कबीर के दोहे Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 8 की तैयारी के लिए सरल और उपयोगी सामग्री है। इस अध्याय में कबीर के दोहों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों, सच्चाई, विनम्रता और सही आचरण का संदेश दिया गया है। यहाँ अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आसान भाषा में दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थी दोहों का भाव समझने और परीक्षा की तैयारी करने में आसानी से सक्षम हो सकें।

कबीर के दोहे Class 9 Question Answer Hindi Reva Chapter 8
बातचीत के लिए,
1. जब कोई हमसे कठोर वाणी में बात करता है, उस समय हम कैसा अनुभव करते हैं? कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि कैसी वाणी का प्रयोग हम सबके लिए सही है?
उत्तर: कठोर वाणी सुनकर हमें दुख और गुस्सा महसूस होता है। सही वाणी वह है जो मीठी और शांत हो, जिससे सबको अच्छा लगे।
2. क्या आपने कभी क्रोध में किसी से कठोर शब्द कहे हैं? क्रोध शांत होने के बाद आपको कैसा अनुभव हुआ?
उत्तर: हाँ, कभी‑कभी गुस्से में कठोर शब्द निकल जाते हैं। बाद में पछतावा होता है और मन भारी हो जाता है।
3. आपके विचार में अधिक बोलना अच्छा है या चुप रहना? क्यों?
उत्तर: न तो अधिक बोलना अच्छा है और न ही हमेशा चुप रहना। सही समय पर सही बात कहना ही उचित है।
4. कुछ लोग काम को कल पर क्यों डाल देते हैं? क्या कभी आपने भी किसी काम को कल पर डाला है? इसका क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: लोग आलस्य या लापरवाही से काम को कल पर डालते हैं। मैंने भी कभी काम टाला था और बाद में जल्दी‑जल्दी करना पड़ा, जिससे गलती हो गई।
5. कबीर के इन दोहों में आपको कौन-सा दोहा सबसे अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर: मुझे “काल्ह करै सो आज कर, आज करै सो अब” दोहा सबसे अच्छा लगा क्योंकि यह हमें समय का महत्व समझाता है और काम तुरंत करने की प्रेरणा देता है।
मेरी समझ से
नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए।
1. “ऐसी बानी बोलिए” दोहे में ‘आपा खोय’ का अर्थ है—
(क) मन से लोभ हटा देना
(ख) मन से अहंकार हटा देना
(ग) मन से क्रोध को हटा देना
(घ) मन से आलस्य को हटा देना
उत्तर: (ख) मन से अहंकार हटा देना।
2. “बड़ा हुआ तो क्या हुआ…” कहकर कबीर क्या समझाना चाहते हैं?
(क) ऊँचे पद का सब सदैव सम्मान करते हैं।
(ख) सेवा-भावना से ही व्यक्ति महान बनता है।
(ग) पढ़-लिखकर हमें ऊँचा पद प्राप्त करना चाहिए।
(घ) हमें पर्यावरण को बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
उत्तर: (ख) सेवा‑भावना से ही व्यक्ति महान बनता है।
3. किसी भी कार्य की अति (अधिकता) के बारे में कबीर का क्या विचार है?
(क) यह सदैव हानिकारक होती है।
(ख) यह सदैव लाभदायक होती है।
(ग) अति से ही हम कुशल बनते हैं।
(घ) यह कभी लाभदायक और कभी हानिकारक होती है।
उत्तर: (क) यह सदैव हानिकारक होती है।
4. “काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब्ब” पंक्ति का आशय है—
(क) समय के महत्त्व को समझना
(ख) परिश्रम के महत्त्व को समझना
(ग) अनुशासन के महत्त्व को समझना
(घ) विद्यार्थी जीवन के महत्त्व को समझना
उत्तर: (क) समय के महत्त्व को समझना।
5. कबीर के अनुसार प्रभु का स्मरण (सुमिरन) कब करना चाहिए?
(क) सुख के दिनों में
(ख) दुख के दिनों में
(ग) सुख और दुख दोनों ही पलों में
(घ) जब मन की कोई इच्छा पूरी करवानी हो
उत्तर: (ग) सुख और दुख दोनों ही पलों में।
| संकेत – आपके अनुसार जो सबसे उपयुक्त उत्तर है, उसे चुनिए। फिर अपने साथियों के साथ उसे साझा कीजिए। ध्यान दीजिए कि क्या उन्होंने भी वही उत्तर चुना है। एक-दूसरे से अपने उत्तर चुनने के कारणों की चर्चा कीजिए। |
सोचिए और लिखिए
1. कबीर ने गुरु को अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों माना है?
उत्तर: कबीर मानते हैं कि गुरु ही हमें भगवान तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं। गुरु ज्ञान देता है और अज्ञानता दूर करता है, इसलिए गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा है।
2. कबीर ने खजूर के पेड़ का उदाहरण क्यों दिया है?
उत्तर: खजूर का पेड़ ऊँचा तो होता है, लेकिन उसका फल दूर होता है और यात्रियों को छाया नहीं देता। कबीर कहना चाहते हैं कि केवल बड़ा होना उपयोगी नहीं है, सच्ची महानता वही है जो दूसरों को लाभ पहुँचाए।
3. “किसी भी कार्य की अति अच्छी नहीं होती।” उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है। जैसे— अधिक भोजन करने से बीमारी हो सकती है, अधिक मोबाइल प्रयोग से पढ़ाई खराब हो सकती है। इसलिए संतुलन ज़रूरी है।
4. “औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय” पंक्ति के द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर: कबीर कहते हैं कि हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो दूसरों को शांति दे और स्वयं भी शांत बनाए। मीठी वाणी से समाज में प्रेम और सद्भावना बढ़ती है।
भाषा की ओर
मिलान करें
1. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके भावों से जोड़िए—
| पंक्तियाँ | भाव |
|---|---|
| “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” | गुरु का महत्त्व ईश्वर से भी बड़ा है। |
| “औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।” | पद बड़ा होने के साथ व्यक्ति में सेवा-भाव भी होना चाहिए। इसी में उसकी महानता है। |
| “अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।” | मीठी वाणी स्वयं और सुनने वाले दोनों के मन को आनंदित करती है। |
| “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” | किसी भी कार्य की अधिकता अच्छी नहीं होती है। |
उत्तर:
| पंक्तियाँ | भाव |
|---|---|
| “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” | पद बड़ा होने के साथ व्यक्ति में सेवा‑भाव भी होना चाहिए। इसी में उसकी महानता है। |
| “औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।” | मीठी वाणी स्वयं और सुनने वाले दोनों के मन को आनंदित करती है। |
| “अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।” | किसी भी कार्य की अधिकता अच्छी नहीं होती है। |
| “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” | गुरु का महत्त्व ईश्वर से भी बड़ा है। |
तुकांत शब्द
| जिन शब्दों के अंत की ध्वनि मिलती-जुलती होती है, उन्हें ‘तुकांत शब्द’ कहते हैं। जैसे— गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥ पाँय – बताय (तुकांत शब्द) इनसे मिलते-जुलते अन्य शब्द— हँसाय, सुनाय आदि |
2. इसी प्रकार अन्य दोहों के तुकांत शब्द छाँटकर उनसे मिलते-जुलते दो अन्य शब्द भी लिखिए।
| “काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब्ब। पल में परलै होयगी बहुरि करेगा कब्ब॥” इस दोहे में प्रयोग किए गए ‘अब्ब’ और ‘कब्ब’ शब्दों के लिए सामान्य रूप में ‘अब’ और ‘कब’ का प्रयोग किया जाता है। |
उत्तर: इसमें ‘अब्ब’ और ‘कब्ब’ तुकांत शब्द हैं।
मिलते‑जुलते अन्य शब्द: सब्ब, रब्ब।
3. आपकी भाषा में निम्नलिखित शब्दों को क्या कहा जाता है? इन शब्दों के साथ-साथ कुछ अन्य शब्दों को भी अपनी भाषा में लिखिए—
| शब्द | आपकी भाषा में शब्द |
|---|---|
| गुरु | |
| पेड़ | |
| छाया | |
| सुख |
| “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” पंक्ति में ‘गुरु’ शब्द में ‘र’ पर ‘उ’ की मात्रा लगी है। इसमें लगी मात्रा के आकार को ध्यान से देखिए। अब इसमें ‘ऊ’ की मात्रा लगाकर देखिए। आपने देखा कि दोनों के आकार में थोड़ा अंतर है— रु – रू |
उत्तर:
- गुरु → शिक्षक
- पेड़ → वृक्ष
- छाया → साया
- सुख → आनंद
4. आइए, इनसे दो-दो शब्द बनाइए—
रु – रुकावट, ………………. , ……………….
रू – रूप, ………………. , ……………….
| इन वाक्यों को पढ़कर देखिए— अपने गुरुजनों का करना चाहिए आदर हमें। हमें अपने गुरुजनों का आदर करना चाहिए। वाक्य में सामान्यतः कर्ता (कार्य करने वाला) पहले आता है और सबसे बाद में क्रिया आती है। इनके बीच में भी शब्दों का विशेष क्रम होता है। |
उत्तर:
- रु → रुकावट, रुचि, रुदन
- रू → रूप, रूचि, रूखा
5. आइए, इन वाक्यों के शब्दों को उपयुक्त क्रम में लगाएँ—
(क) बोलनी चाहिए मीठी बोली हमें।
उत्तर: हमें मीठी बोली बोलनी चाहिए।
(ख) बुरी होती है अति किसी भी कार्य की।
उत्तर: किसी भी कार्य की अति बुरी होती है।
(ग) हमें करना चाहिए नहीं अधिक प्रयोग मोबाइल का।
उत्तर: हमें मोबाइल का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(घ) कल पर नहीं डालना चाहिए कोई भी कार्य हमें।
उत्तर: हमें कोई भी कार्य कल पर नहीं डालना चाहिए।
पाठ से आगे
अनुमान एवं कल्पना
1. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥
अगर सभी मनुष्य अपनी वाणी को मीठी और शांति देने वाली बना लें तो उससे समाज में क्या बदलाव दिखाई देगा?
उत्तर: यदि सभी लोग मीठी और शांत वाणी का प्रयोग करें तो समाज में प्रेम, भाईचारा और शांति बढ़ेगी। झगड़े और गलतफहमियाँ कम होंगी। लोग एक‑दूसरे की मदद करेंगे और वातावरण सुखद बनेगा।
2. अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥
दोह के आधार पर बताइए कि अगर हम आवश्यकता से अधिक मोबाइल या सोशल मीडिया का प्रयोग करेंगे तो उसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं।
उत्तर: मोबाइल और सोशल मीडिया का अधिक प्रयोग करने से पढ़ाई और काम पर ध्यान कम हो जाता है। आँखों और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। समय की बर्बादी होती है और रिश्तों में दूरी आ सकती है। इसलिए संतुलित उपयोग करना ही सही है।
सृजन
यदि आपको कभी कबीर मिल जाएँ तो आप उनसे क्या-क्या बातें करेंगे? अपनी कल्पना से आपके और कबीर के बीच संवाद लिखिए।
आप : कबीर जी आप इतने अच्छे दोहे कैसे बना लेते हैं?
कबीर : क्या सचमुच आपको ये दोहे अच्छे लगते हैं?
आप : ………………………………………………………………………………..
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कबीर : ………………………………………………………………………………..
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आप : ………………………………………………………………………………..
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कबीर : ………………………………………………………………………………..
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उत्तर:
- आप : कबीर जी आप इतने अच्छे दोहे कैसे बना लेते हैं?
- कबीर : क्या सचमुच आपको ये दोहे अच्छे लगते हैं?
- आप : हाँ, आपके दोहे बहुत सरल भाषा में जीवन की सच्चाई बताते हैं। इन्हें पढ़कर मन को शांति मिलती है और सही रास्ता दिखता है।
- कबीर : मैं तो वही कहता हूँ जो जीवन में देखा और अनुभव किया। सच्चाई को सरल शब्दों में कहना ही मेरा तरीका है।
- आप : आपके दोहे हमें समय का महत्व, गुरु का आदर और मीठी वाणी की सीख देते हैं। यह सब हमें अच्छे इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
- कबीर : यही मेरा उद्देश्य है कि लोग सच्चाई को समझें और सही जीवन जीएँ।
- आप : आपकी वाणी आज भी लोगों को मार्ग दिखाती है।
- कबीर : यदि मेरे शब्द किसी के जीवन में सुधार ला सकें, तो वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
“काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब्ब।” (हमें कल पर कोई कार्य नहीं डालना चाहिए।) इस विषय पर आपने भी कुछ न कुछ अनुभव अवश्य किया होगा। उन्हीं अनुभवों के आधार पर लगभग 60–70 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर: “काल्ह करै सो आज कर, आज करै सो अब्ब” दोहा हमें समय का महत्व समझाता है। मैंने भी कई बार काम को कल पर टाला है। एक बार परीक्षा की तैयारी देर से शुरू की, जिससे बहुत परेशानी हुई। समय पर काम न करने से तनाव और नुकसान होता है। इस अनुभव से मैंने सीखा कि काम तुरंत करना चाहिए। समय पर किया गया कार्य ही सफलता और शांति देता है।
परियोजना
1. अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या अन्य स्रोतों की सहायता से कबीर के दोहों, भजनों, गीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में भी लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक हस्तलिखित पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
उत्तर: यह परियोजना विद्यार्थियों को स्वयं करनी है।
2. कबीर के इन दोहों का सस्वर अथवा संगीतबद्ध वाचन कीजिए। इसमें आप अपने शिक्षकों और अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर: यह परियोजना विद्यार्थियों को स्वयं करनी है।
खोजबीन
नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।
- संत कबीर
- कबीर वाणी
- दोहे— कबीर, रहीम, तुलसी
उत्तर: यह परियोजना विद्यार्थियों को स्वयं करनी है।
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ | आपकी भाषा में शब्द |
|---|---|---|
| दोऊ काके लागौं पाँय बलिहारी गोविंद | दोनों किसके स्पर्श करना, छूना पैर, चरण न्योछावर होना आराध्य, भगवान | |
| बानी आपा खोय औरन को सीतल आपहुँ | वाणी, बोली, वचन अहंकार भाव त्याग देना दूसरों को शीतल, शांत स्वयं को, अपने आप को | |
| अति चूप धूप | अधिकता चुप रहना, मौन सूर्य का प्रकाश और ताप | |
| खजूर पंथी छाया अति दूर | एक वृक्ष, जो बहुत ऊँचा होता है राहगीर, मुसाफ़िर, यात्री छाँव बहुत ऊँचाई पर, बहुत दूर | |
| काल्ह करै सो अब्ब/अब परलै/प्रलय बहुरि कब्ब/कब | कल (आने वाला समय/कल) करना है वह, उसे इसी समय, तुरंत विनाश/अंत फिर से/दोबारा किस समय | |
| सुमिरन कोय काहे को | स्मरण, याद करना कोई क्यों, किसलिए |
उत्तर:
| शब्द | अर्थ | आपकी भाषा में शब्द |
|---|---|---|
| दोऊ काके लागौं पाँय बलिहारी गोविंद | दोनों किसके स्पर्श करना, छूना पैर, चरण न्योछावर होना आराध्य, भगवान | दोऊ → दोनों काके → किसके लागौं पाँय → चरण छूना बलिहारी → न्योछावर होना, समर्पित होना गोविंद → भगवान |
| बानी आपा खोय औरन को सीतल आपहुँ | वाणी, बोली, वचन अहंकार भाव त्याग देना दूसरों को शीतल, शांत स्वयं को, अपने आप को | बानी → वाणी, बोली, वचन आपा खोय → अहंकार भाव त्याग देना औरन को → दूसरों को सीतल → शीतल, शांत आपहुँ → स्वयं को, अपने आप को |
| अति चूप धूप | अधिकता चुप रहना, मौन सूर्य का प्रकाश और ताप | अति → अधिकता, ज़्यादा होना चूप → मौन, चुप रहना धूप → सूर्य का प्रकाश और ताप |
| खजूर पंथी छाया अति दूर | एक वृक्ष, जो बहुत ऊँचा होता है राहगीर, मुसाफ़िर, यात्री छाँव बहुत ऊँचाई पर, बहुत दूर | खजूर → बहुत ऊँचा वृक्ष पंथी → राहगीर, मुसाफ़िर छाया → साया, छाँव अति दूर → बहुत ऊँचाई पर, बहुत दूर |
| काल्ह करै सो अब्ब/अब परलै/प्रलय बहुरि कब्ब/कब | कल (आने वाला समय/कल) करना है वह, उसे इसी समय, तुरंत विनाश/अंत फिर से/दोबारा किस समय | काल्ह → कल, आने वाला समय अब्ब/अब → अभी, इसी समय परलै/प्रलय → विनाश, अंत बहुरि → फिर से, दोबारा कब्ब/कब → किस समय |
| सुमिरन कोय काहे को | स्मरण, याद करना कोई क्यों, किसलिए | सुमिरन → स्मरण, याद करना कोय → कोई काहे को → क्यों, किसलिए |
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