ऐसी भी बातें होती हैं Class 9 NCERT Solutions विद्यार्थियों को हिंदी गंगा के अध्याय 4 ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ के प्रश्नों और उत्तरों को सरल एवं आसान भाषा में समझने में मदद करते हैं। इस अध्याय के प्रश्नों के उत्तर NCERT पाठ के आधार पर तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी पाठ को आसानी से समझ सकें और परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें। यहाँ आपको अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल, स्पष्ट और exam-ready उत्तर मिलेंगे।

ऐसी भी बातें होती हैं Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 4
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर: (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का प्रतीक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर: (घ) कर्तव्यनिष्ठा
3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर: (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर: (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर: (ग) आत्मीय
6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघमल्हार गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर: (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर: (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे?
(संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर: यह प्रसंग बताता है कि पिताजी का अनुशासन डर पर नहीं, बल्कि सम्मान और समझ पर आधारित था। वे बच्चों को गंभीरता से समझाते थे और बात समझ जाने के बाद उन्हें खेलने के लिए भेज देते थे। इससे अनुशासन और स्नेह का सुंदर संतुलन दिखाई देता है।
2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर: पं. दीनानाथ मंगेशकर का प्रभाव लता जी के जीवन में बहुत गहरा था। उन्होंने स्वाभिमान, सच्चाई और सही बात पर डटे रहने की सीख दी। यही संस्कार लता जी के व्यवहार, मेहनत और परिवार की जिम्मेदारी निभाने में साफ दिखाई देता है।
3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा है?
उत्तर: लता जी के लिए ‘नाम आगे बढ़ाना’ सिर्फ प्रसिद्धि पाना नहीं था। इसका मतलब था पिता की कला और संस्कार को आगे बढ़ाना। उन्होंने अपने गानों और जीवन से यह जिम्मेदारी निभाई कि परिवार का नाम सम्मान से जुड़ा रहे। यानी यह प्रसिद्धि के साथ-साथ कर्तव्य और जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर: साक्षात्कार में लता जी बताती हैं कि वे कोरस में गाने वाली लड़कियों से आत्मीयता और अपनापन रखती थीं। उनके साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं थी। यह दिखाता है कि लता जी अपने सहयोगियों को सम्मान देती थीं और उनके साथ संबंध मित्रवत और सहयोगी थे।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व
साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए—
दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान
1. “मुझे अपने गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
उत्तर: इस पंक्ति से लता जी का गुण एकाग्रता और साधना सामने आता है। वे पूरी तरह संगीत में डूबी रहती थीं और किसी दूसरी चीज़ पर ध्यान नहीं देती थीं।
2. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
उत्तर: यहाँ से उनका गुण स्वाभिमान और आत्मविश्वास दिखता है। वे सच्चाई पर डटी रहती थीं और किसी के दबाव में नहीं आती थीं।
3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
उत्तर: इस पंक्ति से उनकी कृतज्ञता और विनम्रता झलकती है। वे मानती थीं कि अमरत्व उनके प्रशंसकों के प्यार से मिला है, न कि केवल उनके प्रयासों से।
4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”
उत्तर: यह पंक्ति उनकी दार्शनिकता और स्पष्टता को दर्शाती है। वे मानती थीं कि इंसान का शरीर नश्वर है, लेकिन कला और कर्म अमर रहते हैं।
मेरे प्रश्न
नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए—
- “संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है।”
इस वाक्य के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं, जैसे—
- लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा?
- लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
- लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?
- उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कॉन्सर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है?
आपने देखा कि अनेक प्रश्नों का एक ही उत्तर हो सकता है और एक ही उत्तर से अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं।
अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)—
1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
उत्तर:
- ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच कौन-सा भाव झलकता था?
- ‘मंगलागौर’ उत्सव में स्त्रियाँ किस प्रकार भाग लेती थीं?
- लोक पर्वों में गीत और नृत्य का क्या महत्व था?
2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
उत्तर:
- लता जी ने पुराने संगीतकारों की कौन-सी विशेषता बताई?
- तकनीकी प्रगति के बावजूद लता जी पुराने संगीतकारों के बारे में क्या सोचती थीं?
- लता जी के अनुसार पुराने संगीतकारों का संगीत किस कारण अद्वितीय था?
मेरे अनुभव मेरे विचार
अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
उत्तर: हाँ, कई बार ऐसी स्थिति आती है जब सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ता है। उदाहरण के लिए, स्कूल में अगर किसी दोस्त के साथ अन्याय हो रहा हो और सब चुप हों, तो अकेले उसका पक्ष लेना पड़ता है। यह करना मुश्किल होता है, लेकिन सही बात के लिए खड़े रहना ज़रूरी है।
2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।”
आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
उत्तर: हमारे परिवार में भी कुछ नियम हैं, जैसे – बड़ों का सम्मान करना, झूठ न बोलना और जरूरतमंद की मदद करना। इन बातों का पालन हम बिना किसी याद दिलाए करते हैं क्योंकि यह हमारे संस्कार का हिस्सा है।
3. “पहले दिन गुड़ी बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।”
आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर: हमारे घर में भी दीपावली और गणेश उत्सव विशेष तरीके से मनाए जाते हैं। दीपावली पर हम घर सजाते हैं, दीये जलाते हैं और परिवार के साथ पूजा करते हैं। गणेश उत्सव में हम प्रतिदिन आरती करते हैं और मेहमानों को प्रसाद खिलाते हैं।
4. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।”
पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
उत्तर: पहले त्योहारों में गीत, नृत्य और मेल-जोल ज़्यादा होता था। अब तकनीक और व्यस्त जीवन के कारण कई परंपराएँ बदल गई हैं। जैसे – पहले लोग मिलकर उत्सव मनाते थे, अब ज़्यादातर लोग घर तक सीमित रहते हैं। पूजा और उत्सव का तरीका भी सरल हो गया है। परिवार में बातचीत से पता चलता है कि अब त्योहारों में सामूहिकता कम और व्यक्तिगतता ज़्यादा हो गई है।
साक्षात्कार की पड़ताल
1. ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर लिखिए।
| साक्षात्कार के मुख्य बिंदु |
|---|
| साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम |
| प्रश्नोत्तर |
| भावनात्मक वातावरण |
| आमंत्रण, स्वागत और परिचय |
| उत्तर देने की शैली का संकेत |
| विचार और उदाहरण |
| संस्मरण |
| समापन |
उत्तर:
साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया उसका नाम – “यतींद्र मिश्र : दीदी…” और “लता मंगेशकर : जी, जरूर…”
- प्रश्नोत्तर – यतींद्र मिश्र प्रश्न पूछते हैं और लता जी उत्तर देती हैं।
- भावनात्मक वातावरण – “आपके माध्यम से ही मैं अपने करोड़ों प्रशंसकों का आभार व्यक्त करती हूँ…”
- आमंत्रण, स्वागत और परिचय – “आप अगर तैयार हों, तो मैं असंख्य शुभचिंतकों की ओर से प्रणाम करते हुए प्रश्न पूछना चाहूँगा…”
- उत्तर देने की शैली का संकेत – लता जी सहज, आत्मीय और स्पष्ट भाषा में उत्तर देती हैं।
- विचार और उदाहरण – “मेरे पिताजी ने सिखाया कि सही बात पर डटे रहना चाहिए…”
- संस्मरण – बचपन की घटनाएँ और पिता के नाटकों की यादें।
- समापन – लता जी अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।”
इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है— क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर: यह कथन बताता है कि साक्षात्कार की शैली आत्मीय बातचीत है। लता जी ने बहुत सहज और विनम्र भाव से कहा कि वे अपने अनुभव साझा करेंगी। इसमें औपचारिकता नहीं है, बल्कि अपनापन और सच्चाई है। यही शैली साक्षात्कार को जीवंत और भावनात्मक बनाती है।
आपका साक्षात्कार
“आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।”
प्रस्तुत पाठ में विश्व-प्रसिद्ध व्यक्तित्व का साक्षात्कार दिया गया है। कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?
उत्तर:
- प्रश्न 1: दीदी, जब आप पहली बार मंच पर गाने गईं, उस समय आपके मन में क्या भावनाएँ थीं?
- उत्तर: यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विद्यार्थियों को लता जी के शुरुआती अनुभव और आत्मविश्वास के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
- प्रश्न 2: आपने इतने लंबे समय तक संगीत साधना की। क्या कभी ऐसा क्षण आया जब आपको लगा कि अब थक गई हैं?
- उत्तर: यह प्रश्न इसलिए उपयोगी है क्योंकि इससे पता चलेगा कि कठिनाइयों और थकान के बावजूद लता जी ने कैसे दृढ़ता और समर्पण बनाए रखा।
- प्रश्न 3: आज के नए गायक और संगीतकारों को आप क्या सलाह देना चाहेंगी?
- उत्तर: यह प्रश्न इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे विद्यार्थियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा कि संगीत में सफलता पाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है।
- प्रश्न 4: आपके लिए सबसे प्रिय गीत कौन-सा है और क्यों?
- उत्तर: यह प्रश्न इसलिए रोचक है क्योंकि इससे लता जी की व्यक्तिगत पसंद और भावनात्मक जुड़ाव का पता चलता है।
विषय से संवाद
1. “एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।”
सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए।
इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी?
(संकेत– भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)
उत्तर: लता जी उस समय केवल 13 साल की थीं और पिता की मृत्यु के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। सुबह से रात तक स्टूडियो के चक्कर लगाना उनके लिए बहुत कठिन था। उन्हें भोजन की कमी, यात्रा-भाड़े की चिंता, सुरक्षा की समस्या और थकान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। फिर भी उन्होंने मेहनत और साहस से सब कुछ निभाया ताकि परिवार सुरक्षित रहे और उनका जीवन आगे बढ़े।
2. “पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाजों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रिकॉर्ड होते थे। भले ही वह गाना डुएट हो या फिर कोई सोलो सांग।”
अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिसमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
उत्तर: हमारे घर, विद्यालय और समुदाय में अनेक ऐसे कार्य होते हैं जिनमें सहयोग और सामूहिकता आवश्यक होती है। विद्यालय में वार्षिक उत्सव, खेल प्रतियोगिता और समूह-प्रोजेक्ट; घर में त्योहारों की तैयारी; तथा समुदाय में सफाई अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसके उदाहरण हैं। इन कार्यों से सहयोग, एकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
शास्त्रीय संगीत
1. “फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।”
रागदारी वाले गायन का अर्थ है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए—
राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहर, वाग, बधावा
उत्तर:
- राग: स्वरों की ऐसी विशेष व्यवस्था, जिससे किसी विशेष भाव या रस की अभिव्यक्ति होती है। उदाहरण: भैरव, यमन आदि।
- सुर: संगीत में प्रयुक्त मधुर और निश्चित स्वर। भारतीय संगीत के मुख्य सात सुर हैं— सा, रे, ग, म, प, ध, नि। उदाहरण: सा, रे, ग, म आदि।
- बंदिश: किसी राग में निश्चित रूप से बाँधी गई संगीत-रचना, जिसे गाया जाता है। उदाहरण: किसी राग में प्रस्तुत की जाने वाली खयाल की रचना।
- अभंग: महाराष्ट्र की भक्ति-परंपरा में प्रचलित भक्तिपूर्ण गीत, जिनमें भगवान के प्रति भक्ति व्यक्त की जाती है। उदाहरण: संत तुकाराम के अभंग।
- सोहर: बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला लोकगीत या मंगलगीत। उदाहरण: पुत्र या पुत्री के जन्म पर महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले सोहर।
- वाग: इस शब्द का अर्थ वचन, कथन या बोल के रूप में लिया जाता है। पाठ के संदर्भ में इसे गीत/गायन से संबंधित शब्द के रूप में समझा गया है। उदाहरण: लोकगीत में गाए जाने वाले बोल।
- बधावा: किसी शुभ अवसर, विशेषकर जन्म या विवाह आदि पर खुशी व्यक्त करने के लिए गाया जाने वाला मंगलगीत। उदाहरण: बच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला बधावा।
2. “त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संबंधित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।”
आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर राग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: हमारे क्षेत्र में त्योहारों और शुभ अवसरों पर विभिन्न लोकगीत गाने की परंपरा है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव, मंगलागौर, विवाह और अन्य पारंपरिक अवसरों पर महिलाएँ और परिवार के लोग मिलकर लोकगीत गाते हैं। इन गीतों में भक्ति, खुशी, पारिवारिक संबंध और सामूहिकता की भावना व्यक्त होती है। उदाहरण: गणेशोत्सव के अवसर पर गणपति की आरती और भक्ति-गीत गाए जाते हैं।
विद्यार्थी अपने क्षेत्र में प्रचलित किसी लोकगीत की कुछ पंक्तियाँ अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख सकते हैं।
साइबर सुरक्षा
“आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।”
- आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज/ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
https://cybercrime.gov.in/UploadMedia/CyberSafetyHindi.Pdf
उत्तर:
साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव
आजकल ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रयोग करके आवाज़ बदलकर लोगों को धोखा देते हैं। इससे बचने के लिए हमें कुछ साइबर सुरक्षा नियम अपनाने चाहिए:
- अजनबी कॉल पर भरोसा न करें – अगर कोई व्यक्ति पैसे माँगे या व्यक्तिगत जानकारी पूछे तो तुरंत कॉल काट दें।
- OTP और पासवर्ड साझा न करें – बैंक या सरकारी संस्था कभी फोन पर OTP नहीं माँगती।
- संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें – धोखेबाज नकली वेबसाइट भेजते हैं, उन पर क्लिक न करें।
- आधिकारिक वेबसाइट का प्रयोग करें – जैसे शिकायत दर्ज करने के लिए cybercrime.gov.in का प्रयोग करें।
- संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट करें – तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।
चर्चा का निष्कर्ष
तकनीक जितनी तेज़ी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से धोखाधड़ी के तरीके भी बदल रहे हैं। हमें सतर्क रहना होगा और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। इससे हम अपने परिवार और समाज को सुरक्षित रख सकते हैं।
हम ऐसे भी बोलते हैं
“वे बस हमको गंभीरता से देखते थे… मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।”
1. क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, अक्सर घर में माता-पिता या शिक्षक ऐसे होते हैं जो बिना बोले ही हमें समझा देते हैं। जैसे – माँ सिर्फ आँखों से इशारा करती हैं तो हम समझ जाते हैं कि अब पढ़ाई करनी है या मोबाइल बंद करना है। शिक्षक भी कभी-कभी सिर्फ हाथ के इशारे से बता देते हैं कि हमें शांत रहना है। यह अनुभव दिखाता है कि संकेत भाषा भी बहुत प्रभावी होती है।
2. यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा में) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे?
(संकेत– धैर्य, जिज्ञासा, समानुभूति आदि)
उत्तर: अगर कोई व्यक्ति संकेत भाषा में समझा रहा है तो हमें धैर्य रखना चाहिए, ध्यान से देखना चाहिए और उसकी बात समझने की कोशिश करनी चाहिए। हमें उसके प्रति जिज्ञासा और समानुभूति रखनी चाहिए ताकि उसे लगे कि हम उसकी भाषा का सम्मान कर रहे हैं। उसी तरह हमें भी अपने हाव-भाव और इशारों से स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इससे आपसी विश्वास और अपनापन बढ़ता है।
सृजन
1. “अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 में ले जाएँ”, कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है। 1940–50 के दशक में जाकर लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए। उस समय की वेशभूषा, भोजन, संगीत आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।
उत्तर:
दिनांक: 1949
आज टाइम मशीन से मैं 1949 के दशक में पहुँच गया। सुबह-सुबह लता जी से मुलाक़ात हुई। वे सादी साड़ी में थीं, बालों में चोटी और चेहरे पर सादगी। नाश्ते में उन्होंने पोहे और चाय ली। फिर हम साथ में स्टूडियो गए। वहाँ हारमोनियम और तबले की धुन पर रागदारी का अभ्यास हुआ। लता जी पूरे दिन अलग-अलग स्टूडियो में गाने की रिकॉर्डिंग करती रहीं। दोपहर का भोजन बहुत साधारण था—रोटी, भाजी और दही। शाम को वे फिर से अभ्यास में जुट गईं। थकान के बावजूद उनके चेहरे पर दृढ़ता और आत्मविश्वास था। यह दिन मुझे दिखाता है कि उनका जीवन पूरी तरह संगीत और परिवार की जिम्मेदारी में समर्पित था।
2. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है— आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
“आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
इस संदेश को पढ़कर मन भावुक हो जाता है। लता जी मानती थीं कि अमरत्व उनके गानों से नहीं, बल्कि श्रोताओं के प्यार से मिला है। यह विनम्रता और कृतज्ञता का अद्भुत उदाहरण है। मेरी प्रतिक्रिया यही है कि लता जी का संगीत और उनका व्यक्तित्व हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगा। उनका यह अंतिम संदेश हमें सिखाता है कि सच्ची अमरता कला और प्रेम से मिलती है, न कि प्रसिद्धि से।
व्याकरण की बात
मुहावरे
“मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।”
उपयुक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है— कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए—
- हाथ में आना
- हाथ का मैल होना
- हाथ से हाथ मिलाना
- हाथ साफ करना
- हाथ से निकल जाना
- हाथ धो बैठना
उत्तर:
- हाथ में आना: कई महीनों की मेहनत के बाद सफलता आखिरकार मेरे हाथ में आ गई।
- हाथ का मैल होना: धन-दौलत तो हाथ का मैल है, असली दौलत अच्छे संस्कार हैं।
- हाथ से हाथ मिलाना: गाँव के लोग सफाई अभियान में हाथ से हाथ मिलाकर काम कर रहे थे।
- हाथ साफ करना: चोर ने भीड़ का फायदा उठाकर जेब पर हाथ साफ कर दिया।
- हाथ से निकल जाना: परीक्षा की तैयारी का समय हाथ से निकल गया और अब पछतावा हो रहा है।
- हाथ धो बैठना: लापरवाही के कारण वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा।
हमारी भाषाएँ
1. “‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’। मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।” आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
उत्तर: इस कहावत का अर्थ है – गाँव तो बह जाता है, लेकिन नाम रह जाता है।
- मराठी में: “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन।”
- हिंदी में: “गाँव तो बह जाता है, लेकिन नाम रह जाता है।”
- मेरे क्षेत्र (मराठी) में भी यही कहावत प्रयोग होती है, जिसका भाव है कि नाम और पहचान हमेशा स्थायी रहते हैं।
2. लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए। अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
उत्तर:
- मराठी कहावत: “उंटावरून शेळ्या हाकणे।”
- हिंदी अनुवाद: “ऊँट पर बैठकर बकरियाँ हाँकना।”
- भाव: यह कहावत बताती है कि काम और साधन का मेल न हो तो परिणाम सही नहीं होता।
अनुवाद के बाद भाव वही रहता है, लेकिन हिंदी में यह कहावत थोड़ी हास्यपूर्ण लगती है, जबकि मराठी में यह अधिक व्यावहारिक प्रतीत होती है।
- भाव: यह कहावत बताती है कि काम और साधन का मेल न हो तो परिणाम सही नहीं होता।
3. एक ‘सेतु मित्र’ बनाइए जिसमें दो किनारे हों— एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हैं।
उत्तर:
- हिंदी किनारा – हिंदी
- मराठी किनारा – मराठी
- बीच का सेतु (समान अर्थ वाले शब्द):
- पानी – पाणी
- घर – घर
- माता – आई
- नाम – नाव
- गीत – गाणं
- मित्र – मित्र
गतिविधियाँ
1. ‘नाम रह जाएगा’ वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर ‘नाम रह जाता है…’ लिखिए और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में ‘नाम’ शब्द (जैसे– नाम, नालो, नांउ, नाउँ, मिंग्, पेरु, नामम् आदि) लिखिए। साथ ही कक्षा में सभी विद्यार्थी मिलकर एक प्रतिज्ञा लें— ‘हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।’
उत्तर:
ऊपर लिखें – “नाम रह जाता है…”
नीचे विभिन्न भाषाओं में “नाम” शब्द लिखें –
- हिंदी – नाम
- पंजाबी – ਨਾਂ (नां)
- उर्दू – نام (नाम)
- मराठी – नाव
- गुजराती – નામम्
- कोंकणी – नाव
- नेपाली – नाम
- बांग्ला – নাম (नांउ)
- तमिल – பெயர் (पेरु)
- तेलुगु – పేరు (पेरु)
- मलयालम – നാമം (नामम्)
- कन्नड़ – ಹೆಸರು (हेसरु)
नीचे प्रतिज्ञा – “हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।”
2. कागज पर एक पेड़ का चित्र बनाइए। इसे नाम दीजिए— भाषा-वृक्ष। इसकी जड़ में लिखिए— ‘भारतीय संस्कृति’; तने पर और शाखाओं पर लिखिए— हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए।
उत्तर: कागज पर पेड़ का चित्र बनाइए।
- जड़ में लिखें – भारतीय संस्कृति
- तने पर – हिंदी
- शाखाओं पर – मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती, कोंकणी, असमिया आदि।
- हर शाखा पर प्यारा शब्द लिखें –
- हिंदी – प्रेम
- मराठी – पोपट
- तमिल – इशै (संगीत)
- बांग्ला – আনন্দ
- गुजराती – मित्र
- असमिया – গীত (गीत)
3. समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लिए, एक विषय हो सकता है— ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।’
उत्तर:
- विषय – “कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।”
- हिंदी भाग: “कला हमें एकता का संदेश देती है।”
- अंग्रेज़ी भाग: “Art connects people, it never divides.”
- मराठी भाग: “कला माणसांना जोडते, वेगळं करत नाही.”
4. भाषाई संस्कृति पोटली
अपने परिवार में प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओं के पाँच शब्द एकत्र कीजिए (जैसे– दादी मराठी बोलती हों, माँ हिंदी)। उन्हें एक ‘शब्द पोटली’ में कार्ड पर सजाइए।
उत्तर:
परिवार में प्रयुक्त पाँच शब्द –
- हिंदी – घर
- मराठी – पोहे
- अंग्रेज़ी – Book
- कोंकणी – देव (ईश्वर)
- उर्दू – मोहब्बत
इन्हें कार्ड पर सजाकर “शब्द पोटली” बनाइए।
5. स्वर-कोलाज
लता जी के जीवन के प्रेरक वाक्यों और गीतों का चित्रमय कोलाज बनाइए।
उत्तर: लता जी के प्रेरक वाक्य और गीतों के चित्रों का कोलाज बनाइए।
जैसे – “मेरा गाना अमर है”, “संगीत में असीम शक्ति है” और उनके प्रसिद्ध गीतों के शीर्षक।
6. समय-रेखा
लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।
उत्तर:
लता जी के जीवन की घटनाएँ कालानुक्रम में –
- 1929 – 28 सितंबर को इंदौर में जन्म।
- 1942 – पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर का निधन; इसी वर्ष लता जी ने ‘पहिली मंगलागौर’ में अभिनय और गायन किया।
- 1940 के दशक के उत्तरार्ध – हिंदी फिल्म संगीत में सक्रिय रूप से पहचान बननी शुरू हुई।
- 1950–60 के दशक – पार्श्वगायन में महत्वपूर्ण पहचान और सफलता।
- 2001 – भारत रत्न से सम्मानित।
- 2022 – निधन।
भाषा संगम
“उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”
नीचे ‘संगीत’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
संगीत (हिंदी); सङ्गीतम् (संस्कृत); संगीत (पंजाबी); मूसीकी, मौसीकी (उर्दू); मूसीकी, संगीत (कश्मीरी); संगीत (सिंधी); संगीत कला (मराठी); संगीतकळा (गुजराती); संगीत (कोंकणी); संगीत (नेपाली); संगीत (बांग्ला); संगीत (असमिया); ईशै (मणिपुरी); संगीत (ओड़िआ); संगीतं (तेलुगु); संगीतम्, इशै (तमिल); संगीतम् (मलयालम); संगीत (कन्नड़)।
- इनके अतिरिक्त यदि आप ‘संगीत’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
- हिंदी – संगीत
- संस्कृत – सङ्गीतम्
- मराठी – संगीत कला
- तमिल – इशै
- तेलुगु – संगीतं
- मलयालम – संगीतम्
- कन्नड़ – ಸಂಗೀತ
- बांग्ला – সংগীত
- असमिया – সংগীত
- पंजाबी – ਸੰਗੀਤ
- उर्दू – मौसीकी
- नेपाली – संगीत
मेरी मातृभाषा (मराठी) में वाक्य: “त्या दिवशी घरात संगीताची सभा भरली होती.”
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