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मेरी भी आभा है इसमें Class 9 Summary | Hindi Chapter 1 Reva

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मेरी भी आभा है इसमें Class 9 Summary | Hindi Chapter 1 Reva में कवि नागार्जुन ने देश की नई चमक, प्रकृति की सुंदरता और खेतों की सुनहरी फसलों के माध्यम से व्यक्ति के श्रम और योगदान को प्रस्तुत किया है। कवि को विश्वास है कि देश की प्रगति और सुंदरता में उसके परिश्रम, सपनों और त्याग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस Summary में कविता के मुख्य भाव, सरल भावार्थ, महत्वपूर्ण पंक्तियों और संदेश को आसान भाषा में समझाया गया है।

मेरी भी आभा है इसमें Class 9 Summary Hindi Chapter 1 Reva

मेरी भी आभा है इसमें Class 9 Summary Hindi Chapter 1 Reva

कहानी का सारांश

“नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है”

आकाश में नया सूरज चमक रहा है, जो नई रोशनी और नई आशा लेकर आया है।

“यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है”

धरती का बड़ा हिस्सा आज चमक रहा है, मानो नई ऊर्जा से भर गया हो।

“मेरी भी आभा है इसमें।”

कवि कहता है कि इस चमक में उसकी भी मेहनत और योगदान शामिल है।

“भीनी-भीनी खुशबू वाले रंग-बिरंगे यह जो इतने फूल खिले हैं”

फूल खिले हैं, जिनसे हल्की-हल्की खुशबू आ रही है और वे रंग-बिरंगे हैं।

“कल इनको मेरे प्राणों ने नहलाया था”

कवि बताता है कि कल उसने अपनी मेहनत और जीवन-शक्ति से इन फूलों को सींचा था।

“कल इनको मेरे सपनों ने सहलाया था।”

कल उसके सपनों ने इन फूलों को प्यार से छुआ और संवार दिया था।

“मेरी भी आभा है इसमें।”

फिर से कवि कहता है कि इस सुंदरता में उसकी भी चमक है।

“पकी सुनहली फसलों से जो अबकी यह खलिहान भर गया”

खेत सुनहरी पकी फसलों से भर गए हैं, जो मेहनत का फल हैं।

“मेरी रग-रग के श्रमणत की बूंदें इसमें मुस्काती हैं।”

कवि का पसीना और मेहनत इन फसलों में मुस्कुराती है, यानी उसकी मेहनत का परिणाम है।

“नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है मेरी भी आभा है इसमें।”

अंत में कवि फिर कहता है कि सूरज और धरती की चमक में उसकी भी मेहनत और सपनों की आभा है।

सारांश: कवि कहता है कि आज नए आकाश में नया सूर्य चमक रहा है और पूरा देश एक नई चमक से दमक रहा है। इस नई चमक और विकास में उसका भी योगदान है।

रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और सुंदरता में भी कवि अपने योगदान को देखता है। वह कहता है कि कल इन्हीं फूलों को उसके प्राणों ने सींचा और उसके सपनों ने प्यार दिया था।

इसी तरह खेतों में लहलहाती सुनहरी फसलें भी उसके लिए केवल फसल नहीं हैं। उसमें उसके श्रम और परिश्रम का योगदान है। उसकी रग-रग के खून की बूंदें इन फसलों को सींचने में लगी हैं।

इसलिए जब देश, प्रकृति और समाज नई चमक से भर रहे हैं, तो कवि गर्व से कहता है—

“मेरी भी आभा है इसमें।”

कहानी का विषय (Theme)

कविता का मुख्य विचार है कि धरती की सुंदरता और समाज की प्रगति में हर व्यक्ति का योगदान होता है। कवि यह बताता है कि फूलों की खुशबू, फसलों की सुनहरी चमक और सूरज की रोशनी में उसकी मेहनत और सपनों की चमक है। यह कविता हमें सिखाती है कि हमारी मेहनत और सपने दुनिया को सुंदर और उज्ज्वल बनाते हैं।

लेखक का परिचय

नागार्जुन का जन्म 1911 में बिहार के दरभंगा जिले में हुआ था। उनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था। वे हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम आदमी के जीवन को सरल और सच्चाई से व्यक्त किया। उनकी भाषा सीधी, सरल और दिल को छू लेने वाली है।

शिक्षा (कविता से मिलने वाली सीख)
इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मेहनत और सपनों का महत्व बहुत बड़ा है। समाज और प्रकृति की सुंदरता में हर व्यक्ति का योगदान होता है। श्रम से ही जीवन उज्ज्वल और सुंदर बनता है।

कठिन शब्द और अर्थ

कठिन शब्दअर्थवाक्य
आभाचमकसूरज की आभा से धरती रोशन हो गई।
खलिहानखेत का हिस्सा जहाँ फसल रखी जाती हैकिसान ने गेहूँ की फसल को खलिहान में रखा।
रग-रगशरीर का हर हिस्साउसकी रग-रग में देशभक्ति भरी है।
श्रमतमेहनतकिसान की श्रमत से खेत हरे-भरे हो गए।

कठिन शब्दों का उच्चारण

  • आभा → aa-bhaa
  • खलिहान → kha-li-haan
  • श्रमत → shra-mat

वाक्यांश और मुहावरे

वाक्यांश एवं मुहावरेअर्थवाक्य
मेरी भी आभा है इसमेंमेरा भी योगदान हैसमाज की प्रगति में मेरी भी आभा है इसमें।
मेरी रग-रग के श्रमत की बूंदें मुस्काती हैंमेरी मेहनत का फल दिख रहा हैखेत की सुनहरी फसल देखकर किसान बोला – मेरी रग-रग के श्रमत की बूंदें मुस्काती हैं।

शब्द भंडार

  • सूरज → प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत
  • गगन → आकाश
  • भूमि → धरती
  • फूल → प्रकृति की सुंदरता
  • खुशबू → सुगंध
  • सपने → आशा और कल्पना
  • फसलें → मेहनत का फल
  • पसीना → श्रम और मेहनत
  • प्राण → जीवन शक्ति

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