रीढ़ की हड्डी Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 6 में नाटक ‘रीढ़ की हड्डी’ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों और उत्तरों को सरल एवं आसान भाषा में समझाया गया है। इस पाठ में सामाजिक रूढ़ियों, विवाह में लड़कियों की स्थिति, दहेज और दिखावे जैसी समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यहाँ दिए गए उत्तर पाठ के आधार पर तैयार किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को अध्याय समझने और परीक्षा की तैयारी करने में आसानी होगी।

रीढ़ की हड्डी Class 9 NCERT Solutions | Hindi Ganga Chapter 6
मेरे उत्तर, मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
Q1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।
कारण: रीढ़ की हड्डी केवल शरीर का अंग नहीं है, बल्कि यह इंसान की मजबूती, आत्मविश्वास और नैतिक शक्ति का प्रतीक है।
Q2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पात्रों की निर्बलता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर।
कारण: नाटक में दिखाया गया है कि समाज लड़कियों की पढ़ाई को बोझ मानता है और विवाह में लेन-देन जैसी गलत परंपराएँ चलती हैं। इन्हीं पर व्यंग्य किया गया है।
Q3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं।”
यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।
कारण: यह वाक्य शंकर की कमजोरी और आत्मविश्वास की कमी को उजागर करता है। उसकी शारीरिक झुकी कमर उसके अंदर की कमजोरी का प्रतीक है।
Q4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।
कारण: उमा मानती है कि शिक्षा का मतलब केवल डिग्री लेना नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच विकसित करना है।
Q5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
कारण: दोनों ही समाज की पुरानी सोच और दिखावे में फँसे हुए हैं। वे शिक्षा और आधुनिक विचारों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते।
Q6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्त
उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।
कारण: पात्रों की बातचीत रोज़मर्रा जैसी है, लेकिन उसमें व्यंग्य और हास्य भी है। यही इसकी खासियत है।
मेरी समझ, मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
Q1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
(संकेत— उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर: बाबू रामस्वरूप बाहर से आधुनिक दिखने की कोशिश करते हैं—मेहमानों के लिए हारमोनियम, सितार और नाश्ता सजवाते हैं। लेकिन उमा की पढ़ाई को लेकर उनके विचार पुराने हैं। वे चाहते हैं कि उमा की शिक्षा छिपाई जाए ताकि विवाह में कोई समस्या न हो। यह दिखाता है कि उनका व्यवहार आधुनिकता का दिखावा है, पर सोच रूढ़िवादी है।
Q2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर: शंकर के लिए रीढ़ की हड्डी उसकी शारीरिक कमजोरी का प्रतीक है क्योंकि उसकी कमर झुकी हुई है। वहीं उमा के लिए यह शिक्षा, आत्मबल और स्वतंत्र सोच का प्रतीक है। इस तरह एक ही शब्द दो पात्रों के लिए अलग अर्थ रखता है।
Q3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर: प्रेमा कहती है कि पढ़ाई-लिखाई उसके समझ में नहीं आती। इससे पता चलता है कि उस समय लड़कियों की शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था। उन्हें बस थोड़ी बहुत गिनती और घरेलू कामकाज सिखाना ही काफी माना जाता था।
Q4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर: लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि यह शारीरिक और मानसिक दोनों मजबूती का प्रतीक है। शंकर की झुकी कमर उसकी कमजोरी दिखाती है, जबकि उमा की शिक्षा और आत्मविश्वास उसकी असली ताकत है। अगर दूसरा शीर्षक रखना हो तो “शिक्षा और आत्मबल” उपयुक्त होगा क्योंकि यह नाटक की मुख्य बात को सीधे बताता है।
एकांकी की पड़ताल
आप जानते ही हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है। एकांकी में भी एक कहानी ही होती है, लेकिन एकांकी की रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है।
आगे ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
| 1. एकांकी का नाम | 6. संवाद-निर्देश |
| 2. लेखक का नाम | 7. समस्या |
| 3. पात्र | 8. संवाद |
| 4. परिवेश/देश-काल | 9. मुख्य विचार |
| 5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश | 10. समाधान/परिणाम |
उत्तर:
- एकांकी का नाम: इस एकांकी का नाम “रीढ़ की हड्डी” है, जो आत्मबल और दृढ़ता का प्रतीक है।
- लेखक का नाम: लेखक जगदीशचंद्र माथुर हैं, जिन्होंने सामाजिक समस्याओं पर कई नाटक लिखे।
- पात्र: मुख्य पात्र हैं— उमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद और रतन।
- परिवेश/देश-काल: यह नाटक 1939 के भारतीय समाज की पृष्ठभूमि में है, जब स्त्रियों की शिक्षा और विवाह को लेकर रूढ़िवादी सोच प्रचलित थी।
- रंग-निर्देश/मंच-निर्देश: शुरुआत में कमरे की सजावट, तख्त, दरी और हारमोनियम रखने का मंच‑निर्देश दिया गया है।
- संवाद-निर्देश: पात्रों के बोलने के साथ‑साथ उनकी गतिविधियों का भी निर्देश है, जैसे— “रतन तख्त बिछाता है।”
- समस्या: विवाह के समय लड़की की पढ़ाई को समस्या माना जाता है और समाज कम पढ़ी‑लिखी लड़की चाहता है।
- संवाद: प्रेमा कहती है— “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” यह संवाद स्त्री‑शिक्षा पर समाज की सोच दिखाता है।
- मुख्य विचार: शिक्षा ही असली ताकत है और स्त्रियों को भी आत्मबल व स्वतंत्र विचार का अधिकार मिलना चाहिए।
- समाधान/परिणाम: अंत में स्पष्ट होता है कि असली “रीढ़ की हड्डी” आत्मविश्वास और शिक्षा है, न कि केवल शारीरिक शक्ति।
रंग-निर्देश
एकांकी की शुरुआत कुछ इस तरह से होती है—
(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नज़र आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।)
इस रंग-निर्देश द्वारा एकांकी की पृष्ठभूमि की रचना की गई है, जहाँ से एकांकी आगे बढ़ती है। एकांकी में स्थान, परिवेश, सामाजिक स्थिति आदि के विषय में पाठक और निर्देशक को सटीक जानकारी देने के लिए एकांकीकार/नाटककार प्रायः ऐसे रंग-निर्देशों का प्रयोग करता है। मंचन के समय निर्देशक के पास यह छूट होती है कि वह देश-काल और वातावरण के अनुसार मंच-सज्जा, प्रकाश, पात्रों के वस्त्र आदि में आवश्यक परिवर्तन कर सकता है।
अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत— (i) समूह बनाइए और उचित हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अभिनय कीजिए। (ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दिए गए रंग-निर्देश में परिवर्तन भी कर सकते हैं।)
उत्तर: एकांकी “रीढ़ की हड्डी” की शुरुआत रंग‑निर्देश से होती है, जहाँ एक साधारण कमरे का दृश्य दिखाया गया है। इसमें तख्त, दरी, हारमोनियम और पात्रों की गतिविधियों का वर्णन है। ऐसे रंग‑निर्देश मंचन के समय निर्देशक को यह समझने में मदद करते हैं कि पात्र कहाँ खड़े होंगे, कौन‑सा सामान रखा जाएगा और वातावरण कैसा होगा। कक्षा में प्रस्तुति के लिए विद्यार्थी किसी एक दृश्य का चुनाव कर सकते हैं—जैसे उमा और उसके माता‑पिता का संवाद या गोपालप्रसाद और शंकर का आगमन।
समूह बनाकर उचित हाव‑भाव और संवाद के साथ अभिनय किया जा सकता है। मंच‑सज्जा में भी परिवर्तन किया जा सकता है, जैसे कमरे की सजावट को सरल रखना या पात्रों के वस्त्रों को वर्तमान समय के अनुसार बदलना। इस तरह रंग‑निर्देश अभिनय को जीवंत और स्पष्ट बनाने में मदद करते हैं।
मेरी टिप्पणी
“जी हाँ, जाइए, ज़रूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!”
उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से पढ़िए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है, जो एक व्यंग्य की तरह है।
‘टिप्पणी’ किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। यह किसी के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी देने, किसी मुद्दे पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करने या किसी संदर्भ पर विचारों की अभिव्यक्ति होती है, जो पाठक को उस विषय पर एक नया दृष्टिकोण देती है।
टिप्पणी की कुछ विशेषताएँ हैं—
- संक्षिप्तता – इसमें विषय के मुख्य बिंदुओं को कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है।
- स्पष्टता – भाषा सरल, स्पष्ट और तर्कपूर्ण होनी चाहिए।
- व्यक्तिपरकता – इसमें व्यक्ति के विचारों और सुझावों को शामिल किया जाता है।
अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई यह टिप्पणी व्यंग्यपूर्ण है। “आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन!” कहकर वह शंकर की शारीरिक कमजोरी और नैतिक साहस की कमी पर चोट करती है। यह वाक्य केवल शंकर की झुकी हुई कमर का मज़ाक नहीं है, बल्कि उसके चरित्र की दुर्बलता को भी उजागर करता है।
उमा का यह व्यंग्य समाज की उस सोच पर भी प्रहार है, जहाँ लड़कियों की शिक्षा और आत्मबल को कम आँका जाता है, जबकि लड़कों की कमजोरी को छिपाया जाता है। इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि असली “रीढ़ की हड्डी” शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास है।
तुलना और विचार
Q1. “गोपालप्रसाद : भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।” एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
उत्तर: एकांकी में गोपालप्रसाद कहते हैं— “क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।” यह संवाद दिखाता है कि समाज लड़कों की शिक्षा को ज़रूरी मानता है, जबकि लड़कियों की पढ़ाई को बोझ समझता है। उमा की पढ़ाई को विवाह में समस्या माना जाता है, जबकि शंकर की पढ़ाई को गर्व से बताया जाता है। यह भिन्नता उस समय की सामाजिक सोच को उजागर करती है कि लड़कों को आगे बढ़ने का अधिकार है, पर लड़कियों को सीमित रखा जाता है।
Q2. “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।” एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
(संकेत— शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि।)
उत्तर: उमा कहती है— “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है।” यह संवाद दिखाता है कि वह आत्मविश्वासी, साहसी और अपने विचार खुलकर व्यक्त करने वाली है। उमा का व्यक्तित्व शिक्षा और स्वतंत्र सोच से मजबूत बना है। परिवार का व्यवहार भी उसे आत्मबल देता है, क्योंकि उसके पिता ने उसे पढ़ाया है। यही कारण है कि वह समाज की गलत मान्यताओं का विरोध करती है और अपने अधिकारों की रक्षा करती है।
एकांकी का विस्तार
“रतन : बाबूजी, मक्खन!
(सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)”
Q1. एकांकी के अंत में रतन कहता है— “बाबूजी, मक्खन…” और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?
(संकेत— हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि।)
उत्तर: लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत इसलिए किया क्योंकि यह पूरे नाटक की गंभीरता के बीच हास्य और व्यंग्य का स्पर्श देता है। विवाह, शिक्षा और समाज की रूढ़ियों पर गहरी चर्चा के बाद अचानक रतन का “मक्खन” कहना दर्शकों को हँसी में डाल देता है। यह एक तरह की टिप्पणी है कि समाज की बड़ी समस्याओं के बीच लोग अक्सर छोटी‑छोटी बातों में उलझे रहते हैं। इस तरह अंत हल्का‑फुल्का और व्यंग्यपूर्ण बन जाता है।
Q2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर: यदि परदा दोबारा उठे तो संभव है कि बातचीत फिर से विवाह की शर्तों और उमा की पढ़ाई पर लौटे। गोपालप्रसाद और शंकर उमा की शिक्षा पर आपत्ति जताएँ, जबकि उमा आत्मविश्वास से अपने विचार रखे। रामस्वरूप बीच‑बीच में समझौता करने की कोशिश करे और प्रेमा अपनी पुरानी सोच दोहराए। इस दृश्य में समाज की रूढ़ियों और उमा के आत्मबल का टकराव और भी स्पष्ट दिखाई देगा।
व्याकरण की बात
मेरे शब्द
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर: एकांकी “रीढ़ की हड्डी” से पाँच नए शब्द चुनकर उनके वाक्य और अर्थ इस प्रकार लिखे जा सकते हैं—
तख़्त
- वाक्य: “एक तख़्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं।”
- अनुमानित अर्थ: बैठने या लेटने के लिए लकड़ी का चौकोर पट्टा।
- शब्दकोश अर्थ: लकड़ी का बना चौड़ा पट्टा जिस पर लोग बैठते या सोते हैं।
दरी
- वाक्य: “और बीबी जी के कमरे से हारमोनियम उठा ला, और सितार भी!… जल्दी जा!”
- अनुमानित अर्थ: ज़मीन पर बिछाने वाला मोटा कपड़ा।
- शब्दकोश अर्थ: मोटे धागे से बनी चटाई जैसी बिछाने की वस्तु।
ग्रामोफोन
- वाक्य: “ग्रामोफोन बाजा होता है न?”
- अनुमानित अर्थ: पुराने समय का गाना बजाने वाला यंत्र।
- शब्दकोश अर्थ: ध्वनि रिकॉर्ड बजाने वाला यंत्र।
इंटरेंस
- वाक्य: “इंटरेंस ही पास करा लेते— लड़की अपने हाथ रहती।”
- अनुमानित अर्थ: प्रवेश परीक्षा।
- शब्दकोश अर्थ: किसी संस्था या कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए दी जाने वाली परीक्षा।
बैकबोन
- वाक्य: “आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन!”
- अनुमानित अर्थ: रीढ़ की हड्डी, यानी साहस और दृढ़ता।
- शब्दकोश अर्थ: रीढ़ की हड्डी; किसी व्यक्ति की ताकत और आत्मबल का प्रतीक।
भाषा में मुहावरे
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—
- “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।”
- “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
- “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज़ की दवा हो?”
- “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
- “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”
- “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
- “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
- “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
- संदर्भ में शब्द
उत्तर: एकांकी “रीढ़ की हड्डी” में कई मुहावरे प्रयोग किए गए हैं। नीचे दिए गए वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर नए वाक्य बनाए गए हैं—
भीगी बिल्ली की तरह
- मूल वाक्य: “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।”
- नया वाक्य: परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर छात्र भीगी बिल्ली की तरह चुपचाप बैठ गया।
मुँह फुलाए
- मूल वाक्य: “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
- नया वाक्य: दोस्त ने मेरी बात नहीं मानी तो वह मुँह फुलाए बैठा रहा।
किस मर्ज़ की दवा
- मूल वाक्य: “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज़ की दवा हो?”
- नया वाक्य: आलसी व्यक्ति को मेहनत कराने वाली कोई किस मर्ज़ की दवा नहीं है।
सिर चढ़ा रखा है
- मूल वाक्य: “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
- नया वाक्य: माता-पिता ने बेटे को इतना सिर चढ़ा रखा कि वह किसी की बात नहीं सुनता।
सब-कुछ उगले देती हो
- मूल वाक्य: “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”
- नया वाक्य: पुलिस पूछताछ में चोर ने डरकर सब-कुछ उगले दिया।
काँटों में घसीटना
- मूल वाक्य: “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
- नया वाक्य: गलत आरोप लगाकर उसे काँटों में घसीट दिया गया।
इज्जत उतारना
- मूल वाक्य: “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
- नया वाक्य: सभा में झूठा आरोप लगाकर उसकी इज्जत उतार दी गई।
मुँह छिपाकर भागना
- मूल वाक्य: “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
- नया वाक्य: परीक्षा में असफल होने पर वह मुँह छिपाकर भाग गया।
संदर्भ में शब्द
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर: कहावत “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर” का प्रयोग सामान्यतः नकारात्मक अर्थ में होता है, लेकिन इसे सकारात्मक रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि बेटा अपने पिता से भी अधिक योग्य या श्रेष्ठ हो।
उदाहरण वाक्य (सकारात्मक प्रयोग):
- पिता अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन बेटा तो राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बन गया— सचमुच बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
- शिक्षक विद्वान थे, पर उनकी बेटी ने तो शोध में नया कीर्तिमान बना दिया— बाप सेर है तो लड़की सवा सेर।
- पिता सफल व्यापारी थे, लेकिन बेटे ने कारोबार को और भी ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया— बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
आप भी संवाददाता
Q1. मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: यदि मैं संवाददाता होता तो सबसे पहले उमा से पूछता कि पढ़ाई और आत्मबल उसके लिए क्यों ज़रूरी हैं। उमा कहती कि शिक्षा से उसे स्वतंत्र सोच और आत्मविश्वास मिला है। बाबू रामस्वरूप से पूछने पर वे बताते कि समाज की परंपराओं के कारण उन्हें बेटी की पढ़ाई छिपानी पड़ती है। प्रेमा कहती कि लड़कियों को अधिक पढ़ाई की ज़रूरत नहीं है। वहीं गोपालप्रसाद और शंकर यह मानते हैं कि विवाह में लड़की कम पढ़ी‑लिखी होनी चाहिए। इस साक्षात्कार से दर्शकों को साफ पता चलता है कि समाज की पुरानी सोच और उमा की आधुनिक सोच में टकराव है।
Q2. मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: यदि मैं रिपोर्टिंग कर रहा होता तो कहता— “नमस्कार दर्शकों! मैं उमा के घर से सीधा प्रसारण कर रहा हूँ। अभी‑अभी शंकर और उसके पिता गोपालप्रसाद यहाँ पहुँचे हैं। घर में बातचीत का माहौल गंभीर है। बाबू रामस्वरूप मेहमानों को खुश करने के लिए हारमोनियम और नाश्ता सजवा रहे हैं। लेकिन उमा आत्मविश्वास से सामने आती है और अपनी शिक्षा पर गर्व व्यक्त करती है। शंकर की झुकी कमर और उमा की दृढ़ता के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है। यह दृश्य समाज की पुरानी सोच और नई पीढ़ी की स्वतंत्रता का टकराव दिखाता है। यही है ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी का जीवंत क्षण।”
भाषा संगम
“मक्खन वाले की दुकान दूर है।”
नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है—
मक्खन (हिंदी); नवनीतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी); मक्खन (उर्दू); ठॅन्य (कश्मीरी); मखणु (सिंधी); लोणी (मराठी); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (कोंकणी); नौनी, माखन (नेपाली); माखन, ननी (बांग्ला); माखन (असमिया); माखोन (मणिपुरी); लहुणी, मक्खन (ओड़िया); वेन्नै (तेलुगु); वेण्णै (तमिल); वेണ്ണ (मलयालम); वेಣ್ಣे (कन्नड़)।
- इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं, तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर: एकांकी “रीढ़ की हड्डी” में “मक्खन” शब्द का प्रयोग कई भाषाओं में अलग‑अलग रूपों में मिलता है। हिंदी में इसे मक्खन, संस्कृत में नवनीतम्, मराठी और कोंकणी में लोणी, तमिल में वेण्णै, और कन्नड़ में वेಣ್ಣे कहा जाता है। इन सबका अर्थ एक ही है— दूध से निकला हुआ मुलायम, चिकना पदार्थ।
मेरी मातृभाषा मराठी में इसे लोणी कहते हैं।
- वाक्य: “मक्खन वाले की दुकान दूर है।”
- मराठी में: “लोणीवाल्याची दुकान लांब आहे.”
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