संवादहीन Class 9 NCERT Solutions विद्यार्थियों को हिंदी गंगा के अध्याय 3 ‘संवादहीन’ के प्रश्नों और उत्तरों को सरल एवं आसान भाषा में समझने में मदद करते हैं। इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर NCERT पाठ के आधार पर तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी पाठ को अच्छी तरह समझ सकें और परीक्षा की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें। यहाँ आपको ‘संवादहीन’ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल, स्पष्ट और exam-ready उत्तर मिलेंगे।

संवादहीन Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 3
मेरे उत्तर, मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
उत्तर: (ख) ममता और स्नेह
2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता
3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह
4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद
उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
उत्तर: (ग) अकेलापन
मेरी समझ, मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
उत्तर: इस वाक्य में ‘नैया’ से आशय जीवन की नाव से है। ताई अकेली हो गई थीं, उनका परिवार गाँव छोड़कर शहर चला गया था। घर उजड़ गया था और उनके पास कोई सहारा नहीं था। अकेलेपन और कठिनाइयों से भरे जीवन को देखकर उन्होंने भगवान से कहा कि अब जीवन की नाव कैसे पार लगेगी। यह वाक्य उनके दुख और असहाय स्थिति को दर्शाता है।
2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस वाक्य में ताई के घर और ज़मीन-जायदाद के छिन जाने की घटना का संकेत है। पहले उनके पास खेती-बाड़ी, कारोबार और नौकर-चाकर थे, लेकिन धीरे-धीरे सब दूसरों के हाथ में चला गया। परिवार भी दूर चला गया और ताई अकेली रह गईं। यह वाक्य उनके जीवन में आई गिरावट और उजड़े हुए घर की स्थिति को दिखाता है।
3. “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
उत्तर: ताई का परिवार उन्हें छोड़कर चला गया था और वे अकेली हो गई थीं। उनके पास बात करने और सहारा देने वाला कोई नहीं था। ऐसे में मिट्ठू (तोता) ही उनका साथी बन गया। ताई ने अपनी सारी ममता और स्नेह मिट्ठू पर लुटा दिया। वह उसके लिए खाना बनातीं, उसे पुचकारतीं और उससे बातें करतीं। इस तरह मिट्ठू उनके जीवन का केंद्र बन गया।
4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
उत्तर: मिट्ठू के आने के बाद ताई के जीवन में सक्रियता और अपनापन बढ़ गया। अब वे मिट्ठू के लिए भोजन की व्यवस्था करतीं और आसपास के खेतों तथा पेड़ों पर उपलब्ध फलों की जानकारी रखने लगीं। इससे पता चलता है कि मिट्ठू के कारण ताई का जीवन अधिक सक्रिय और उद्देश्यपूर्ण हो गया था।
5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जगन मास्टर आदर्शवादी, स्वतंत्रता-प्रिय और संवेदनशील व्यक्ति थे। वे किसी भी जीव को बंधन में रखना उचित नहीं मानते थे। इसी विचार के कारण उन्होंने मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकाल दिया। वे अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने वाले व्यक्ति थे। उनके इस कार्य से उनकी स्वतंत्रता-प्रिय सोच और आदर्शवाद स्पष्ट होता है, यद्यपि इसका परिणाम ताई के लिए दुखद रहा।
6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह शीर्षक ताई के लिए सबसे अधिक सार्थक है। ताई का परिवार उनसे दूर चला गया था और उनके पास संवाद का अभाव था। मिट्ठू ही उनका साथी था, लेकिन उसके उड़ जाने पर ताई फिर से संवादहीन हो गईं। इसलिए यह शीर्षक ताई की स्थिति को सबसे अधिक सही ढंग से व्यक्त करता है।
7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
उत्तर: पहले ताई के घर में परिवार, नौकर-चाकर और रौनक थी। वहाँ खेती-बाड़ी और कारोबार चलता था। लेकिन धीरे-धीरे सब खत्म हो गया और परिवार भी दूर चला गया। अब घर खाली और सुनसान हो गया था। इसलिए उस बड़े घर को सूना खंडहर कहा गया।
मेरे प्रश्न
नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
प्रश्न (क): ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न (ख): ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?
उपयुक्त प्रश्न: (क) ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न (क): ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
प्रश्न (ख): ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उपयुक्त प्रश्न: (ख) ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न (क): गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न (ख): गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?
उपयुक्त प्रश्न: (क) गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न (क): कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न (ख): शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
उपयुक्त प्रश्न: (ख) शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
मेरे अनुभव, मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए—
1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
उत्तर: जब हम अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो हमें हमेशा चिंता रहती है कि सब ठीक होगा या नहीं। जैसे ताई को मिट्ठू की चिंता रहती थी, वैसे ही मुझे भी अपने छोटे भाई की चिंता होती है जब मैं कहीं बाहर जाता हूँ। मन बार-बार सोचता है कि वह सुरक्षित है या नहीं, खाना खा लिया या नहीं। यह चिंता हमें भीतर से परेशान करती है और हम जल्दी घर लौटने की इच्छा करते हैं।
2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
उत्तर: हाँ, मैं मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। मेरे घर में एक बिल्ली है। जब मैं दुखी होता हूँ तो वह मेरे पास आकर बैठ जाती है और मुझे सहारा देती है। वह मेरी भावनाओं को समझती है। इसी तरह मिट्ठू भी ताई का साथी बन गया था। यह अनुभव दिखाता है कि पशु-पक्षी भी हमारे दुख-सुख को महसूस कर सकते हैं।
3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर: मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना उचित नहीं था। सच्चाई छिपाने से दुख और बढ़ सकता है। ताई मिट्ठू से बहुत प्यार करती थीं, इसलिए नया तोता देखकर उन्हें संतोष नहीं मिला। अगर उन्हें सच्चाई बता दी जाती तो वे धीरे-धीरे उसे स्वीकार कर लेतीं। इसलिए किसी को भ्रम में रखना सही नहीं है।
4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
उत्तर: हाँ, ऐसा मेरे साथ भी हुआ है। एक बार मैंने सोचा था कि परीक्षा में बहुत अच्छे अंक आएँगे क्योंकि मैंने खूब पढ़ाई की थी। लेकिन परिणाम उम्मीद से कम आया। उस समय मुझे बहुत निराशा हुई। यह अनुभव दिखाता है कि जीवन में हमेशा वही नहीं होता जो हम सोचते हैं।
5. “मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा प्रकट नहीं की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर: हाँ, लंबे समय तक किसी निश्चित वातावरण में रहने से कुछ प्राणी उस वातावरण के अभ्यस्त हो सकते हैं। कहानी में मिट्ठू भी पिंजरे में रहने का इतना आदी हो गया था कि बाहर आने की इच्छा नहीं दिखाता था। हमारे आसपास भी कुछ पालतू पक्षी और जानवर अपने परिचित वातावरण में ही सहज दिखाई देते हैं। इससे पता चलता है कि लंबे समय की आदत व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
कहानी का सौंदर्य
संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए—
| विशेषता | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| चित्रात्मकता (दृश्य शब्द) | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। | “मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।” |
| संवादात्मकता | कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। | “राम-राम कहो, सीताराम कहो।” |
| पुनरुक्ति | शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता। | “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। | “रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” |
| लोकधर्मी भाषा | ग्रामीण, सहज, बोलचाल की भाषा। | “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” |
| प्रश्नोत्तर शैली | पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना। | “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” |
उत्तर:
चित्रात्मकता (दृश्य शब्द)
- शब्दों से जीवंत चित्र बनाना।
- उदाहरण: “ताई की आँखों से आँसुओं की धार रुके नहीं रुकती थी।”
- यह दृश्य पाठक के मन में ताई की पीड़ा का स्पष्ट चित्र खींच देता है।
संवादात्मकता
- पात्रों के विचार और भाव व्यक्त करने के लिए संवाद।
- उदाहरण: “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?”
- यह संवाद ताई के अकेलेपन और मिट्ठू पर उनके भरोसे को दिखाता है।
पुनरुक्ति
- शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता।
- उदाहरण: “मर जा! मर जा!! मर जा!!!”
- यह पुनरुक्ति ताई और मिट्ठू की नोकझोंक को तीव्रता से व्यक्त करती है।
अतिशयोक्ति
- किसी भाव या घटना को बढ़ाकर कहना।
- उदाहरण: “ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू आसमान सिर पर उठा लेगा।”
- यह अतिशयोक्ति मिट्ठू की चंचलता और ताई की उम्मीदों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती है।
लोकधर्मी भाषा
- ग्रामीण, सहज और बोलचाल की भाषा।
- उदाहरण: “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?”
- यह भाषा ग्रामीण जीवन की सादगी और ताई की भावनाओं को दर्शाती है।
प्रश्नोत्तर शैली
- पात्रों द्वारा प्रश्न पूछना।
- उदाहरण: “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?”
- यह प्रश्न ताई के मन की चिंता और मिट्ठू से उनके संवाद को दिखाता है।
कहानी का अंत
किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे—
- सुखांत – जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।
- दुखांत – जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।
- मुक्त अंत – जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।
- अप्रत्याशित अंत – जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।
- यथार्थवादी अंत – जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे।
- प्रेरणात्मक अंत – जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।
- व्यंग्यात्मक अंत – जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।
आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
उत्तर: ‘संवादहीन’ कहानी का अंत मुक्त अंत तथा दुखांत दोनों माना जा सकता है। यह दुखांत इसलिए है क्योंकि मिट्ठू के उड़ जाने के बाद ताई फिर से अकेली और संवादहीन हो जाती हैं। साथ ही यह मुक्त अंत भी है, क्योंकि कहानी के अंत के बाद ताई के जीवन में आगे क्या होगा, यह पाठक की कल्पना पर छोड़ दिया गया है।
विषय से संवाद
1. “अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।”
कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?
उत्तर: लेखक ने नाम न देकर यह दिखाया है कि ग्रामीण समाज में स्त्रियों की पहचान अक्सर उनके पति के नाम से होती है। इससे समाज की सोच और स्त्रियों की स्थिति का यथार्थ सामने आता है।
2. “गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे।”
(क) ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए—
- इसका आयोजन क्यों किया जाता है?
- पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था?
- अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?
उत्तर: कुंभ-स्नान भारत का एक प्रमुख धार्मिक आयोजन है। इसकी परंपरा समुद्र-मंथन और अमृत-कलश से जुड़ी पौराणिक मान्यता से संबंधित है। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान को धार्मिक आस्था और पुण्य से जोड़ते हैं।
- पिछला महाकुंभ: 2025 में प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में महाकुंभ आयोजित हुआ था।
- अगला प्रमुख कुंभ आयोजन: 2027 में नासिक-त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र में कुंभ आयोजित होगा।
(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
(संकेत – कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)
उत्तर: ताई गाँव से बस पकड़कर नजदीकी रेलवे स्टेशन जातीं। वहाँ से ट्रेन द्वारा प्रयागराज पहुँचतीं। उनके साथ मोहल्ले की कुछ महिलाएँ भी जातीं। वे टिकट लेकर भीड़भाड़ वाली ट्रेन में बैठतीं। रास्ते में घर का बना खाना खातीं और स्टेशन पर चाय‑नाश्ता करतीं। प्रयागराज पहुँचकर वे संगम तट पर ठहरतीं और स्नान करतीं।
(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे?
(संकेत – उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों— देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)
उत्तर: मेरे नगर में गणेश उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
- देखना (दृश्य): रंग-बिरंगी सजावट, रोशनी और झाँकियाँ।
- सुनना (श्रवण): ढोल-ताशे, आरती और भक्तों की जयकार।
- सूँघना (गंध): फूलों की खुशबू और प्रसाद की मिठास।
- छूना (स्पर्श): भीड़ में धक्का-मुक्की और सजावट की चमकदार वस्तुएँ।
- स्वाद (रसना): मोदक, लड्डू और प्रसाद का स्वाद।
सृजन
1. “बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।”
अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
उत्तर: बहू-बेटों ने गाँव इसलिए छोड़ा होगा क्योंकि शहर में नौकरी, पढ़ाई और सुविधाएँ अधिक मिलती हैं। गाँव में खेती और कारोबार धीरे-धीरे कमज़ोर हो गया था। जाते समय उन्होंने सोचा होगा कि शहर में जीवन बेहतर होगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। घर छोड़ना आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उन्होंने अपने मन को समझाया कि यह बदलाव ज़रूरी है।
2. “वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की।”
ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था।
कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।
(संकेत – प्रारंभ कीजिए— “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”)
उत्तर: कल्पना कीजिए— “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके और असली मिट्ठू लौट आया। उसने नए तोते को देखकर कहा—‘अरे, तू तो मेरी जगह बैठा है!’ नया तोता चुप रहा, लेकिन असली मिट्ठू ने ताई को पुकारा—‘राम-राम ताई!’ ताई की आँखें भर आईं और उनकी दुनिया फिर से चहक उठी।”
3. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।”
आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए—
“आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि।”
उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: जब मैंने अपने दादा जी से पूछा कि वे मेरी आयु में समय कैसे बिताते थे, तो उन्होंने बताया कि वे खेतों में काम करते थे, दोस्तों के साथ खेलते थे और त्योहारों पर गाँव में खूब उत्सव मनाते थे। वे कहते हैं कि उस समय मोबाइल और टीवी नहीं थे, इसलिए लोग आपस में बैठकर बातें करते थे और कहानियाँ सुनते थे। यह सुनकर मुझे लगा कि उनका जीवन सरल लेकिन आनंद से भरा था।
4. “मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!”
मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।
(संकेत – आप समाचार पत्रों में प्रकाशित खोया-पाया या तलाश संबंधी विज्ञापन देख सकते हैं।)
उत्तर (विज्ञापन):
- खोया-पाया सूचना
- एक प्यारा हरा तोता “मिट्ठू” खो गया है। वह बोलता-बतियाता है और “राम-राम सीताराम” कहता है। यदि किसी को यह तोता मिले तो कृपया जगन मास्टर को सूचित करें।
- विशेष पहचान: उसकी आँखें तिरछी हैं और वह पिंजरे में रहने का आदी है।
- संपर्क: गाँव का बड़ा घर, जगन मास्टर।
व्याकरण की बात
‘मिट्ठू’ शब्द का अर्थ होता है— मधुरभाषी, मीठा बोलने वाला या तोता।
यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है— ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है— अपनी प्रशंसा आप करना या अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना।
आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है—
“अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
उत्तर:
- ऊँट के मुँह में जीरा → बहुत कम मात्रा होना।
- बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा → अचानक भाग्य खुल जाना।
- साँप के मुँह में छछूँदर → ऐसी स्थिति जिसमें दोनों ओर से नुकसान हो।
- कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी → जिसे सुधारना असंभव हो।
- गधे के सिर से सींग → किसी चीज़ का अचानक गायब हो जाना।
- साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे → दोनों ओर से फायदा होना।
- हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और → दिखावा अलग और असलियत अलग होना।
- लोमड़ी की तरह चालाक → बहुत चालाक व्यक्ति।
ध्वन्यात्मकता शब्दों से
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की ‘फड़फड़ाहट’ पर गया।”
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाहट’ कहलाती है।
ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
- खड़खड़ाहट → दरवाज़ा खुलते ही उसकी खड़खड़ाहट पूरे कमरे में गूँज उठी।
- टपक-टपक → बारिश के बाद छत से पानी टपक-टपक गिर रहा था।
- घड़घड़ाहट → ट्रेन की घड़घड़ाहट सुनकर बच्चे उत्साहित हो गए।
- चहचहाहट → सुबह पेड़ों पर पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण जीवंत हो गया।
- सिसक-सिसक → बच्चा दर्द से सिसक-सिसक कर रो रहा था।
- टिक-टिक → घड़ी की टिक-टिक सुनकर उसे नींद नहीं आई।
- धम-धम → ढोल की धम-धम से पूरा गाँव गूँज उठा।
शब्द-युग्म
“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।”
उपयुक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द-युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं—
- पुनरुक्त शब्द-युग्म, जैसे– बार-बार
- सजातीय शब्द-युग्म, जैसे– उठना-बैठना
- समानार्थक शब्द-युग्म, जैसे– दिन-प्रतिदिन
- विपरीतार्थक शब्द-युग्म, जैसे– दिन-रात
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए—
वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार
उत्तर:
| अर्थ | वाक्य | |
|---|---|---|
| वक्त-बेवक्त | समय-असमय | मिट्ठू वक्त-बेवक्त भोजन का तकाजा करता था। |
| नियम-सिद्धांत | नियम और आदर्श | जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांतों पर दृढ़ थे। |
| शादी-ब्याह | विवाह-संबंधी आयोजन | गाँव में शादी-ब्याह के अवसर पर खूब चहल-पहल रहती थी। |
| तीज-त्योहार | विभिन्न पर्व और उत्सव | तीज-त्योहार पर गाँव में विशेष रौनक रहती थी। |
खोजबीन शब्दों की
“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”
उपयुक्त अनुच्छेद में से खोजिए—
- ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विलोम हो।
- ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है।
- ऐसा शब्द जो एक क्रिया है।
- ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है।
- ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है।
- ऐसा शब्द जो एक विशेषण है।
- ऐसा शब्द जो एक कारक है।
- ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।
उत्तर:
- ‘ढीली’ → यह शब्द ‘तंग’ का विलोम है।
- ‘पसीना-पसीना’ → यह वाक्यांश एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है बहुत अधिक थक जाना या मेहनत करना।
- ‘पुकारते’ → यह एक क्रिया है, जो कार्य को दर्शाती है।
- ‘पेड़’ → यह एक संज्ञा है, जो वस्तु का नाम बताती है।
- ‘वह’ → यह एक सर्वनाम है, जो किसी व्यक्ति को इंगित करता है।
- ‘ढीली’ → यह एक विशेषण है, जो ताई की स्थिति बताता है।
- ‘से’ → करण कारक/अपादान कारक का कारक-चिह्न; यहाँ “दोनों हाथों से” में ‘से’ करण कारक का चिह्न है।
- ‘वह’ (ताई) → यह कर्ता है, क्योंकि ताई ही कार्य कर रही हैं।
अर्थ के आधार पर वाक्य
आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे— विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक, संकेतवाचक
| वाक्य का भेद | अर्थ/उपयोग | उदाहरण | |
|---|---|---|---|
| 1. | विधानवाचक वाक्य | किसी घटना या स्थिति के बारे में कथन करने वाला वाक्य। | जगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। |
| 2. | निषेधवाचक वाक्य | किसी कार्य के न होने या मना करने का भाव व्यक्त करने वाला वाक्य। | मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की। |
| 3. | प्रश्नवाचक वाक्य | किसी बात को पूछने या जानने के लिए प्रयुक्त वाक्य। | मिट्ठू! अब कैसे कटेगी? |
| 4. | विस्मयादिबोधक वाक्य | आश्चर्य, प्रसन्नता या दुख प्रकट करने वाला वाक्य। | मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!! |
| 5. | आज्ञावाचक वाक्य | किसी को कुछ करने का आदेश या आग्रह व्यक्त करने वाला वाक्य। | राम-राम कहो, सीताराम कहो। |
| 6. | इच्छावाचक वाक्य | किसी आकांक्षा, आशा या इच्छा को प्रकट करने वाला वाक्य। | जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ! |
| 7. | संदेहवाचक वाक्य | किसी बात को लेकर शंका या अनिश्चितता प्रकट करने वाला वाक्य। | ताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा। |
| 8. | संकेतवाचक वाक्य | इसमें एक बात या कार्य का होना या न होना किसी दूसरी बात या कार्य के होने या न होने पर निर्भर होता है। | जब खेती-बाड़ी नहीं, कारोबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! |
अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।
उत्तर:
| वाक्य का भेद | अर्थ/उपयोग | उदाहरण |
|---|---|---|
| विधानवाचक वाक्य | किसी घटना या स्थिति का कथन। | ताई मिट्ठू को पुकारते हुए बाग में घूम रही थीं। |
| निषेधवाचक वाक्य | किसी कार्य के न होने का भाव। | मिट्ठू ने ताई की पुकार का कोई उत्तर नहीं दिया। |
| प्रश्नवाचक वाक्य | किसी बात को पूछना। | ताई ने कहा—“मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” |
| विस्मयादिबोधक वाक्य | आश्चर्य या दुख प्रकट करना। | अरे! मिट्ठू तो उड़ गया!! |
| आज्ञावाचक वाक्य | आदेश या आग्रह। | राम-राम कहो, सीताराम कहो। |
| इच्छावाचक वाक्य | आकांक्षा या आशा प्रकट करना। | भगवान करे मिट्ठू फिर लौट आए। |
| संदेहवाचक वाक्य | शंका या अनिश्चितता। | शायद मिट्ठू किसी अमराई में छिपा होगा। |
| संकेतवाचक वाक्य | एक बात दूसरी पर निर्भर। | अगर मिट्ठू लौट आया तो ताई का जीवन फिर से चहक उठेगा। |
गतिविधियाँ
नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए—
1. कहानी के रंग –
समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आज़ादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: समूहों को अलग‑अलग भावनाएँ दी जाती हैं—जैसे दुख, स्नेह और आज़ादी। विद्यार्थी इन भावनाओं को मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत करेंगे। उदाहरण के लिए, दुख की स्थिति में ताई का अकेलापन दिखाया जा सकता है, स्नेह की स्थिति में ताई और मिट्ठू का संवाद दिखाया जा सकता है, और आज़ादी की स्थिति में मिट्ठू का उड़ जाना अभिनय द्वारा दिखाया जा सकता है। इस तरह बिना बोले भावनाएँ व्यक्त की जाएँगी।
2. पंखों की योजना –
छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?
उत्तर: छोटे समूहों में विद्यार्थी सोचेंगे कि यदि उन्हें मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो वे कहाँ जाते और क्यों। कोई विद्यार्थी कह सकता है कि वह पहाड़ों पर उड़कर प्रकृति का आनंद लेना चाहेगा, कोई समुद्र के ऊपर उड़कर लहरों को देखना चाहेगा, और कोई अपने गाँव या शहर के ऊपर उड़कर सबको देखना चाहेगा। इस गतिविधि से कल्पनाशक्ति और स्वतंत्रता का अनुभव होगा।
3. “पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही।” –
यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया अथवा उन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं।
अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन महीने में कब-कब बनता है।
उत्तर: यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन को महत्व नहीं दिया और परिवार की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी। विद्यार्थी अपने घर की महिलाओं से पूछेंगे कि उन्हें कौन‑सा भोजन पसंद है और वह भोजन महीने में कितनी बार बनता है। इससे यह समझ आएगा कि परिवार की महिलाएँ अक्सर अपनी पसंद को पीछे रखकर दूसरों की पसंद को आगे रखती हैं। यह गतिविधि विद्यार्थियों को संवेदनशील और समझदार बनाएगी।
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों—
तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा
भाषा संगम
“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है—
तोता (हिंदी), शुकः (संस्कृत), तोता (पंजाबी), तोता (उर्दू), तोतू (कश्मीरी), तोतो (सिंधी), पोपट (मराठी), पोपट, सूडो (गुजराती), पोपट (कोंकणी), सुगा (नेपाली), तोता (बांग्ला), भाटौ (असमिया), तेन्ना (मणिपुरी), शुआ (ओड़िया), चिलुक (तेलुगु), किलि (तमिल), शुकम्, तत्त (मलयालम), गಿಳि (कन्नड़)
- इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
- “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
वेबसाइट:
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
मराठी में तोता को “पोपट” कहते हैं।
वाक्य:
“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
मराठी:
“तो कुठून एक गोंडससा डोंगरी पोपट घेऊन आला होता.”
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