण में है और हाइड्रोजन गैस से ऊर्जा बना रहा है।
- भविष्य में जब हाइड्रोजन समाप्त होगी, सूर्य लाल दानव (Red Giant) बन जाएगा और अंत में श्वेत बौना (White Dwarf) रह जाएगा।
चंद्रमा की आयु
- चंद्रमा की आयु भी लगभग 4.5 अरब वर्ष है।
- यह पृथ्वी के बनने के कुछ समय बाद ही बना था।
- वैज्ञानिक मानते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी से टकराए एक बड़े पिंड के टुकड़ों से बना।
क्या इनकी आयु निश्चित है?
- हाँ, इनकी आयु निश्चित है।
- सूर्य की ऊर्जा एक दिन खत्म हो जाएगी।
- जब सूर्य की हाइड्रोजन और हीलियम गैसें समाप्त होंगी, तब पृथ्वी पर जीवन असंभव हो जाएगा।
- पृथ्वी और चंद्रमा भी धीरे-धीरे बदलते रहेंगे और बहुत लंबे समय बाद नष्ट हो सकते हैं।
नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।
(i) हमारा आदित्य — वीडियो, सीआईईटी
https://www.youtube.com/watch?v=lKgkhYBVB9Y&t=1s
(ii) हमारा आदित्य— पी.एम., ई-विद्या चैनल की प्रस्तुति
https://www.youtube.com/live/Nj8LepkcufY?feature=shared
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ | आपकी भाषा में शब्द |
|---|---|---|
| अभिवादन | आदर के साथ प्रणाम या नमस्कार | |
| उत्तम | अच्छा, श्रेष्ठ | |
| आश्चर्य | हैरानी, अचरज | |
| धरा | पृथ्वी, धरती | |
| विशाल | बहुत बड़ा | |
| कठिनाई | मुश्किल, दिक्कत, बाधा | |
| रहस्य | छिपी हुई बात, भेद | |
| उद्घाटन | किसी बात को सामने लाना या प्रकट करना | |
| कौतूहल | कुछ नया जानने की तीव्र इच्छा, उत्सुकता | |
| पर्याप्त | जितनी जरूरत हो, आवश्यकता के अनुरूप | |
| अद्भुत | अनोखा, निराला | |
| अनन्य | जिसके जैसा कोई दूसरा न हो, एकमात्र, अद्वितीय | |
| विशिष्ट | विशेष, सबसे अलग | |
| संतुलित | बराबर, न कम न ज्यादा | |
| प्रक्षिप्त | अंतरिक्ष में सही स्थान पर स्थापित करना, जोड़ा हुआ | |
| परिक्रमा | चारों ओर चक्कर लगाना | |
| प्रक्षेपण | रॉकेट अथवा यान को अंतरिक्ष में छोड़ना/भेजना | |
| प्रत्यक्ष | जो ठीक आँखों के सामने हो, साक्षात् | |
| उपकरण | यंत्र, साधन, औजार | |
| मेधावी | बहुत बुद्धिमान या होनहार |
उत्तर:
| शब्द | अर्थ | आपकी भाषा में शब्द |
|---|---|---|
| अभिवादन | आदर के साथ प्रणाम या नमस्कार | नमस्ते, प्रणाम |
| उत्तम | अच्छा, श्रेष्ठ | श्रेष्ठ, बढ़िया |
| आश्चर्य | हैरानी, अचरज | अचंभा |
| धरा | पृथ्वी, धरती | धरती |
| विशाल | बहुत बड़ा | बड़ा |
| कठिनाई | मुश्किल, दिक्कत, बाधा | परेशानी |
| रहस्य | छिपी हुई बात, भेद | गुप्त बात |
| उद्घाटन | किसी बात को सामने लाना या प्रकट करना | खोलना, प्रकट करना |
| कौतूहल | कुछ नया जानने की तीव्र इच्छा, उत्सुकता | जिज्ञासा |
| पर्याप्त | जितनी जरूरत हो, आवश्यकता के अनुरूप | काफी |
| अद्भुत | अनोखा, निराला | आश्चर्यजनक |
| अनन्य | जिसके जैसा कोई दूसरा न हो, एकमात्र, अद्वितीय | अद्वितीय |
| विशिष्ट | विशेष, सबसे अलग | खास |
| संतुलित | बराबर, न कम न ज्यादा | संतुलन वाला |
| प्रक्षिप्त | अंतरिक्ष में सही स्थान पर स्थापित करना, जोड़ा हुआ | जोड़ा हुआ |
| परिक्रमा | चारों ओर चक्कर लगाना | घूमना |
| प्रक्षेपण | रॉकेट अथवा यान को अंतरिक्ष में छोड़ना/भेजना | छोड़ना |
| प्रत्यक्ष | जो ठीक आँखों के सामने हो, साक्षात् | सामने |
| उपकरण | यंत्र, साधन, औजार | औजार |
| मेधावी | बहुत बुद्धिमान या होनहार | तेज़, होशियार |
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