आखिरी चट्टान तक Class 9 NCERT Solutions विद्यार्थियों को हिंदी गंगा के अध्याय 5 ‘आखिरी चट्टान तक’ के प्रश्नों और उत्तरों को सरल एवं आसान भाषा में समझने में मदद करते हैं। इस अध्याय के प्रश्नों के उत्तर NCERT पाठ के आधार पर तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी पाठ को अच्छी तरह समझ सकें और परीक्षा की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें। यहाँ आपको अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल, स्पष्ट और exam-ready उत्तर मिलेंगे।

आखिरी चट्टान तक Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 5
अभ्यास
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पश्चिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से
उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।
तर्क: लेखक सैंड हिल से आगे बढ़कर ऊँचे टीले पर चढ़ा और वहीं से सूर्यास्त देखा।
2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना
उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना।
तर्क: प्रकृति की विशालता देखकर लेखक इतना प्रभावित हुआ कि अपनी पहचान ही भूल गया। यह विस्मय की स्थिति है।
3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि
उत्तर: (घ) संतुष्टि
तर्क: ऊँचे टीले पर पहुँचकर लेखक को अपने प्रयास की सफलता पर संतोष मिला। यह आत्मसंतोष का भाव है।
4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पश्चिमी क्षितिज का
उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का।
तर्क: समुद्र की लहरें और क्षितिज लेखक को उसकी विशालता और शक्ति का अनुभव कराते हैं।
5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
तर्क: लेखक ने केवल दृश्य नहीं बताए, बल्कि अपनी भावनाएँ, डर, रोमांच और शांति भी व्यक्त की हैं। इससे यात्रा जीवंत बन जाती है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था, लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
उत्तर: लेखक सैंड हिल पर कुछ देर रुका, लेकिन उसे लगा कि वहाँ से सूर्यास्त का पूरा दृश्य नहीं दिख रहा। इसलिए वह आगे के ऊँचे टीले पर गया ताकि पश्चिमी क्षितिज का खुला और सुंदर दृश्य देख सके। यही उसका मूल कारण था।
2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
उत्तर: लेखक ने बताया कि कन्याकुमारी के कई युवक बेरोज़गार थे। कुछ लोग फोटो-एल्बम बेचते थे, कुछ छोटे-मोटे काम करते थे। वे सीपियों का गूदा खाते और दर्शनशास्त्र पर चर्चा करते थे। इससे वहाँ की बेरोज़गारी और जीवन की कठिनाइयाँ सामने आती हैं।
3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया।” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: इसका मतलब है कि लेखक ने लगातार प्रयास करके ऊँचे टीले पर पहुँचने में सफलता पाई। उसे लगा कि उसकी मेहनत सफल हुई और वह संतुष्ट हुआ।
4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
उत्तर: लेखक ने पहली बार समुद्र की लहरों का इतना विशाल रूप देखा, रंग-बिरंगी रेत का अनुभव किया और सूर्यास्त के बदलते रंगों को महसूस किया। ये दृश्य उसके लिए बिल्कुल नए और अद्भुत थे।
5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
उत्तर:
- जब लेखक लगातार ऊँचे-ऊँचे टीलों पर चढ़ता रहा, थकान के बावजूद हार नहीं मानी।
- जब समुद्र की लहरों से डर लगा, तब भी उसने साहस दिखाया और सुरक्षित चट्टान पर पहुँच गया।
यात्रा का वृत्तांत
मोहन राकेश का ‘आखिरी चट्टान तक’ यात्रा-वृत्तांत केवल स्थान-चित्रण नहीं है बल्कि इसमें प्रकृति का सजीव रूपांकन, मानव-जीवन और समाज की झलक तथा आत्मानुभूति का गहरा समन्वय मिलता है।
नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों/विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से दर्शाया गया है। इन्हें पढ़कर यात्रा-वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।
| – दृश्य-वर्णन | – आत्मानुभूति व भावनाएँ | – सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य |
| – समुद्र, चट्टानें – लहरों का चित्रण – रंग, आकाश, रेत का जीवंत चित्रण | – विस्मय, रोमांच, भय, आत्म-संवेदना – अपने अस्तित्व का बोध – प्रकृति से संवाद | – विवेकानंद चट्टान – स्थानीय लोग, नवयुवक, शिक्षा – धार्मिक परंपराएँ (मंदिर, अर्घ्य) |
उत्तर:
- दृश्य-वर्णन – समुद्र, चट्टानें, लहरें, रंग और आकाश का जीवंत चित्रण।
- भावनाएँ – विस्मय, रोमांच, भय और आत्म-संवेदना।
- सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य – विवेकानंद चट्टान, मंदिर, अर्घ्य और धार्मिक परंपराएँ।
- स्थानीय समाज – बेरोज़गार नवयुवक, शिक्षा और जीवन की कठिनाइयाँ।
- जीवन-दर्शन – शक्ति का विस्तार, आत्म-चेतना, क्षणभंगुरता और उदासी।
- शैलीगत विशेषताएँ – प्रवाहपूर्ण भाषा, रूपक, उपमा, प्रतीक और रंगों का भावात्मक प्रयोग।
| – जीवन-दर्शन | – शैलीगत विशेषताएँ | – रोमांच व संघर्ष |
| – शक्ति का विस्तार, विस्तार की – – – शक्ति – आत्म-चेतना – क्षणभंगुरता व उदासी | – सजीव, प्रवाहपूर्ण भाषा दृश्यात्मकता – रूपक, उपमा, प्रतीक – रंगों का भावात्मक प्रयोग | – लहरों से संघर्ष – अँधेरे में भटकने का भय – सुरक्षित लौटने की चिंता |
उत्तर:
- दृश्य-वर्णन: मैंने महाबळेश्वर में सूर्योदय देखा। घाटियों में फैली धुंध और हरे-भरे जंगल का दृश्य बहुत सुंदर था।
- भावनाएँ: उस समय मन में शांति और विस्मय दोनों थे। लगा कि प्रकृति हमें अपनी शक्ति और सुंदरता दिखा रही है।
- सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य: वहाँ के मंदिरों और स्थानीय बाज़ार में पारंपरिक मिठाइयाँ और हस्तकला देखने को मिली।
- स्थानीय समाज: मैंने देखा कि लोग पर्यटन से अपनी आजीविका चलाते हैं—घोड़े की सवारी, स्ट्रॉबेरी बेचने और गाइड का काम।
- जीवन-दर्शन: पहाड़ों की ऊँचाई और घाटियों की गहराई देखकर लगा कि जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा है।
- शैलीगत विशेषताएँ: रंग-बिरंगे फूल, नीला आकाश और ठंडी हवा ने यात्रा को जीवंत बना दिया।
यात्रा और खोज
संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है।
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान | रचनाकार |
|---|---|---|
| किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौर | राहुल सांकृत्यायन |
उत्तर:
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान/विषय | रचनाकार |
|---|---|---|
| किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश (किन्नौर) | राहुल सांकृत्यायन |
| इंडिका | मौर्यकालीन भारत | मेगस्थनीज |
| बौद्ध राज्यों का वृत्तांत (Foguoji) | गुप्तकालीन भारत | फाह्यान |
| पश्चिमी दुनिया का वृत्तांत (Si-Yu-Ki) | भारत में 15 वर्ष का प्रवास | ह्वेनसांग |
| तहकीक-ए-हिंद | भारत का समाज और संस्कृति | अलबरूनी |
| द ट्रैवल्स (रिहला) | दिल्ली सल्तनत का वर्णन | इब्न बतूता |
| द बुक ऑफ सर मार्को पोलो | दक्षिण भारत | मार्को पोलो |
| आखिरी चट्टान तक | कन्याकुमारी यात्रा | मोहन राकेश |
मेरे देश की धरती
कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक तटीय शहर है, जिसके प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण पाठ में हुआ है।
1. भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।
उत्तर: भारत के समुद्री तट वाले राज्य हैं – गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, और पश्चिमबंगाल।
2. यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए।
| पर्यटन स्थल | राज्य जहाँ वह स्थित है | पर्वतीय/समुद्री/मैदानी/अन्य क्षेत्र | जलवायु | घूमने का अनुकूल समय |
उत्तर:
| पर्यटन स्थल | राज्य जहाँ वह स्थित है | पर्वतीय/समुद्री/मैदानी/अन्य क्षेत्र | जलवायु | घूमने का अनुकूल समय |
|---|---|---|---|---|
| महाबळेश्वर | महाराष्ट्र | पर्वतीय | ठंडी | अक्टूबर–मार्च |
| गोवा | गोवा | समुद्री | गर्म व आर्द्र | नवंबर–फरवरी |
| दार्जिलिंग | पश्चिम बंगाल | पर्वतीय | ठंडी | मार्च–जून |
| पुरी | ओडिशा | समुद्री | गर्म व आर्द्र | अक्टूबर–जनवरी |
| कन्याकुमारी | तमिलनाडु | समुद्री | गर्म व आर्द्र | नवंबर–फरवरी |
3. कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: कन्याकुमारी तीन समुद्रों का संगम स्थल है, वहाँ विवेकानंद स्मारक और तिरुवल्लुवर प्रतिमा हैं। रेत रंग-बिरंगी है और मंदिरों की धार्मिक परंपरा भी है। मेरे क्षेत्र सातारा (महाराष्ट्र) में पर्वतीय किले, झरने और ठंडी जलवायु है। अंतर यह है कि कन्याकुमारी समुद्री और सांस्कृतिक संगम स्थल है, जबकि सातारा प्राकृतिक पर्वतीय सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है।
4. इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।
उत्तर: वर्तमान समय में भारत का दक्षिणतम बिंदु इंदिरा पॉइंट है, जो ग्रेट निकोबार द्वीप (अंडमान-निकोबार) में स्थित है। यहाँ 1972 में बना लाइटहाउस आज भी कार्यरत है। कन्याकुमारी भारत के मुख्य भू-भाग का अंतिम छोर है।
5. इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है?
(संकेत– तिरुवल्लुवर की प्रतिमा आदि)
उत्तर: कन्याकुमारी में विवेकानंद स्मारक (1970) और तिरुवल्लुवर प्रतिमा (2000) अब एक 77 मीटर लंबा काँच का पुल से जुड़े हैं। यह पुल पर्यटकों को समुद्र के ऊपर चलते हुए दोनों स्मारकों तक पहुँचने का अवसर देता है।
हस्तशिल्प कौशल

“दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखा रही थीं।”
उपयुक्त पंक्ति में स्थानीय युवतियों द्वारा यात्रियों को दिखाए जाने वाली शंख-मालाओं का उल्लेख है। यह भारतीय हस्तकला उद्योग के एक पारंपरिक रूप को दर्शाता है, जहाँ स्थानीय कारीगर घरेलू स्तर पर उत्पाद बनाते और बेचते हैं। शिक्षक की सहायता से हस्तकला और कुटीर उद्योग के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
1. किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संगृहीत कीजिए। यह कार्य दो-दो के जोड़े में कीजिए—
- शिल्प का नाम
- यह कार्य कब से कर रहे हैं?
- इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया?
- शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की साझेदारी
- प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन
- औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण
उत्तर:
- शिल्प का नाम – मिट्टी के घड़े और टोकरियाँ बनाना
- यह कार्य कब से – कई पीढ़ियों से चलता आ रहा है
- प्रशिक्षण – परिवार और गाँव के बुज़ुर्गों से सीखा
- महिलाओं की साझेदारी – महिलाएँ भी मिट्टी गूँथने, रंग भरने और टोकरियाँ बुनने में मदद करती हैं
- सामग्री/तकनीक – मिट्टी, रंग, प्राकृतिक तंतु; हाथ से गढ़ना और बुनना
- लागत/विपणन – कम लागत, स्थानीय बाज़ार और मेलों में बिक्री
- औपचारिक प्रशिक्षण – कुछ लोग सरकारी प्रशिक्षण शिविरों से भी सीखते हैं
2. डिजिटल खरीददारी और ई-कॉमर्स कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म जैसे Amazon, Flipkart और सरकारी GeM पोर्टल शिल्पकारों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का अवसर देते हैं। इससे उनका बाज़ार स्थानीय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हो जाता है।
3. हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठी कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
- हुनर हाट – शिल्पकारों को प्रदर्शन और बिक्री का मंच
- ODOP योजना – हर जिले के एक उत्पाद को बढ़ावा देना
- हस्तशिल्प बोर्ड – प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता
- कला उत्सव – मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रचार
- ई-कॉमर्स सहयोग – डिजिटल बिक्री के लिए सरकारी पोर्टल
मिलकर चलें
आपकी कक्षा में कुछ विशेष आवश्यकता वाले साथी भी होंगे जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता होगा।
1. ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके समक्ष किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?
उत्तर: विशेष आवश्यकता वाले साथियों को यात्रा में कई कठिनाइयाँ हो सकती हैं— जैसे सीढ़ियाँ चढ़ना, भीड़ में चलना, वाहन में बैठने की असुविधा, शौचालय की कमी, सुनने या देखने में कठिनाई, और लंबे समय तक थकान।
2. उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।
उत्तर:
- सुलभ वाहन – व्हीलचेयर या रैम्प वाले वाहन का उपयोग।
- सहायक साथी – हर छात्र के साथ एक मित्र या शिक्षक।
- आराम स्थल – बीच-बीच में आराम करने की व्यवस्था।
- सुलभ शौचालय – यात्रा स्थल पर विशेष शौचालय।
- स्पष्ट सूचना – संकेत भाषा, चित्र या सरल शब्दों में जानकारी।
3. अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?
उत्तर: विशेष शिक्षा शिक्षक से चर्चा करने पर पता चलेगा कि हमारे सुझाव कितने प्रभावी हैं। वे बताएँगे कि किन उपायों को और बेहतर बनाया जा सकता है— जैसे अधिक प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण या अतिरिक्त सहायक स्टाफ।
4. प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।
उत्तर: विशेष आवश्यकता वाले साथियों से बात करने पर हमें उनकी वास्तविक ज़रूरतें समझ में आएँगी। वे बताएँगे कि उन्हें किस स्थिति में सबसे अधिक कठिनाई होती है और कौन-से उपाय उनके लिए सबसे उपयोगी होंगे।
प्रकृति की ओर
1. क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? अगर नहीं तो एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सुबह जल्दी उठकर जब सूरज की पहली किरणें आकाश में फैलती हैं तो चारों ओर हल्की लालिमा और सुनहरी रोशनी दिखाई देती है। वातावरण शांत और ठंडा होता है। पक्षियों की चहचहाहट और ताज़ी हवा मन को ताजगी देती है। यह दृश्य नई शुरुआत और आशा का प्रतीक लगता है।
शाम को सूरज धीरे-धीरे क्षितिज में उतरता है। आकाश में लाल, नारंगी और बैंगनी रंग फैल जाते हैं। समुद्र या पहाड़ों पर यह दृश्य और भी सुंदर लगता है। वातावरण में हल्की उदासी और शांति होती है। यह दृश्य दिन के अंत और विश्राम का संकेत देता है।
सूर्योदय में नवीनता और उत्साह होता है, जबकि सूर्यास्त में शांति और हल्की उदासी। दोनों ही दृश्य प्रकृति की सुंदरता और जीवन के चक्र को दिखाते हैं। सूर्योदय हमें ऊर्जा देता है और सूर्यास्त हमें विश्राम की ओर ले जाता है।
अनुभव की साझेदारी
विधा से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखकर आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा-संस्मरण लिखिए।
उत्तर: पिछली गर्मियों में मैं महाबळेश्वर गया। सुबह-सुबह घाटियों में फैली धुंध और सूरज की पहली किरणों ने वातावरण को बहुत सुंदर बना दिया। चारों ओर हरे-भरे जंगल और रंग-बिरंगे फूल थे।
लहरों की जगह यहाँ झरनों का दृश्य था। पानी की धाराएँ चट्टानों से गिरकर इंद्रधनुषी रंग बना रही थीं। यह दृश्य मुझे विस्मय और रोमांच से भर देता था।
स्थानीय बाज़ार में लोग स्ट्रॉबेरी और हस्तशिल्प बेच रहे थे। महिलाओं की भागीदारी भी दिखी—वे टोकरियों में फल सजाकर पर्यटकों को बेच रही थीं।
धार्मिक परंपरा भी देखने को मिली। पुराने मंदिरों में पूजा होती थी और लोग श्रद्धा से वहाँ जाते थे।
इस यात्रा ने मुझे जीवन-दर्शन भी दिया। पहाड़ों की ऊँचाई और घाटियों की गहराई देखकर लगा कि जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा है। प्रकृति से संवाद करते हुए मैंने अपने अस्तित्व का बोध किया।
चर्चा-परिचर्चा
1. ‘यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं’ विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर: यात्राएँ हमें नए स्थान, संस्कृति और लोगों से परिचित कराती हैं। इससे हमारा ज्ञान बढ़ता है, अनुभव गहरा होता है और जीवन में नई ऊर्जा आती है। यात्रा हमें प्रकृति से जोड़ती है और आत्म-चेतना का बोध कराती है।
2. “एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।”
यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं। ऐसी किसी स्थिति का सामना करने के लिए व्यक्ति में किन गुणों का होना आवश्यक है? अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: यात्रा के दौरान अचानक खतरे या कठिनाई आ सकती है—जैसे समुद्र की लहरें, अँधेरा, रास्ता भटकना या थकान। ऐसी स्थिति में व्यक्ति में ये गुण होने चाहिए:
- धैर्य – घबराए बिना शांत रहना।
- साहस – डर को जीतकर आगे बढ़ना।
- सतर्कता – आसपास के हालात पर ध्यान देना।
- निर्णय क्षमता – सही समय पर सही रास्ता चुनना।
- सहयोग भावना – साथियों की मदद करना और उनसे मदद लेना।
3. यदि आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर: एक बार मैं पहाड़ी यात्रा पर गया। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और रास्ता फिसलन भरा हो गया। उस समय मैंने धैर्य रखा, धीरे-धीरे कदम बढ़ाए और साथियों का सहारा लिया। इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि कठिन परिस्थितियों में साहस और सहयोग सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
व्याकरण की बात
क्रिया-विशेषण की पहचान और रेखांकन
“समुद्र में पानी बढ़ रहा था। तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।”
- उपयुक्त वाक्य में रेखांकित पद ‘धीरे-धीरे’ कम होने की क्रिया की विशेषता बता रहा है। यहाँ कम होने की क्रिया धीमी गति से हो रही है।
- जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द ‘विशेषण’ कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं। इस वाक्य में ‘धीरे-धीरे’ पद व्याकरणिक दृष्टि से क्रिया-विशेषण है।
- नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
वाक्य
(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
उत्तर:
- क्रिया-विशेषण: कटती हुई
- क्रिया: आती थीं
यहाँ “कटती हुई” क्रिया “आती थीं” की विशेषता बता रहा है।
(ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।
उत्तर:
- क्रिया-विशेषण: उस दिशा में
- क्रिया: जा रही थीं
“उस दिशा में” क्रिया “जा रही थीं” की विशेषता बताता है।
(ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।
उत्तर:
- क्रिया-विशेषण: देर तक
- क्रिया: देखता रहा
“देर तक” क्रिया “देखता रहा” की विशेषता बताता है।
आओ नए वाक्य बनाएँ
पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
| वाक्य | अर्थ | नए वाक्य |
|---|---|---|
| तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था। | ||
| पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे। | ||
| दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी। | ||
| पश्चिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक श्रृंखला दूर तक चली गई थी। | ||
| सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी। |
उत्तर:
| वाक्य | अर्थ | नए वाक्य |
|---|---|---|
| तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था। | चारों ओर केवल पानी फैला हुआ था। | बारिश के बाद खेतों में पानी-पानी हो गया। |
| पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे। | नारियल के पेड़ समूह में दूर-दूर खड़े थे। | गाँव के बाहर दूर-दूर हटकर आम के पेड़ लगे थे। |
| दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी। | रेत का लंबा ढलता हुआ हिस्सा फैला था। | पहाड़ से नीचे दूर तक लंबी ढलान दिखाई दे रही थी। |
| पश्चिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक श्रृंखला दूर तक चली गई थी। | पहाड़ियाँ एक के बाद एक लंबी कतार में फैली थीं। | हिमालय में बर्फ से ढकी पहाड़ियों की श्रृंखला दूर तक फैली है। |
| सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी। | रेत के फैलाव से जगह सूनी और उजाड़ लग रही थी। | गर्मी में गाँव की ज़मीन रूखी और वीरान हो जाती है। |
गतिविधियाँ
1. कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?
उत्तर: यदि कोई यात्री मेरी भाषा नहीं समझता, तो मैं इशारों, चित्रों या मोबाइल अनुवाद ऐप का उपयोग करूँगा। मुस्कान और सरल हाथ के संकेत से भी मदद की जा सकती है। इस तरह बिना भाषा समझे भी सहायता संभव है।
2. पधारो म्हारे देश
अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रोशर) तैयार कीजिए।
उत्तर:
| पर्यटन स्थल | राज्य | विशेषता |
|---|---|---|
| महाबळेश्वर | महाराष्ट्र | हरे-भरे जंगल, झरने, स्ट्रॉबेरी |
| गोवा | गोवा | समुद्र तट, चर्च, संगीत और उत्सव |
| कन्याकुमारी | तमिलनाडु | तीन समुद्रों का संगम, विवेकानंद स्मारक |
| जयपुर | राजस्थान | हवा महल, आमेर किला, हस्तशिल्प |
| दार्जिलिंग | पश्चिम बंगाल | चाय बागान, हिमालय का दृश्य |
भाषा संगम
“ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे।”

‘नाव’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची आगे दी गई है।
नाव (हिंदी); नौ, नौका (संस्कृत); बेड़ी (पंजाबी); किश्ती, नाव (उर्दू); नाव (कश्मीरी); बेड़ी, किश्ती (सिंधी); होड़ी, नाव (मराठी); नाव, होडी (गुजराती); बिड़ी (कोंकणी); नाउ, नौका, डुड़्ा (नेपाली); नाओ, नौका (बांग्ला); नाओ (असमिया); हि (मणिपुरी); नौका, नाआ (ओड़िआ); पडव, नाव (तेलुगू); ओडम् (तमिल); तोहण (मलयालम); दोहण (कन्नड़)।
1. इनके अतिरिक्त यदि आप ‘नाव’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर:
- हिंदी – नाव
- संस्कृत – नौ, नौका
- पंजाबी – बेड़ी
- उर्दू – किश्ती
- मराठी – होड़ी
- गुजराती – होडी
- नेपाली – नाउ
- बांग्ला – नाओ
- असमिया – नाओ
- ओड़िया – नौका
- तमिल – ओडम्
- मलयालम – तोहण
कन्नड़ – दोहण
2. उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर: “ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे।”
मराठी में: “उंच-उंच लाटांपासून वाचवत नावाडी नाव आणत होते.”
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