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कंजूस और सोना Class 9 Summary | Hindi Chapter 2 Reva

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कंजूस और सोना Class 9 Summary | Hindi Chapter 2 Reva में एक रोचक कहानी के माध्यम से लालच, कंजूसी और धन के प्रति अत्यधिक मोह के परिणामों को प्रस्तुत किया गया है। कहानी में घटनाओं के माध्यम से यह समझाया गया है कि केवल धन इकट्ठा करना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। यह पाठ विद्यार्थियों को संतोष, समझदारी और धन के सही उपयोग का महत्व समझने में मदद करता है। इस Summary में कहानी के मुख्य प्रसंग, पात्रों, घटनाक्रम, संदेश और सीख को सरल भाषा में समझाया गया है।

कंजूस और सोना Class 9 Summary | Hindi Chapter 2 Reva

कंजूस और सोना Class 9 Summary | Hindi Chapter 2 Reva

कहानी का सारांश

यह कहानी एक कंजूस आदमी की है। उसके पास बहुत ज़मीन थी, लेकिन उसे सोने की बहुत चाह थी। उसने अपनी सारी ज़मीन बेचकर सोने का बड़ा गोला बनाया और उसे ज़मीन में गाड़ दिया। वह रोज़ जाकर उस गोले को देखता और संतोष करता था। उसे न अपने परिवार की परवाह थी, न अपनी जान की, बस सोने के गोले की चिंता थी।

एक दिन किसी ने वह सोना चुरा लिया। कंजूस बहुत दुखी और गुस्से में हो गया। उसके पड़ोसी ने समझाया कि यह सोना तुम्हारे किसी काम का नहीं था। तुमने इसे कभी उपयोग में नहीं लिया। अगर चाहो तो उसकी जगह पत्थर रख लो और सोचो कि वही सोना है। असली धन वही है जिसका उपयोग किया जाए।

कहानी का विषय (Theme)

इस कहानी का मुख्य विषय है धन का सदुपयोग। लेखक यह बताना चाहते हैं कि धन केवल संग्रह करने के लिए नहीं होता, बल्कि उसका सही उपयोग करना ज़रूरी है। कंजूस आदमी ने अपनी ज़मीन बेचकर सोने का गोला बनाया और उसे ज़मीन में गाड़ दिया, लेकिन उसने उस धन का कभी उपयोग नहीं किया।

वह केवल उसे देखने में संतोष पाता था। जब सोना चोरी हो गया, तो उसे बहुत दुख हुआ, लेकिन पड़ोसी ने समझाया कि यह सोना तुम्हारे किसी काम का नहीं था। यदि धन का उपयोग परिवार, समाज या स्वयं के हित में न किया जाए, तो वह पत्थर के समान ही है। असली मूल्य उसी धन का है, जो दूसरों की भलाई और जीवन की ज़रूरतों में काम आए।

लेखक का परिचय

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हिंदी साहित्य के महान कवि और लेखक थे। उनका जन्म सन् 1896 में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर ज़िले के महिषादल गाँव में हुआ था। बचपन का नाम सूर्यकुमार था। उनकी शिक्षा केवल नौवीं कक्षा तक ही हुई, लेकिन साहित्य में उन्होंने ऊँचा स्थान पाया।

निराला छायावाद के प्रमुख कवि थे। उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण अपनी कविताओं और कहानियों में किया। बच्चों के लिए भी उन्होंने कई कहानियाँ लिखीं, जैसे – रामायण, महाभारत, महाराणा प्रताप, भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की कहानियाँ।

कविता से मिलने वाली शिक्षा

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि धन का महत्व तभी है जब उसका सही उपयोग किया जाए। यदि धन केवल जमा करके रखा जाए और जीवन या समाज के काम में न आए, तो उसका कोई मूल्य नहीं है। कंजूस आदमी ने अपनी ज़मीन बेचकर सोने का गोला बनाया और उसे ज़मीन में गाड़ दिया, लेकिन उसने उस धन का कभी उपयोग नहीं किया। जब वह सोना चोरी हो गया, तो उसे बहुत दुख हुआ। पड़ोसी ने समझाया कि यह सोना तुम्हारे किसी काम का नहीं था, क्योंकि तुमने इसे कभी खर्च नहीं किया।

कठिन शब्द और अर्थ

कठिन शब्दअर्थवाक्य
जमींदारीज़मीन का मालिकाना हकउस आदमी के पास बड़ी जमींदारी थी।
कंजूसजो धन खर्च न करेकंजूस आदमी ने सोने का गोला गाड़ दिया।
वहफाजतसुरक्षाउसने सोने के गोले को बड़ी वहफाजत से गाड़ा।
पूँजीधन या संपत्तिपड़ोसी ने कहा कि तुम्हारे पास असली पूँजी नहीं थी।
सदुपयोगसही उपयोगधन का सदुपयोग करना चाहिए।
गाड़नाज़मीन में दबानाकंजूस ने सोने का गोला ज़मीन में गाड़ दिया।
शौक ताज़ा करनामन को संतोष देनाकंजूस रोज़ सोने का गोला देखकर शौक ताज़ा करता था।

कठिन शब्दों का उच्चारण

  • जमींदारी → ज-मीं-दा-री
  • कंजूस → कन-जूस
  • वहफाजत → व-ह-फा-जत
  • पूँजी → पूं-जी
  • सदुपयोग → स-दु-उ-प-योग
  • गाड़ना → गा-ड़-ना

वाक्यांश और मुहावरे

वाक्यांश एवं मुहावरेअर्थवाक्य
धन का सदुपयोग करनाधन को सही काम में लगानाकहानी सिखाती है कि धन का सदुपयोग करना चाहिए।
कंजूस आदमीबहुत लालची व्यक्तिकंजूस आदमी ने सोने का गोला गाड़ दिया।
पत्थर को सोना माननाकल्पना में धन समझनापड़ोसी ने कहा कि पत्थर को सोना मान लो।

शब्द भंडार

  • जमींदारी – ज़मीन का मालिकाना हक
  • कंजूस – धन खर्च न करने वाला व्यक्ति
  • वहफाजत – सुरक्षा, देखभाल
  • पूँजी – धन या संपत्ति
  • सदुपयोग – सही उपयोग
  • गाड़ना – ज़मीन में दबाना
  • शौक ताज़ा करना – मन को संतोष देना
  • पत्थर – सोने की जगह रखा गया टुकड़ा
  • लालच – अधिक पाने की इच्छा
  • धन – पैसा या संपत्ति

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