दो बैलों की कथा मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध कहानी है, जिसे कक्षा 9 हिंदी (गंगा) के अध्याय 1 में शामिल किया गया है। इस कहानी में हीरा और मोती नाम के दो बैलों के माध्यम से मित्रता, निष्ठा, आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर चित्रण किया गया है। प्रेमचंद ने पशु पात्रों के जरिए समाज के नैतिक मूल्यों और ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
दो बैलों की कथा Class 9 NCERT Solutions Hindi Chapter 1 Ganga
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गव और दंभ
(घ) विद्रोह और विरोध
उत्तर: (ख) एकता और सहयोग
दोनों बैल हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देते हैं और भाईचारे का भाव दिखाते हैं।
2. हीरा- मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
उन्हें लगा कि उनकी सेवा के बाद भी उन्हें पराया कर दिया गया, इसलिए उन्होंने नया स्थान नहीं अपनाया।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निश्चय क्यों किया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए
वे अपने पुराने मालिक झूरी के स्नेह और अपनापन को याद कर रहे थे।
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय प्रवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर: (घ) अन्याय की रक्षा
मोती का गुस्सा अन्याय सहन न करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
लेखक ने बैलों को मानवीय भावनाओं से जोड़ा और उनकी सोच को जीवंत बनाया।
6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के अत्याचार और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
बैलों का संघर्ष भारतीय जनता के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है।
मेरी समझ, मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर: बैलों ने काम करने से इनकार किया क्योंकि उन्हें लगा कि नए मालिक ने उन्हें जबरन खरीदा है। वे अपने पुराने मालिक झूरी के स्नेह और अपनापन को याद कर रहे थे। इसलिए उन्होंने पाँव उठाने से मना कर दिया।
2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
(संकेत – वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर: बैलों का घर लौट आना साधारण नहीं था क्योंकि यह उनके और झूरी के बीच गहरे अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता है। वे केवल भोजन या आराम के लिए नहीं लौटे, बल्कि अपने मालिक के प्रेम और सम्मान के लिए लौटे। वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है कि इंसान या पशु अपने प्रियजन के पास ही लौटते हैं।
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!”
‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर: यह कथन दिखाता है कि कभी-कभी अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करना ज़रूरी होता है। कहानी में मोती ने डंडे की मार सहन नहीं की और विरोध किया। यह हमें सिखाता है कि चुप रहना हमेशा सही नहीं होता, अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना ज़रूरी है।
4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आज़ादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर: हीरा और मोती ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे। उन्हें स्वतंत्रता अच्छी लगी, लेकिन असली खुशी तब मिली जब वे अपने मालिक झूरी के पास लौटे। यह अपनापन ही उनके निर्णय का आधार था।
5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर: मैं इस कथन से सहमत हूँ कि अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है। अगर हम अन्याय को चुपचाप स्वीकार कर लें, तो वह और बढ़ता है। बैलों ने काम करने से इनकार करके दिखाया कि अन्याय का विरोध करना ज़रूरी है।
6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर: हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे।
- वे हमेशा साथ काम करते थे।
- कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बने।
- घर लौटने का निर्णय भी दोनों ने मिलकर लिया।
- इन घटनाओं से उनका गहरा भाईचारा स्पष्ट होता है।
7. “उसी समय मालिकिन ने आकर दोनों के माथे चूमे लिए।” कहानी में मालिकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर: मालिकिन ने बैलों को स्नेह और अपनापन दिया, जबकि छोटी लड़की ने उनकी मदद करके उन्हें आज़ादी दिलाई। दोनों का व्यवहार अलग था, लेकिन दोनों ने बैलों के प्रति प्रेम और करुणा दिखाई।
मेरी कल्पना, मेरे अनुमान
1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर: अगर मैं वह छोटी लड़की होता, तो बैलों की मदद इस तरह करता:
- मैं उन्हें चुपचाप खोल देता ताकि वे भागकर अपनी आज़ादी पा सकें।
- उनके साथ प्यार और अपनापन दिखाता ताकि उन्हें डर न लगे।
- उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाता ताकि वे अपने मालिक झूरी के घर पहुँच सकें।
2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी रोकता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ।
- कहानी का उदाहरण: बैल नए मालिक के यहाँ काम करने से डर और संकोच के कारण खड़े रह गए।
- मेरे अनुभव का उदाहरण: कभी-कभी हम भी परीक्षा या प्रतियोगिता में अच्छा मौका मिलने पर भी डर के कारण आगे नहीं बढ़ पाते।
- विचार: भय और संकोच इंसान को रोकते हैं, लेकिन साहस और आत्मविश्वास से हम अवसर का सही उपयोग कर सकते हैं।
मेरे अनुभव, मेरे विचार
1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर: हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। जब दोस्ती गहरी होती है तो मज़ाक, धौल-धप्पा और हँसी-मज़ाक अपने आप शुरू हो जाते हैं। इससे दोस्ती में अपनापन और विश्वास बढ़ता है।
2. “हीरा ने तिरस्कार किया– जगे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।”
आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर: हीरा का विचार अहिंसा और संयम को दिखाता है, जबकि मोती का विचार अन्याय के खिलाफ कठोर प्रतिरोध को। मेरी राय में दोनों ही विचार ज़रूरी हैं। कभी-कभी संयम से काम लेना चाहिए, और कभी अन्याय के खिलाफ मज़बूती से खड़ा होना चाहिए। इसलिए मैं दोनों के साथ हूँ।
3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?”
क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, मैंने भी अपने एक मित्र के साथ चुनौती का सामना किया है। उदाहरण: एक बार स्कूल में प्रतियोगिता के दौरान हमें टीम बनाकर कठिन प्रश्न हल करने थे। शुरुआत में हमें डर लगा, लेकिन हमने मिलकर मेहनत की और अंत में सफलता पाई। उस समय मुझे लगा कि सच्चा साथी वही है जो कठिन समय में साथ खड़ा रहे।
कहानी की पड़ताल
निर्देश:
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-व्यवसाय सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।
कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं।
आप कहानी लेखन की इस प्रजरिया को ध्यान मेें रखते हुए एक कहानी का ्शीषशिक चुजनए और जदए गए मेुख्य जबंदुओं को पूरा कीजिए—
| शीर्षक और लेखक | |
| विषय | |
| क्रिया/कार्य | |
| परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | |
| चरित्र/पात्र | |
| परिणाम |
उत्तर:
| शीर्षक और लेखक | शीर्षक: दो बैलों की कथा, लेखक: प्रेमचंद |
| विषय | कहानी का विषय है – अपनापन, स्वतंत्रता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष। |
| क्रिया/कार्य | कहानी में दो बैल हीरा और मोती अपने मालिक झूरी के प्रति निष्ठा और प्रेम दिखाते हैं। नए मालिक के यहाँ वे काम करने से इनकार करते हैं और अंत में रस्सी तोड़कर घर लौट आते हैं। |
| परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | ग्रामीण परिवेश, खेत-खलिहान और गाँव का जीवन इस कहानी की पृष्ठभूमि है। मुख्य विचार है – सच्चा संबंध केवल भोजन या आराम से नहीं, बल्कि प्रेम और अपनापन से बनता है। |
| चरित्र/पात्र | हीरा और मोती (मुख्य पात्र – बैल), झूरी (मालिक), गया (नया मालिक), मालिकिन और छोटी लड़की |
| परिणाम | बैल अपने पुराने मालिक के पास लौट आते हैं। यह दिखाता है कि प्रेम और अपनापन सबसे बड़ी शक्ति है। |
कहानी का सौंदर्य
निर्देश:
“दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गई।”
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य-सा बन जाता है। भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं।
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए—
| विशेषता | अर्थ | उदाहरण 1 | उदाहरण 2 |
|---|---|---|---|
| चित्रात्मक भाषा | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना | “घुटनों तक पाँव कीचड़ से भरे हैं।” | |
| संवादात्मकता | कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार और भाव व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग | “मर जाऊँगा, पर उनके काम तो आऊँगा।” | |
| विरोधाभास | एक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना | “झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया।” “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।” | |
| व्यंग्य | वह शैली जिसमें मज़ाक, हास्य या कटाक्ष के माध्यम से दोष, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है | “भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते।” — | |
| संघर्ष | दो विरोधी विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना | “उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं।” (बैल बनाम साँड़) — | |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे | “झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी झिड़कार पर दोनों उड़ने लगते थे।” — | |
| संदेह/उलझन | जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता | “सारा दिन बीत गया और खाने को एक दाना भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है?” |
उत्तर:
| विशेषता | अर्थ | उदाहरण 1 | उदाहरण 2 |
|---|---|---|---|
| चित्रात्मक भाषा | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना | “घुटनों तक पाँव कीचड़ से भरे हैं।” | ”घर का द्वार खुला और वही छोटी लड़की निकल आई।” |
| संवादात्मकता | कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार और भाव व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग | “मर जाऊँगा, पर उनके काम तो आऊँगा।” | “मालिक! मुझे मार ही डालोगे।” |
| विरोधाभास | एक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना | “झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया।” “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।” | “मालिकिन ने माथे चूमे, लड़की ने रस्सी खोल दी।” |
| व्यंग्य | वह शैली जिसमें मज़ाक, हास्य या कटाक्ष के माध्यम से दोष, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है | “भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते।” — | “सभ्य कहलाने के लिए ईंट का जवाब पत्थर से देना सीखना होगा।” |
| संघर्ष | दो विरोधी विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना | “उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं।” (बैल बनाम साँड़) — | “हीरा और मोती का नया मालिक से संघर्ष” |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे | “झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी झिड़कार पर दोनों उड़ने लगते थे।” — | “ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं, सभी उसमें प्रकट हो गए।” |
| संदेह/उलझन | जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता | “सारा दिन बीत गया और खाने को एक दाना भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है?” | “अब चलें नहीं?— हीरा ने कहा: चलते हैं, लेकिन कल आफ़त आएगी।” |
कहानी की रचना
प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
- मुख्य चरित्र – हीरा और मोती (दो बैल), जो झुरी के बैल थे।
- कहानी का समय – अंग्रेज़ी शासन का दौर, जब किसानों और पशुओं का जीवन कठिन था।
- कहानी की भाषा – सरल, जीवंत, ग्रामीण जीवन से जुड़ी, लोकप्रचलित शब्दों का प्रयोग।
- घटनाएँ – बैलों का मालिक बदलना, भूखा रहना, अपमान सहना, विद्रोह करना और अंत में झुरी के पास लौट आना।
- भावना और प्रतीक – बैलों का संघर्ष प्रतीक है कि स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।
कहानी का समय और समाज
‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेज़ों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेज़ी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए—
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
|---|---|
| जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आज़ादी की प्रेरणा जगी। |
| मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
| दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेज़ों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| साँड़ बड़ा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
उत्तर:
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
|---|---|
| जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आज़ादी की प्रेरणा जगी। |
| साँड़ बड़ा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
पशुओं के लिए कानून
नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
“मैं तो समझता हूँ, चराने के लिए आते हो। चुपके से चुरा ले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख़्तियार है?”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा।”
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।”
1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर:
- न्याय: कानून के अनुसार यदि कोई पशु खुले में घूमता है या विवादित होता है, तो उसे काँजीहाउस में बंद करना प्रशासनिक प्रक्रिया है। इससे व्यवस्था बनी रहती है और मालिक को अपने अधिकार का प्रमाण देना पड़ता है।
- अन्याय: हीरा-मोती जैसे बैल वफादार और मेहनती थे। उन्हें जबरन बंद करना उनके भावनात्मक लगाव और सेवा का अपमान था। यह अन्याय इसलिए भी था क्योंकि असली मालिक झूरी ने उन्हें कभी नहीं छोड़ा था, फिर भी उन्हें अलग कर दिया गया।
2. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।
(संकेत – “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है…।”)
उत्तर:
मान्यवर थानाध्यक्ष जी,
हम हीरा और मोती, झूरी के बैल हैं। हमें अन्यायपूर्वक काँजीहाउस में बंद किया गया है। हमने अपने मालिक की सेवा में कभी कमी नहीं की। हमें जबरन नए स्थान पर ले जाकर सूखा भूसा दिया गया, मार-पीट की गई और अपमानित किया गया।
हमारी शिकायत यह है कि –
- हमें हमारे असली मालिक से अलग कर दिया गया।
- हमें पर्याप्त भोजन और सम्मान नहीं दिया गया।
- हमें जबरन काम में जोता गया और डंडों से मारा गया।
हम चाहते हैं कि हमें तुरंत हमारे मालिक झूरी के पास लौटाया जाए। हमारे लिए यही न्याय होगा।
सादर,
हीरा और मोती
हमारी धरोहर और संस्कृति
1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!” कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर:
- गिरे हुए बैरी पर सींग नहीं चलाना
- औरत जात पर सींग नहीं चलाना
- अन्यायपूर्ण हिंसा से बचना
- मालिक के साथ विश्वासघात नहीं करना
2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भले ही जानते हो।” हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर:
- क्षमा और करुणा – गिरे हुए शत्रु पर हमला न करना।
- स्त्री का सम्मान – औरत जात पर सींग न चलाना।
- धर्म और मर्यादा – कठिन परिस्थिति में भी सही आचरण करना।
- अहिंसा का आदर्श – हिंसा से बचना और संयम रखना।
3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता।”
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
- पारंपरिक उपकरण: हल, बैल, दरांती, हँसिया, कुआँ, बैलगाड़ी।
- आधुनिक उपकरण: ट्रैक्टर, थ्रेशर, हार्वेस्टर, पंपसेट, स्प्रे मशीन।
(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं।
उत्तर:
- खेती में जुताई – हल और गाड़ी खींचना।
- अनाज और सामान ढोना – गाँव से शहर तक बैलगाड़ी।
- पानी खींचना – कुएँ से पानी निकालने में।
- गाँव की यात्रा – बैलगाड़ी से लोगों का आना‑जाना।
- संस्कृति और त्योहार – बैलपोला जैसे पर्व बैलों के सम्मान में मनाए जाते हैं।
अलग-अलग और साथ-साथ
1. “दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।” कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत – धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर:
- हीरा: धैर्यवान, शांत, सहनशील, समझदार।
- मोती: गुस्सैल, जल्दी आक्रोशित, साहसी, अन्याय सहन न करने वाला।
- समान गुण: मेहनती, वफादार, भाईचारे से जुड़े, मालिक के प्रति निष्ठावान।
2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर:
- हीरा का धैर्य मोती के गुस्से को संतुलित करता है।
- मोती का साहस हीरा की शांति को शक्ति देता है।
- दोनों मिलकर कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेते हैं।
3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं।
(संकेत – क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई के दौरान एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)
उत्तर:
- क्या करें:
- पढ़ाई में मदद करना
- एक-दूसरे की बात ध्यान से सुनना
- जरूरत पड़ने पर सहयोग करना
- क्या न करें:
- मजाक उड़ाना
- झगड़ा करना
- दूसरों की कमजोरी का फायदा उठाना
4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मुख-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।”
कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मुख-भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर: कहानी में हीरा और मोती आपस में इस तरह बातें करते होंगे:
- आँखों से इशारा करना
- पूँछ हिलाना
- सींग भिड़ाना (मजाक में)
- चाटकर या सूँघकर अपनापन जताना
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
- कक्षा में: शिक्षक की ओर देखकर समझ जाना कि चुप रहना है।
- घर पर: माँ का आँखों से इशारा करना कि काम करो।
- दोस्तों के बीच: हँसकर या हाथ के इशारे से बात करना।
- खेल में: टीम के साथी का इशारा देखकर पास देना।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।”
हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
1. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
(संकेत – ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर:
- ऑनलाइन मानचित्र देखकर रास्ता पता लगाया जा सकता है।
- पुलिस या सरकारी भवन से मदद मिल सकती है।
- सड़क पर लगे सूचना-पट और दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते देखकर दिशा समझी जा सकती है।
- विद्यार्थियों या स्थानीय लोगों से पूछकर सही मार्ग मिल सकता है।
2. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर: हर विद्यालय में निकासी मानचित्र होता है। इसे देखकर पता चलता है कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा से सबसे नज़दीकी और सुरक्षित रास्ता कौन‑सा है।
हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नज़र से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें—
- “आज का दिन…” से आरंभ करें।
- भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)।
- अंत में आशा या संकल्प लिखें।
(संकेत – “आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झरी हमें वापस ले जाएगा।”)
उत्तर: आज का दिन बहुत कठिन था। हमें काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। भूख से पेट जल रहा था। गया ने हमें डंडों से मारा और केवल सूखा भूसा दिया। हमारे दिल में दर्द और गुस्सा है।
पर हमें विश्वास है कि हमारा मालिक झूरी हमें वापस ले जाएगा। हम धैर्य रखेंगे और अपने घर लौटेंगे।
आज के समाचार
मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
कैसे लिखें—
- शीर्षक दें।
- घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)।
- परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।
(संकेत – शीर्षक: “दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ”)
उत्तर:
शीर्षक: “दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ”
घटना:
कल रात झूरी के बैल हीरा और मोती काँजीहाउस से भाग निकले। उन्होंने रस्सियाँ तोड़ दीं और सीधे अपने गाँव लौट आए।
परिणाम और प्रतिक्रिया:
गाँव के बच्चों ने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। लोग उन्हें “पशु‑वीर” कहकर सम्मानित करने लगे।
कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कैसे लिखें—
- बैलों की नई जगह।
- झरी की स्थिति।
(संकेत – “हीरा और मोती अब एक बड़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।”)
उत्तर: यदि बैल वापस न लौटते –
- हीरा और मोती किसी बड़े किसान के घर शांति से रहते।
- झूरी दुखी हो जाता और उन्हें याद करता।
- गाँव के लोग कहते कि ऐसे वफादार बैल अब किसी और के पास हैं।
चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें—
- हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
- दृश्य का क्रम – बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आज़ादी।
(संकेत – चित्र 4: “अब हम आज़ाद हैं।” )
उत्तर:
- बंद करना – “हमें यहाँ क्यों बाँधा गया?”
- भागने की योजना – “रात को रस्सी चबा देंगे।”
- दीवार तोड़ना – “चलो, अब आज़ादी पास है।”
- आज़ादी – “अब हम आज़ाद हैं!”
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